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“2026-27 बजट: क्या आपका जिला है इन योजनाओं में शामिल?”

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 में किसानों, युवाओं, महिलाओं और श्रमिकों के कल्याण पर विशेष ध्यान दिया गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसंरचना, ऊर्जा और तकनीकी विकास के लिए व्यापक प्रावधान किए गए हैं। यह बजट रोजगार सृजन, ग्रामीण समृद्धि और डिजिटल उत्तर प्रदेश की दिशा में निर्णायक कदम है।

  • उत्तर प्रदेश का बजट 2026-27: विकास, समावेश और आर्थिक मजबूती

उत्तर प्रदेश सरकार का 2026-27 वित्तीय वर्ष का बजट प्रदेश की आर्थिकी और समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाने की दिशा में व्यापक कार्यक्रम प्रस्तुत करता है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 11 फरवरी 2026 को विधानसभा में बजट पेश करते हुए बताया कि इस बजट का कुल आकार 9,12,696.35 करोड़ रुपये है, जो पिछले वर्ष से लगभग 12.9% अधिक है। कुल खर्च का 19.5% पूँजीगत व्यय के लिए रखा गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के लिए विशेष आवंटन किया गया है: शिक्षा पर कुल बजट का 12.4%, चिकित्सा-स्वास्थ्य पर 6% और कृषि व सम्बद्ध सेवाओं पर 9% खर्च होगा। केन्द्र सरकार की 16वीं वित्त आयोग की सिफारिश के अनुसार राजकोषीय घाटा 3% पर सीमित रखा गया है।

  • बजट आकार: ₹9,12,696.35 करोड़ (पिछले वर्ष से 12.9% अधिक)
  • वित्तीय मानक: राजकोषीय घाटा 3%, राज्य ऋण-जीडीपी अनुपात घटाकर 2024-25 में 27% से नीचे लाया (2026-27 में 23.1% तक लाने का लक्ष्य)।
  • खर्च के प्रमुख क्षेत्र: शिक्षा (कुल खर्च का 12.4%), स्वास्थ्य (6%), कृषि एवं सेवाएं (9%)।

वित्त मंत्री ने कहा कि पिछले दशकों में उत्तर प्रदेश के सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में वृद्धि हुई है और प्रति व्यक्ति आय बढ़ी है। वर्ष 2024-25 में राज्य का GSDP 30.25 लाख करोड़ रुपये तथा प्रति व्यक्ति आय लगभग 1.20 लाख रुपये थी (बजट प्रस्तुति में दी गई इन संख्याओं को ध्यान में रखते हुए)। बेरोजगारी दर मात्र 2.24% रह गई है। सरकारी बयानों के मुताबिक उत्तर प्रदेश अब देश का अग्रणी कृषि उत्पादन राज्य बन चुका है: यह धान, गेहूं सहित कुल 753.55 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न (2026-27 हेतु लक्ष्य) तथा 48.18 लाख मीट्रिक टन तिलहन उत्पादित करने का लक्ष्य रखता है। प्रदेश दुग्ध उत्पादन में भी अग्रणी है ( 388.15 लाख मीट्रिक टन जबकि देश का सर्वाधिक)। इन आंकड़ों से कृषि-डेयरी और आर्थिक विकास के आयाम उभर कर सामने आते हैं।

रोजगार और युवा सशक्तिकरण

उत्तर प्रदेश सरकार ने रोजगार सृजन को अहम प्राथमिकता दी है। वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से अब तक पुलिस विभाग में 2.19 लाख से अधिक (1,83,766 पुरुष और 35,443 महिला) कर्मियों की भर्ती की जा चुकी है तथा 1.58 लाख कर्मचारियों को पदोन्नति मिली है। वर्तमान में पुलिस बल में चयनित 60,244 आरक्षियों का प्रशिक्षण चल रहा है, और 83,122 गैर-न्यायिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। इसी तरह, शिक्षा विभाग में मिशन रोजगार के अंतर्गत अब तक 8,966 शिक्षकों की नियुक्ति पूरी हुई है (जिसमें 1,939 प्रवक्ता, 6,808 सहायक अध्यापक एवं 219 प्रधानाचार्य शामिल हैं)।

युवा उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना में प्रत्येक वर्ष एक लाख नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें युवाओं को बिना गारंटी और बिना ब्याज के ऋण उपलब्ध कराए जाएंगे। बजट में यह भी कहा गया कि यदि आवश्यकता पड़ी तो इस लक्ष्य को बढ़ाया जा सकता है।

