
राज्यसभा में विचाराधीन कैदियों को मतदान अधिकार देने की मांग
राज्यसभा में भाजपा सांसद इरन्ना कडाड़ी ने जेलों में बंद लाखों विचाराधीन कैदियों को मतदान का अधिकार देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि जब तक अपराध सिद्ध नहीं होता, तब तक किसी नागरिक को वोट देने से वंचित रखना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से कानून की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन पर विचार करने का आग्रह किया।
- भाजपा सदस्य ने शून्यकाल में उठाया मुद्दा, कहा- चुनाव लड़ सकते हैं तो वोट देने का अधिकार क्यों नहीं
नयी दिल्ली । राज्यसभा में शुक्रवार को देश की जेलों में बंद लाखों विचाराधीन कैदियों को मतदान का अधिकार देने की मांग उठी। भारतीय जनता पार्टी के सदस्य इरन्ना कडाड़ी ने शून्यकाल के दौरान यह विषय उठाते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था में बड़ी संख्या में ऐसे कैदी हैं, जिनका अपराध सिद्ध नहीं हुआ है, फिर भी उन्हें मतदान के अधिकार से वंचित रखा गया है।
उन्होंने कहा कि देश की विभिन्न जेलों में लाखों विचाराधीन कैदी बंद हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे व्यक्तियों को कानूनन दोषी नहीं ठहराया गया है, इसके बावजूद उन्हें चुनाव में मत डालने की अनुमति नहीं है।
कडाड़ी ने इस स्थिति को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि देश में जेल में बंद व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है, बशर्ते वह अयोग्यता की अन्य शर्तों के दायरे में न आता हो, लेकिन विचाराधीन कैदी को मतदान का अधिकार नहीं दिया जाता। उन्होंने इस व्यवस्था की समीक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया।
सदस्य ने कहा कि लोकतंत्र में मतदान का अधिकार एक मूल राजनीतिक अधिकार है और जब तक किसी व्यक्ति को दोषी करार नहीं दिया जाता, तब तक उसे नागरिक अधिकारों से वंचित करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि इस विषय पर विधिक और संवैधानिक पहलुओं का परीक्षण कर आवश्यक संशोधन पर विचार किया जाए।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान कानूनों के तहत जेल में बंद व्यक्तियों के मतदान अधिकार पर प्रतिबंध लागू है, हालांकि इस विषय पर समय-समय पर न्यायालयों और विधि विशेषज्ञों के बीच बहस होती रही है।
सदन में इस मुद्दे के उठने के बाद संसदीय हलकों में इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनाव सुधार से जुड़ी महत्वपूर्ण बहस के रूप में देखा जा रहा है। (वार्ता)
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