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केंद्रीय बैंकों की खरीद से सोने की कीमतों में तेजी: निर्मला सीतारमण

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सोने की कीमतों में मौजूदा तेजी का मुख्य कारण वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना-चांदी की बढ़ती खरीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में घरेलू मांग सामान्य है और चिंता की स्थिति नहीं है, जबकि आरबीआई बाजार पर लगातार नजर रखे हुए है। भारत की कीमती धातुओं के लिए आयात पर निर्भरता अधिक है। ताजा आंकड़ों के अनुसार सोने के आयात में मामूली वृद्धि हुई, जबकि चांदी के आयात में उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया।

नयी दिल्ली : केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कहा कि सोने की कीमतों में इस समय चल रही तेजी मुख्य रूप से दुनिया के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने-चांदी की खरीद बढ़ाये जाने के कारण है।श्रीमती सीतारमण ने कहा कि देश में सोने के निवेश और उपभोग मांग को देख कर ऐसा नहीं लगता कि स्थिति चिंता के स्तर पर है फिर भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की बाजार पर निगाह बनी हुई है। श्रीमती सीतारमण आरबीआई के केंद्रीय निदेशक मंडल की बजट पश्चात बैठक में भाग लेने के बाद संवाददाताओं को संबोधित कर रही थी।

वित्त मंत्री ने कहा, ‘आजकल अधिकांश देश, विशेष रूप से उनके केंद्रीय बैंक, सोना और चांदी खरीदकर भंडारित कर रहे हैं। जब आप भारतीय उपभोक्ता बाजार की बात करते हैं, तो यह एक प्रवृत्ति के रूप में दिखता है। हर केंद्रीय बैंक के पास कुछ न कुछ भंडार होता है, लेकिन हाल के दिनों में आपने देखा होगा कि कई अन्य देशों के केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं।” उन्होंने कहा, ‘ कीमतों में जो उछाल आया है, वह मुख्य रूप से केंद्रीय बैंकों द्वारा सोना खरीदने और उसे संग्रहित करने के कारण है।”श्रीमती सीतारमण ने घरेलू उपभोग के बारे में कहा कि यह हर मौसम और हर त्योहार के साथ जुड़ी एक सामान्य स्थिति रहती है। लेकिन सोनेऔर चांदी की वैश्विक कीमतों में जो असामान्य और सामान्य उतार-चढ़ाव से कहीं अधिक वृद्धि हुई है, उसका प्रभाव हर घरेलू खरीद पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा , ‘ कीमती धातुओं के मामले में हमारी निर्भरता लगभग पूरी तरह बाहरी स्रोतों पर है। हमारे पास सोने की खोज और उसके खनन का पर्याप्त घरेलू स्रोत नहीं है। इस दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन वे हमारी मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।’वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में सोना हमेशा से परिवारों के लिए एक पसंदीदा निवेश रहा है। घरेलू उपभोग की उच्च मांग में त्योहारों के मौसम के दौरान मौसमी उछाल भी देखने को मिलता है। उन्होंने कहा, ‘ हम इस स्थिति पर नजर रखे हुए हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह किसी चिंताजनक स्तर तक पहुंचा है। मेरा मानना है कि यह एक निश्चित सीमा से आगे नहीं गया है। हालांकि, भारतीय रिज़र्व बैंक भी इस पर निगरानी रखे हुए है।

“रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस वर्ष अप्रैल- दिसंबर 2025 तक के स्वर्ण आयात के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें एक साल पहले की तुलना में मूल्य के हिसाब से कोई बड़ा फर्क नहीं दिखता। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में सोने का आयात 1.83 प्रतिशत 49.39 अरब डॉलर के बराबर रहा जो इससे पिछले साल इसी अवधि में 48.51अरब डालर के बराबर था। इस दौरान सोने के आयात की मात्रा 18.29 प्रतिशत घटकर 5,22,380 किलोग्राम रह गई।वाणिज्य मंत्रालय के पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार इसी दौरान चांदी के आयात मूल्य के हिसाब से 128.95 प्रति के उछाल के साथ 7.77 अरब डॉलर हो गया, जो एक साल पहले इसी दौरान 3.39 अरब डॉलर था। इस दौरान चांदी के आयात की मात्रा भी 56.07 प्रतिशत बढ़कर 5727 टन हो गयी। (वार्ता)

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