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2017 में लिया एक फैसला… आज बनीं गांव की मिसाल, जानिए रीता देवी की कहानी

प्रयागराज मंडल के फतेहपुर जिले की रीता देवी ने ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर संघर्ष को सफलता में बदला। स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मिले ऋण से उन्होंने मत्स्य पालन और ब्यूटी पार्लर शुरू किया। आज वे न सिर्फ आत्मनिर्भर हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की राह दिखा रही हैं।

  • ग्रामीण आजीविका मिशन ने बदली आधी आबादी की जिंदगी, योगी राज में सशक्त और आत्म निर्भर हो रही हैं गांव की गृहणियां

प्रयागराज | उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का सपना-सूबे की आधी आबादी को आत्मनिर्भर बनाना-अब गांव-गांव में साकार होता दिखाई देने लगा है। खासकर ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी महिलाएं आज केवल अपने घरों की जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर पूरे समाज की दिशा बदल रही हैं। प्रयागराज मंडल से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि अवसर, विश्वास और परिश्रम मिल जाए तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, बदले जा सकते हैं।

डगरइया गांव की रीता देवी: संघर्ष से सफलता तक

फतेहपुर जिले के मलवा विकास खंड स्थित डगरइया गांव की रहने वाली रीता देवी कभी एक साधारण गृहिणी थीं। सीमांत किसान पति, कच्चा मकान और सीमित आमदनी-जीवन किसी तरह चल रहा था। भविष्य को लेकर चिंता हमेशा मन में बनी रहती थी। लेकिन वर्ष 2017 में उनकी जिंदगी ने एक नया मोड़ लिया। गांव की महिलाओं से उन्हें ग्रामीण आजीविका मिशन के बारे में जानकारी मिली। विश्वास जगा और साहस के साथ उन्होंने 10 महिलाओं के साथ मिलकर “जय संतोषी मां महिला स्वयं सहायता समूह” का गठन किया।

समूह के माध्यम से सीसीएल फंड से 1 लाख 40 हजार रुपये का ऋण मिला। यह राशि केवल पैसा नहीं थी, बल्कि रीता के सपनों की पहली पूंजी थी। उन्होंने गांव में मत्स्य पालन का कार्य शुरू किया। मेहनत रंग लाई और आज उनके पास तीन मछली टैंक हैं, जिनसे हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी हो रही है।

स्वावलंबन की उड़ान, सपनों को मिले पंख

रीता यहीं नहीं रुकीं। मत्स्य पालन से मिली आय ने उन्हें आत्मविश्वास दिया। उन्होंने एक ब्यूटी पार्लर भी शुरू किया, जिससे उनकी आय में और इजाफा हुआ। जो महिला कभी आर्थिक तंगी से जूझ रही थी, आज उसी महिला ने अपना पक्का मकान बनवाया है और अपने दोनों बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए मुंबई भेजा है। रीता देवी की आंखों में अब असहायता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और भविष्य के सपने हैं।

गांव की महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

रीता देवी आज केवल एक सफल उद्यमी नहीं हैं, बल्कि अपने गांव की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल बन चुकी हैं। उनकी सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। अब रीता 12 अन्य महिलाओं के साथ मिलकर मशरूम उत्पादन का कार्य भी शुरू कर रही हैं, जिससे और भी परिवारों की आमदनी बढ़ेगी।

फतेहपुर के उपायुक्त एनआरएलएम (स्वरोजगार) मुकेश कुमार बताते हैं कि जिले में अब तक 18,344 महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन हो चुका है, जिनसे 1,95,000 परिवार जुड़े हैं। जागरूक महिलाएं एक-दूसरे को प्रेरित कर रही हैं और आत्मनिर्भरता का यह कारवां लगातार आगे बढ़ रहा है।

एक महिला, एक बदलाव, अनेक मुस्कानें

रीता देवी की कहानी यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाएं जब सही हाथों में पहुंचती हैं, तो वे सिर्फ आजीविका नहीं बदलतीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का भविष्य संवार देती हैं। गांव की एक साधारण महिला आज सैकड़ों महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकी है। यही है ग्रामीण आजीविका मिशन की असली सफलता-जहां आत्मनिर्भर महिलाएं, आत्मनिर्भर भारत की नींव रख रही हैं।

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