लोकसभा में राहुल गांधी के बयान पर सरकार सख्त, विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने की तैयारी
नयी दिल्ली में संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। सरकार ने इसे विशेषाधिकार का उल्लंघन मानते हुए प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। उधर, श्री पुरी ने ‘एपस्टीन फाइल’ से जुड़े आरोपों को खारिज करते हुए तथ्यात्मक सफाई दी और राजनीति में जिम्मेदारी निभाने की बात कही।
- किरन रिजिजू ने कहा- बिना सूचना मंत्री पर आरोप नियमों का उल्लंघन, हरदीप पुरी ने एपस्टीन मामले पर दी सफाई
नयी दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने बुधवार को कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा एक केंद्रीय मंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। इसी आधार पर सरकार ने उनके विरुद्ध विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का निर्णय किया है।
संसद परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में श्री रिजिजू ने कहा कि बजट पर चर्चा के दौरान श्री गांधी ने बिना किसी पूर्व सूचना के केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाए। यह लोकसभा की परंपराओं और विशेषाधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की सूचना लोकसभा अध्यक्ष को दी जाएगी और आवश्यक संसदीय कार्रवाई की जाएगी।
श्री रिजिजू ने आरोप लगाया कि बजट चर्चा के दौरान विपक्ष के नेता ने कोई ठोस या रचनात्मक सुझाव नहीं रखा और केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रहे। उन्होंने बताया कि जब श्री गांधी आरोप लगा रहे थे, तब उनसे आग्रह किया गया था कि वे शाम पांच बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा दिए जाने वाले जवाब के समय सदन में उपस्थित रहें। इसके बावजूद श्री गांधी भाषण समाप्त करने के तुरंत बाद सदन से चले गए, जबकि संसदीय नियमों के अनुसार किसी सदस्य का भाषण देने के बाद तत्काल सदन छोड़ना उचित नहीं माना जाता।
उधर, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तथाकथित ‘एपस्टीन फाइल’ के संदर्भ में राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज किया। यहां आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा कि उनका नाम इस मामले से गलत और भ्रामक तरीके से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अनावश्यक विवाद खड़ा कर जनता को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है और बेबुनियाद आरोप लगाना अब विपक्ष के नेता की राजनीतिक शैली का हिस्सा बन गया है।
श्री पुरी ने स्पष्ट किया कि मई 2009 से लेकर करीब आठ वर्षों तक वे न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में तैनात रहे और वर्ष 2017 में केंद्रीय मंत्री बने। इस दौरान अंतरराष्ट्रीय बैठकों और आयोजनों के सिलसिले में उनकी कई वैश्विक हस्तियों से मुलाकातें हुईं, जिनमें जेफ्री एपस्टीन से तीन-चार औपचारिक मुलाकातें भी शामिल थीं। उन्होंने कहा कि ये मुलाकातें अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आयोजित कार्यक्रमों के दौरान हुई थीं और इनका किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधियों से कोई संबंध नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि विदेश सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट (आईपीआई) से जुड़ने का निमंत्रण मिला था, हालांकि वे संस्था के नियमित सदस्य नहीं थे। कार्यक्रमों या प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई मुलाकातों को संदर्भ से हटाकर पेश करना अनुचित है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि एपस्टीन के कथित द्वीप या उससे जुड़ी किसी भी गतिविधि से उनका कोई लेना-देना नहीं है।
श्री पुरी ने कहा कि उस समय उनका मुख्य संपर्क लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से था और उन्होंने इंटरनेट उद्यमी को भारत आने का निमंत्रण दिया था। उन्होंने विपक्ष के नेता को तथ्यों के आधार पर राजनीति करने की सलाह देते हुए कहा कि देश के सामने सही और प्रमाणिक जानकारी रखना सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में दो तरह के नेता होते हैं-एक वे जो केवल आरोप लगाते हैं और दूसरे वे जो जिम्मेदारी लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देते हैं। ऐसे जिम्मेदार नेतृत्व के कारण ही भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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