कानून व्यवस्था और सुरक्षा सुनिश्चित करने का भी बजट में विशेष ख्याल रखा गया है। सरकार का दावा है कि पिछले कार्यकाल में कड़े उपायों से अपराध दर में भारी कमी आई है: 2016 की तुलना में अब डकैती के मामलों में 89%, लूट में 85%, हत्या में 47%, बलवा में 70% और फिरौती के लिए अपहरण के मामलों में 62% तक कमी दर्ज की गई है. महिलाओं के खिलाफ अपराध (हत्या 48%, दहेज मृत्यु 19%, दुष्कर्म 67%, शील भंग 34%) और अनुसूचित जाति/जनजाति उत्पीड़न संबंधी अपराधों (हत्या 43%, आगजनी 94%, बलात्कार 32%, गंभीर चोट 10% तक कमी) भी पिछली पीढ़ी की तुलना में कम हुए हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में अपराध नियंत्रण की दिशा में किए गए प्रयासों से जनता की सुरक्षा बढ़ी है। साथ ही लोक निर्माण में मदद के लिए पुलिस के आवासीय-गैरनिवासी भवनों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है। इस वित्त वर्ष में अनावासीय भवनों के लिए ≈1374 करोड़ तथा आवासीय भवनों के लिए 1243 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है. नवसृजित जनपदों में पुलिस भवनों के लिए 346 करोड़, अग्निशमन केंद्रों के लिए 200 करोड़ और मल्टीस्टोरी भवनों में अग्निशमन सुविधाओं के लिए 190 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल है. महिला बीट कर्मियों के लिए क्षेत्र भ्रमण वाहन के क्रय पर 25 करोड़ का आवंटन किया गया है.

महिला एवं छात्राओं का उत्थान

बजट में महिला सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया गया है। रानी लक्ष्मीबाई योजना के तहत मेधावी छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जाएगी, जिसके लिए बजट में 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। महिलाओं के सुरक्षा एवं शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री सुमंगला योजना के माध्यम से 26.81 लाख बालिकाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने हेतु 100 करोड़ की लागत से वूमेन बीपीओ (Women BPO) स्थापित किए जाएंगे तथा 16 लाख से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा।

चिकित्सा, स्वास्थ्य और आवासीय विकास

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी बजट में पर्याप्त संसाधन आवंटित किए गए हैं। प्रदेश में 2026-27 के लिए 37,956 करोड़ रुपये स्वास्थ्य और परिवार कल्याण हेतु प्रस्तावित हैं, जो पिछले वर्ष से 15% अधिक है। कोरोना महामारी के बाद सुदृढ़ की गई स्वास्थ्य संरचना को और मजबूती देते हुए हर जिले के अस्पताल में इमरजेंसी एवं ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की घोषणा की गई है। राज सुरक्षा योजना के तहत सड़क दुर्घटना और आपात स्थितियों में त्वरित सहायता हेतु हाईवे पर 250 आधुनिक एम्बुलेंस तैनात की जाएंगी। असाध्य रोगों के नि:शुल्क इलाज के लिए 130 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत–मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना को संभालने के लिए 500 करोड़ रुपये रखे गए हैं।

चिकित्सा शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में अब 81 मेडिकल कॉलेज होंगे (45 सरकारी और 36 निजी), और 14 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना पर 1,023 करोड़ रुपये का व्यय प्रस्तावित है. कैंसर संस्थान लखनऊ के लिए 315 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। एमबीबीएस सीटें 2017 के 4,540 से बढ़ाकर 12,800 की गई हैं, तथा पीजी सीटें 1,221 से 4,995 कर दी गई हैं।

बुनियादी ढाँचे एवं तकनीक निवेश

उच्च अवसंरचना और आधुनिक तकनीक पर जोर देने के लिए बजट में कई योजनाएं रखी गई हैं। सड़कों एवं सेतुओं के लिए कुल 34,468 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। इसमें नॉर्थ–साउथ कॉरिडोर का चौड़ीकरण तथा विभिन्न उच्च मार्गों पर सुधार कार्य शामिल हैं। योजनाओं में अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए 150 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। लखनऊ के कुकरैल वन में नाइट सफारी विकसित करने हेतु 207 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त सारनाथ, हस्तिनापुर जैसे ऐतिहासिक स्थलों के विकास के साथ 10 हजार पर्यटक गाइडों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया गया है।

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोर है। इस क्षेत्र के लिए कुल 2,059 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष से 76% अधिक है। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए उत्तर प्रदेश एआई मिशन शुरू किया जा रहा है, जिसके लिए 225 करोड़ रुपये रखे गए हैं। साइबर सुरक्षा के लिए नए साइबर सुरक्षा संचालन केंद्र स्थापना हेतु 95 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। प्रदेश में आठ डेटा सेंटर पार्क स्थापित करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इन पहलों से यूपी को डिजिटल हब बनाने की तैयारी की जा रही है।

औद्योगिक विस्तार के लिए सरदार पटेल एम्प्लॉयमेंट एवं इंडस्ट्रियल जोन हेतु 575 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSME) के लिए 3,822 करोड़ रुपये आवंटित हैं, जो पिछले वर्ष से 19% अधिक है। एक जनपद – एक उत्पाद के ढांचे पर अब नई योजना “एक जनपद – एक व्यंजन” शुरू की जा रही है, तथा ग्रामीण हस्तशिल्प-हथकरघा को प्रोत्साहन देने के लिए 4,423 करोड़ रुपये की योजना चलाई जाएगी।

