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बरहज क्षेत्र के कपरवार गाँव में स्वामी विवेकानंद जयंती पर सेवा, संस्कार और शिक्षा का संगम

बरहज क्षेत्र के कपरवार गाँव में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर शिक्षण सामग्री व स्नैक्स वितरण कार्यक्रम आयोजित हुआ। बच्चों में विशेष उत्साह दिखा। अतिथियों ने स्वामी विवेकानंद के विचारों से बच्चों को प्रेरित किया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षा के प्रति रुचि और नैतिक मूल्यों को मजबूत करना रहा।

देवरिया (बरहज)। बरहज क्षेत्र के कपरवार गाँव में राष्ट्रगौरव स्वामी विवेकानंद की जयंती के पावन अवसर पर बच्चों के बीच शिक्षण सामग्री एवं स्नैक्स वितरण का प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन केवल सामग्री वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बच्चों के मन में आत्मविश्वास, राष्ट्रभक्ति और शिक्षा के प्रति नई ऊर्जा का संचार करता दिखाई दिया। कार्यक्रम स्थल पर बच्चों के चेहरों पर उत्साह, जिज्ञासा और उल्लास साफ झलक रहा था।

इस सामाजिक एवं शैक्षिक कार्यक्रम का आयोजन भारत विकास परिषद के तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में परिषद की शाखा अध्यक्ष गौरव गोयल, शाखा सचिव अमित बरनवाल, कार्यक्रम संयोजक डॉ. मनोज मद्धेशिया तथा मुख्य अतिथि श्रवण गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष महत्व प्रदान किया। अतिथियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए शिक्षा को जीवन का सबसे सशक्त साधन बताया।

कार्यक्रम के दौरान भारत विकास परिषद के श्री अतुल बरनवाल ने स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र, उनके ओजस्वी विचारों और आदर्शों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों को बताया कि किस प्रकार स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, चरित्र निर्माण और राष्ट्रसेवा का मार्ग दिखाया। “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक रुको मत” जैसे विचारों ने बच्चों को गहराई से प्रभावित किया। उनके प्रेरक प्रसंग सुनकर बच्चों में स्वामी विवेकानंद के जीवन और दर्शन को जानने की तीव्र जिज्ञासा देखने को मिली।

इस अवसर पर बच्चों को कॉपी, पेंसिल, रबर तथा ड्राइंग/कैलिग्राफी की कॉपियाँ वितरित की गईं। साथ ही अल्पाहार के रूप में चिप्स और बिस्कुट के पैकेट प्रदान किए गए। सामग्री पाकर बच्चों के चेहरों पर मुस्कान और आत्मविश्वास का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम ग्रामीण बच्चों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

अतिथियों ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा के साथ संस्कारों का समावेश ही सशक्त समाज की नींव रखता है। स्वामी विवेकानंद के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही उनके आदर्शों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने परिषद द्वारा किए जा रहे सामाजिक, शैक्षिक एवं सेवा कार्यों की प्रशंसा करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने पर बल दिया।

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रनिर्माण, शिक्षा और सेवा के संकल्प के साथ हुआ। यह आयोजन न केवल बच्चों के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे गया कि जब सेवा, शिक्षा और संस्कार एक साथ जुड़ते हैं, तो एक उज्ज्वल और सशक्त भविष्य की नींव रखी जाती है।

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