दीपावली माह में सोने की चमक और चांदी की चाल: बाजार में उथल-पुथल, निवेशकों के लिए चेतावनी
दीपावली माह में सोने-चांदी के दामों ने ऐतिहासिक ऊँचाइयाँ छू लीं। अक्टूबर में सोना 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुँचा, जबकि चांदी 1.85 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर रही। फिलहाल बाजार में हल्की गिरावट और स्थिरता का दौर है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह त्योहारी मांग और वैश्विक आर्थिक बदलावों का असर है। मध्यमवर्गीय परिवारों को सलाह दी गई है कि निवेश के लिए जल्दबाजी न करें और डिप पर खरीदारी की रणनीति अपनाएँ।
त्योहारों की रौनक में सोना-चांदी दोनों ने रचे नए रिकॉर्ड, लेकिन विशेषज्ञ बोले – अभी निवेश में बरतें सावधानी, कीमतों में सुधार संभव
त्योहारों का मौसम आते ही बाजार में सोने-चांदी की चमक फिर से चर्चा में है। दीपावली के पहले और बाद के दिनों में दोनों धातुओं की कीमतों ने रिकॉर्ड स्तर छुआ, लेकिन साथ ही तेज़ उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। विश्लेषकों के अनुसार यह सिर्फ उत्सवजनित उछाल नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेश प्रवाह से भी जुड़ा हुआ दौर है। सवाल यह है कि क्या अब भी खरीदारी का सही समय है या मध्यमवर्गीय परिवारों को थोड़ी प्रतीक्षा करनी चाहिए?
सोने की तेजी: दीपावली से पहले उछाल, अब हल्की ठहराव की स्थिति
इस वर्ष सितंबर माह में 24 कैरेट सोने की कीमत करीब 1,17,600 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। अक्टूबर की शुरुआत में तेजी ने जोर पकड़ा और 17 अक्टूबर को यह 1,33,770 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक जा पहुंचा। धनतेरस और दीपावली के आस-पास यह दर 1,34,800 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गई – जो भारतीय बाजार में ऐतिहासिक ऊंचाई मानी गई।
21 अक्टूबर को सोना लगभग 1,27,630 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहा और आज, 22 अक्टूबर 2025 को दिल्ली, मुंबई और वाराणसी सहित देश के प्रमुख सर्राफ़ा बाजारों में 24 कैरेट सोने का औसत भाव करीब 1,25,800 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर स्थिर देखा गया।
विश्लेषकों का कहना है कि यह तेजी केवल भारतीय मांग की वजह से नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य के चलते भी बनी। डॉलर की कमजोरी, अमेरिका में ब्याज दरों के स्थिर रहने की उम्मीद और मध्य पूर्व सहित कई क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को “सेफ हेवन” यानी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ओर मोड़ा।
देश के सर्राफ़ा बाजार में आयात लागत, विनिर्माण चार्ज और स्थानीय प्रीमियम भी बढ़े। नतीजा यह रहा कि खुदरा स्तर पर सोने की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार से अधिक दिखाई दीं। हालांकि, विशेषज्ञ अब सावधानी की सलाह दे रहे हैं। वित्तीय बाजार विश्लेषक प्रवीण सिंह के अनुसार, “तेजी के बाद एक सामान्य सुधार की संभावना बनी रहती है। निवेशक जल्दबाजी में प्रवेश न करें। बेहतर होगा कि थोड़ी गिरावट आने के बाद ही नई खरीदारी करें।”
चांदी की चाल: दीपावली पर रिकॉर्ड, फिर हल्की गिरावट
दीपावली के दौरान चांदी ने भी इतिहास रचा। 31 अक्टूबर 2025 के आसपास देश के प्रमुख बाजारों में चांदी 1,72,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंची – यह अब तक का सबसे ऊँचा स्तर था। पर त्योहारी जोश के बाद मुनाफावसूली का दौर शुरू हुआ और तीन हफ्तों में चांदी 7,000 रुपये प्रति किलो सस्ती होकर 21 अक्टूबर को औसतन 1,65,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई।
अक्टूबर के प्रारंभ में चांदी करीब 1,51,000 रुपये प्रति किलोग्राम थी। बीच के दिनों में 1,85,000 रुपये का स्तर छूने के बाद अब यह 1,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार कर रही है।विशेषज्ञों का कहना है कि चांदी में यह गिरावट “लाभ बुकिंग” और डॉलर में हल्के सुधार का परिणाम है। त्योहारी मांग के बाद औद्योगिक खपत कुछ धीमी हुई और निवेशकों ने लाभ सुरक्षित करने के लिए बिक्री शुरू की।
इसके बावजूद 2025 के समग्र परिदृश्य में चांदी अब भी अपनी ऐतिहासिक ऊँचाइयों पर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और औद्योगिक क्षेत्रों में इसके बढ़ते उपयोग को देखते हुए विशेषज्ञ इसे “अल्पकालिक सुधार” मान रहे हैं।
बाजार में उथल-पुथल क्यों?