कृषि, पशुधन एवं ग्रामीण कल्याण

किसान कल्याण और कृषि विकास के लिए बजट में विशेष पैकेज दिए गए हैं। कृषि योजनाओं के लिए कुल 10,888 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो पिछले साल से 20% अधिक है। वर्ष 2026-27 के लिए 753.55 लाख टन खाद्यान्न और 48.18 लाख टन तिलहन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। विद्युतीकरण को बढ़ावा देते हुए किसान के डीजल पंप सेट को सोलर पंप में बदलने हेतु 637.84 करोड़ रुपये, निजी नलकूपों को निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए 2,400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा नैशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के तहत 298 करोड़ रुपये आवंटित हैं।

किसान कल्याण के लिए कई अन्य योजना भी हैं: गन्ना किसानों के लिए वर्ष 2025-26 की पैदावार सत्र में प्रति क्विंटल ₹30 तक मूल्य वृद्धि की गई है, जिससे लगभग 3,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय होगी। बजट में पशुपालन को भी अहमियत दी गई है। मुक्त चरावास के गोवंश के रखरखाव हेतु 2,000 करोड़ रुपये तथा वृहद गो-रक्षण केंद्रों के लिए 100 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12.38 लाख गोवंश संरक्षित हैं; मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन से लाखों पशुपालकों को सीधे भुगतान किया गया है।

दुग्ध उद्योग के विकास के लिए मथुरा में प्रथम प्रस्तावित 30 हजार लिटर क्षमता वाले डेयरी प्लांट को संशोधित कर अब 1 लाख लिटर प्रति दिन क्षमता के नए डेयरी संयंत्र की स्थापना की योजना है, जिसमें 23 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। सहकारी दुग्ध संघों को सुदृढ़ करने हेतु 220 नए दुग्ध समितियों का गठन तथा 450 समितियों का पुनर्गठन प्रस्तावित है (इस कार्य के लिए 107 करोड़ रुपये)।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण के लिए भी महत्व दिया गया है। अन्नपूर्णा योजना के तहत 15,480 करोड़, मुफ्त LPG सिलिंडर रिफिल के लिए 1,500 करोड़ और अन्नपूर्णा भवन निर्माण के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित हैं। इन सुविधाओं से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पोषण एवं ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

खादी, ग्रामोद्योग व पर्यटन

ग्रामोद्योग और खादी उद्योग को भी संजीवनी देने के उपाय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना के अंतर्गत 2026-27 में 800 इकाइयां स्थापित कर 16,000 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य है (40 करोड़ बैंक ऋण सहायता से). गोरखपुर के खजनी में कम्बल उत्पादन केन्द्र का आधुनिकीकरण हेतु 7.50 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। माटी कला बोर्ड के तहत चल रहे पारंपरिक कारीगरों के विकास कार्यक्रम के लिए 13 करोड़ रुपये रखे गए हैं। साथ ही राज्य भर में अनुदानों के माध्यम से एक-एक जिला एक उत्पाद (ODOP) और अब “एक जनपद-एक व्यंजन” योजनाओं को शक्ति दी जा रही है।

पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों का विकास भी हुआ है। अयोध्या तीर्थ विकास परिषद के माध्यम से तीर्थक्षेत्र के लिए 150 करोड़ और प्रदेश के पर्यटन स्थलों के लिए कुल 250 करोड़ रुपये अलग से मुहैया किए गए हैं। इससे राम नगरी समेत सम्पूर्ण धार्मिक पर्यटन श्रंखला का कायाकल्प होगा।

शहरी विकास और आवास

शहरी क्षेत्र के विस्‍तार एवं बुनियादी सुविधाओं पर जोर है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण एवं नये शहर प्रोत्साहन योजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं【17†】। लखनऊ विकास क्षेत्र एवं अन्य विकास प्राधिकरणों के लिए विभिन्न अवसंरचना कार्य हेतु 800 करोड़ रुपये का प्रावधान है. मेरठ, मथुरा-वृन्दावन और कानपुर विकास प्राधिकरण के अंतर्गत आवास व उद्योग क्षेत्र विस्तार के लिए 750 करोड़ रुपये योजना में शामिल हैं। लखनऊ में बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल के संचालन, सुरक्षा एवं अनुरक्षण हेतु 50 करोड़ रुपये की आवंटन को मंजूरी दी गई है।

कुल मिलाकर यह बजट समावेशी विकास पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ने नौ वर्षों में प्रदेश की तस्वीर बदल दी है और इस बजट से सभी वर्गों (किसान, युवा, महिला, मजदूर, अनुसूचित जाति/जनजाति) के लिए विकासात्मक योजनाओं को गति मिलेगी। बजट का मकसद रहा है “गरिबी उन्मूलन एवं सबको साथ लेकर आगे बढ़ना,” और इसमें रक्षा, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, अवसंरचना और प्रवासी श्रमिकों जैसे सभी क्षेत्र शामिल हैं।

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