बरसाना में खेली गई विश्व प्रसिद्ध लठामार होली, प्रेम और भक्ति के रंग में डूबा पूरा ब्रज
मथुरा के बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लठामार होली भक्ति, प्रेम और परंपरा के भव्य संगम के साथ मनाई गई। नंदगांव के हुरियारों का दामाद की तरह स्वागत हुआ और रंगीली गली में हुरियारिनों ने प्रेमपूर्वक लाठियां बरसाईं। हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र रहे। लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच आयोजन शांतिपूर्ण संपन्न हुआ। यह अनूठी परंपरा राधा-कृष्ण की दिव्य प्रेम लीला का जीवंत प्रतीक है।
- नंदगांव के हुरियारों पर बरसी प्रेम की लाठियां, हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा और 4500 जवानों की सुरक्षा में संपन्न हुआ भव्य रंगोत्सव
मथुरा (बरसाना)। राधा रानी की नगरी बरसाना बुधवार को उस अलौकिक क्षण की साक्षी बनी, जब हजारों वर्षों पुरानी प्रेम परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। शाम करीब पांच बजे विश्व प्रसिद्ध लठामार होली का आयोजन हुआ, जहां नंदगांव से आए हुरियारों पर बरसाना की हुरियारिनों ने प्रेम की प्रतीक लाठियां बरसाईं। पूरा बरसाना अबीर-गुलाल, भक्ति और उल्लास के रंगों में ऐसा सराबोर हुआ कि हर गली, हर चौक और हर आंगन से केवल “राधे-राधे” और “श्याम-श्याम” के जयकारे गूंजते रहे।
यह दृश्य केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि श्रद्धा, परंपरा और प्रेम का जीवंत उत्सव था, जिसने लाखों श्रद्धालुओं के हृदय को भाव-विभोर कर दिया। देश-विदेश से आए श्रद्धालु इस दिव्य क्षण को अपनी आंखों में कैद करते नजर आए।
दामाद सा हुआ स्वागत, प्रेम और सम्मान की अनूठी परंपरा
बरसाना पहुंचने पर नंदगांव के हुरियारों का स्वागत प्रिया कुंड पर उसी आत्मीयता और सम्मान के साथ किया गया, जैसे किसी घर में दामाद का स्वागत होता है। यह परंपरा केवल रस्म नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक है, जो ब्रजवासियों के हृदय में आज भी जीवित है।
हुरियारों को मिठाई, पकोड़े, ठंडाई और भांग परोसी गई। स्वागत के बाद उन्होंने अपनी पारंपरिक पगड़ी बांधी और ब्रह्मांचल पर्वत पर स्थित श्री लाडली किशोरी जी मंदिर पहुंचकर राधा रानी से होली खेलने की आज्ञा ली। जैसे ही उन्होंने मंदिर में प्रवेश किया, वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस दिव्य क्षण को और भव्य बनाने के लिए हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई, जिससे पूरा क्षेत्र फूलों की सुगंध और आस्था के रंग में डूब गया।
रंगीली गली में जीवंत हुई 5000 साल पुरानी प्रेम लीला
दर्शन के बाद हुरियारे रंगीली गली पहुंचे, जहां ढोल-नगाड़ों की गूंज और ब्रज के पारंपरिक रसिया गीतों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। हुरियारों ने गीतों और नृत्य के माध्यम से हुरियारिनों को रिझाने का प्रयास किया। इसके जवाब में महिलाओं ने मुस्कुराते हुए लाठियों से वार किया, जबकि पुरुषों ने ढाल से अपना बचाव किया।
यह दृश्य केवल एक खेल नहीं, बल्कि उस प्रेम लीला का प्रतीक है, जब द्वापर युग में भगवान कृष्ण अपने सखाओं के साथ राधा रानी और उनकी सखियों को चिढ़ाने बरसाना आए थे और सखियों ने उन्हें प्रेमपूर्वक लाठियों से खदेड़ा था। यही परंपरा आज भी उसी आस्था और उत्साह के साथ निभाई जा रही है।
श्रद्धालुओं के लिए जीवन का अविस्मरणीय अनुभव
इस अद्भुत आयोजन को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कई श्रद्धालुओं की आंखों में आस्था और आनंद के आंसू छलक पड़े।
श्रद्धालु भारती ने कहा, “मैंने जीवन में पहली बार ऐसी होली देखी है। यहां लाठियों में भी प्रेम है, रंगों में भी भक्ति है। ऐसा लगता है जैसे साक्षात भगवान कृष्ण यहां उपस्थित हों।” श्रद्धालु स्वाति ने कहा, “इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद प्रशासन की व्यवस्था शानदार रही। जब हेलीकॉप्टर से फूल बरसे, तो वह क्षण जीवन का सबसे यादगार अनुभव बन गया।”
नंदबाबा मंदिर के मुख्य पुजारी मनीष गोस्वामी ने बताया कि यह परंपरा द्वापर युग से चली आ रही है और यह लाठियां चोट नहीं पहुंचातीं, बल्कि प्रेम, स्नेह और मनुहार का प्रतीक हैं।
योगी सरकार के प्रयासों से भव्य बना रंगोत्सव 2026
योगी सरकार ने ‘रंगोत्सव 2026’ को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पुष्प वर्षा और व्यवस्थाओं ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बना दिया। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और प्रबंधन के लिए विशेष तैयारी की थी।
अभेद्य सुरक्षा के बीच शांतिपूर्ण संपन्न हुआ आयोजन
लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। 4500 से अधिक पुलिसकर्मी, पीएसी और एंटी-रोमियो स्क्वायड की टीमें तैनात रहीं। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और एसएसपी श्लोक कुमार स्वयं गलियों में पैदल भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते रहे। सुरक्षा, व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता के कारण यह विशाल आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और सफल रहा।
प्रेम, भक्ति और संस्कृति का जीवंत संदेश
बरसाना की लठामार होली केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, परंपरा और संस्कृति का जीवंत संदेश है। यह हमें सिखाती है कि प्रेम में शक्ति होती है, आस्था में ऊर्जा होती है और परंपराएं हमारी पहचान होती हैं। जब पूरा बरसाना “राधे-राधे” के जयकारों से गूंजता है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं राधा-कृष्ण इस उत्सव में शामिल होकर मानवता को प्रेम और एकता का संदेश दे रहे हों। बरसाना की यह होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा को स्पर्श करने वाला दिव्य अनुभव है, जो हर श्रद्धालु के हृदय में हमेशा के लिए बस जाता है।
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