सोने और चांदी दोनों में यह उतार-चढ़ाव वैश्विक और घरेलू दोनों कारकों से जुड़ा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डॉलर की दिशा, ब्याज दरों की नीति, और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बदलाव सीधे असर डालते हैं। वहीं भारत में त्योहारों का सीजन परंपरागत मांग को बढ़ाता है। इस बार प्रीमियम स्तर भी असामान्य रूप से ऊँचे रहे – कई शहरों में अंतरराष्ट्रीय कीमतों से 50-70 डॉलर प्रति औंस तक अधिक। इससे आयातित सोना महंगा पड़ा और खुदरा बाजार में दरें ऊपर रहीं।
मध्यमवर्गीय परिवार क्या करें?
मध्यमवर्गीय उपभोक्ता इस दौर में सबसे बड़ी दुविधा में हैं। एक तरफ त्योहारों और शादियों का मौसम है, दूसरी तरफ कीमती धातुओं के ऊँचे भाव बजट बिगाड़ रहे हैं। विशेषज्ञों की राय है कि: उपयोग के लिए खरीदारी (जैसे शादी, उपहार या पारिवारिक कार्यक्रम) करने वालों के लिए अब भी मौका है, पर सीमित मात्रा में। निवेश के लिए खरीदारी की सोच रखने वालों को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। बाजार में 3-5% की गिरावट संभव है। सोने-चांदी के भावों में अगले महीनों में स्थिरता आने की उम्मीद है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार भी धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।
निवेशकों के लिए
बाजार के जानकारों का मानना है कि यह तेज़ी दीर्घकालीन ट्रेंड का हिस्सा है। भारत में सोने की मांग स्थायी रूप से मजबूत बनी रहेगी, लेकिन अल्पकाल में भाव ऊँचे हैं। चांदी के लिए यह समय “बुलिश” है – यानी रुझान ऊपर की ओर है, परंतु अगले एक-दो महीने में कुछ और उतार-चढ़ाव संभव हैं। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि जल्दबाजी में बड़ी खरीदारी न करें। थोड़ी गिरावट के बाद सोना या चांदी खरीदना ज्यादा समझदारी भरा कदम होगा।
त्योहारों की रौनक के बीच सोना और चांदी दोनों ने बाजार में नई ऊँचाइयाँ छुईं। दीपावली से पहले सोना 1.34 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुँचा और चांदी ने 1.85 लाख रुपये प्रति किलो का रिकॉर्ड बनाया। अब बाजार थोड़ा स्थिर है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह अस्थायी सुधार है। मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए यह वक्त भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों रूप से संतुलन का है – त्योहार की परंपरा निभाएँ, पर निवेश सोच-समझकर करें। आने वाले महीनों में बाजार का झुकाव स्थिरता की ओर रहेगा, पर सतर्क निवेशक ही मुनाफ़े में रहेंगे।
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डिस्क्लेमर: इस समाचार में दी गई जानकारी सामान्य बाजार रुझानों, विशेषज्ञ विश्लेषणों और उपलब्ध आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल जानकारी प्रदान करना है। यहां दी गई किसी भी सामग्री को निवेश सलाह (Investment Advice) के रूप में न लिया जाए। सोना-चांदी या किसी भी वित्तीय साधन में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। बाजार में उतार-चढ़ाव संभव है, इसलिए निवेश का निर्णय सोच-समझकर लें।



