
मथुरा : कान्हा की नगरी में पिछले आठ दशक से अधिक समय पहले से राम कथा के माध्यम से रामभक्ति के दीपक को प्रज्वलित रखने का काम रामायण प्रचारिणी समिति मथुरा द्वारा किया जा रहा है। इस बार समिति का 81वां आयोजन 18 दिसंबर से किया जा रहा है।देश के चोटी के कथाव्यासों द्वारा समिति के मंच पर प्रवचन का श्रवण लाभ हर साल उन हजारों तीर्थयात्रियों को भी मिलता है जो तीर्थाटन पर ब्रजभूमि में हर साल आते हैं। तुलसी ने यदि रामायण के माध्यम से रामभक्ति का बिगुल बजाया तो रामकथा कहने वालों ने समय समय पर इसमें मुलम्मा चढ़ाने का काम किया । इसी दिशा में मथुरा की रामायण प्रचारिणी समिति ने हर साल रामकथा का आयोजन बिना किसी आर्थिक लाभ की अपेक्षा के साथ किया तो धीरे धीरे इसके साथ लोग जुड़ते गए और यह आयोजन बुलन्दियों तक पहुंच गया।
समिति ने न केवल इस आयोजन की रजत, स्वर्ण एव हीरक जयंती मनाई बल्कि इसके माध्यम से पिछले 80 वर्षं से कान्हा की नगरी में ऐसा वातावरण तैयार किया कि यहां पर स्वतः राम भक्ति की गंगा प्रवाहित होने लगी और यदि श्री मदभागवत कथाकारों ने कथा के माध्यम से कान्हा की लीलाओं को जन जन तक न पहुंचाया होता तो संभवतः कान्हा की नगरी अयोध्या बन जाती।रामायण प्रचारिणी समिति के महामंत्री लक्ष्मन प्रसाद यादव समिति द्वारा आयोजित रामकथा के उत्कर्ष का श्रेय एक के बाद एक उन महान कथा व्यास को देते हैं जिन्होंने रामायण प्रचारिणी समिति के मंच पर रामकथा का ऐसा जीवन्त प्रस्तुतीकरण किया कि लोग समिति के कार्यक्रम की ओर चुंम्बक की तरह खिंचे चले आते हैं।
उन्होंने बताया महान कथा व्यास पं0 रामकिंकर जी ने तो अपनी कथा की शुरूवात रामायण प्रचारिणी समित के मंच से की थी।समिति के मंच पर अब तक देश के जानेमाने रामकथा के मूर्धन्य विद्वानों अयोध्या बड़ी छावनी के संत प्रेमदास महराज, रामभद्राचार्य, कृष्ण चन्द्र ठाकुर, भीमचन्द्र व्यास, पारसनाथ, साध्वी सरोजबाला, कृष्णादेवी, डा0 स्वर्णलता शर्मा, शंकुतला गोस्वामी, पंछीदेवी आदि ने समिति के मंच से रामभक्ति की ऐसी गंगा प्रवाहित की कि कान्हा की नगरी में न केवल रामभक्तों की संख्या बढ़ी बल्कि स्वामी वामदेव महराज, स्वामी नृत्यगोपाल दास, साध्वी ऋतंभरा आदि ने तो राम मन्दिर आंदोलन को ऐसी धार दी कि यह आंदोलन ऐतिहासिक बन गया । देश के चोटी के रामकथाकारों के प्रस्तुतीकरण का यह प्रभाव था कि समिति से जुगलकिशोर अग्रवाल, स्व0 सुरेशचन्द्र सुपारी वाले, सोहनलाल शर्मा एडवोकेट , कल्याण दास ब्रजवासी आदि एक के बाद एक समर्पित लोग इससे जुड़ते गए।
यादव को भरोसा है कि जिस प्रकार जोशीेले युवक समिति से जुड़ते जा रहें उससे वे कह सकते हैं कि समिति की रामकथा माला आगे भी अनवरत चलती रहेगी।समिति द्वारा आयोजित राम कथा में मूर्धन्य कथाकारों को समय समय पर बुलाने का यह प्रभाव पड़ा कि कोरोना काल या जिला प्रशासन द्वारा समय समय पर लगाए गए अघोषित कर्फ्यू में भी यह कथा बन्द नही हुई।समिति के रामकथा आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि चाहे कितना ही बड़ा कथा व्यास ही क्यों न हो किंतु समिति के मंच पर जीवन में उसे केवल एक ही बार प्रवचन करने का मौका मिलता है।समिति के इस आयोजन की दूसरी सबसे बड़ी विशेषता छप्पन भोग का आयोजन है। कान्हा की नगरी में बड़े स्तर पर गिर्राज जी का छप्पन भोग आयेाजित करने की पंरपरा है।हर साल होनेवाले गिर्राज जी के छप्पन भोग के आयोजन से हजारों लोग जुड़ते हैं।
समिति के अध्यक्ष जुगलकिशोर अग्रवाल का कहना है कान्हा की नगरी के अधिक से अधिक लोगों को इस अयोजन से जोड़कर उनमें भक्ति भाव जागृत करने और उन्हें मर्यादा पुरूषेात्तम श्रीराम का आशीर्वाद दिलाने के लिए 56 भोग अर्पित करने की भी परंपरा रामकथा के आयोजन के साथ की जाती है साथ ही युवकों मंे भक्ति भाव जागृत करने के लिए तथा उनके अन्दर संगीत की प्रतिभा निखारने के लिए संगीत संध्या का भी आयोजन किया जाता है।18 दिसंबर से 26 दिसंबर तक चलने वाले इस कार्यक्रम में जहां कथा व्यास के रूप में रामचरित मानस की प्रख्यात विदुषी साध्वी अर्पिता अविनाशी मानस पर प्रवचन करेंगी वहीं 21 दिसंबर को छप्पन भोग के दर्शन होंगे । इस अवसर पर कथा व्यास के साथ प्रसादी सेवा का अयोजन किया गया है।
कार्यक्रम के अन्तर्गत संगीत प्रतिभाओं का सम्मान एव संगीत संध्या का भी अयोजन 27 दिसंबर को किया गया है।इस अवसर पर कल्किधाम पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम का प्रवचन भी होगा।कुल मिलाकर समिति का यह आयोजन हर साल उन सैकड़ों लोगों के मोक्ष के द्वार खोलता है जो देश के जाने माने रामकथा व्यासों के प्रवचन में गोता लगाते हैं। (वार्ता)



