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समस्याओं के समाधान खोजकर आने वाली पीढ़ियों का बनाया जा सकता है बेहतर जीवन-मुर्मू

बांसवाड़ा : राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू ने ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन एवं मूल्यों के पतन की इन समस्याओं के समाधान खोजने की जरुरत बताते हुए कहा है कि तभी यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि आने वाली पीढ़िया एक बेहतर जीवन जी सके। इस संदर्भ में जनजातीय समुदायों के जीवन मूल्य अनुकरणीय है।श्रीमती मुर्मू बुधवार को बेणेश्वर धाम में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी आदिवासी महिलाओं के सम्मेलन को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदायों ने स्वशासन के अच्छे उदाहरण प्रस्तुत किए है। समाज के अन्य वर्गों के लोग जनजातीय समुदाय से बहुत कुछ सीख सकते है, आज मानव समाज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और ग्लोबल वार्मिंग की समस्या हो जलवायु परिवर्तन की या फिर मूल्यों के पतन की आज हमे इन सब समस्याओं के समाधान खोजने हैं।

उन्होंने कहा कि हमे उनसे सीखना चाहिए कि कैसे प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर खुशहाल रहना संभव है। सीखना होगा कि कैसे कम से कम साधनों से बिना प्रकृति को हानि पहुंचाये भी जीवन जीना संभव है। जनजातीय समुदाय के लोग स्वभाव से ही समानता और लोकतंत्र के मूल्यों को मानते रहे है। महिला सशक्तीकरण, समानता और लोकतंत्र के मूल्यों को मानते रहे है, महिला सशक्तीकरण समानता के मूल्यों का ही एक विशेष रुप हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि राजनैतिक, आर्थिक और सामाजिक न्याय के हित में अनेक विशेष प्रावधान हमारे संविधान में शामिल किए गए है। जनजातीय समाज को अवसर की समानता मिले, इसकी व्यवस्था भी संविधान तथा अन्य अधिनियमों एवं संस्थानों द्वारा सुनिश्चित की जाती है। अनुसूचित जनजातियों के लोग स्वयं अपनी स्थानीय शासन व्यवस्था चला सके, इसके लिए संविधान की पांचवी अनुसूची में विशेष व्यव्सथा की गई हैं। इस अनुसूची में दी गई व्यवस्था दस राज्यो में लागू हैं, इन राज्यों में राजस्थान भी शामिल हैं। जनजातीय समुदायों ने स्वशासन के अच्छे उदाहरण प्रस्तुत किए हैं।

उन्होंने कहा कि हमारे जनजातीय समाज में भी एक वर्ग ऐसा हैं जो अत्यंत पिछड़ा हुआ है और जिसकी क्षमताओं और प्रतिभाओं का समुचित उपयोग नहीं हुआ है। इन विशेष रुप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) की शुरुआत की गई हैं। हमे यह देखना होगा कि हमारे विकास की यात्रा में कोई भी पीछे न छूटे। प्रधानमंत्री वन धन योजना के माध्यम से जनजातीय भाई बहनों का आर्थिक विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से आजीविका सृजन के माध्यमों की पहचान करके उद्यमियता को बढावा दिया जा रहा है।श्रीमती मुर्मू ने कहा कि बिजली, पानी और सडक का मजबूत ढांचा आर्थिक एवं सामाजिक विकास का आधार है। आज आदिवासी बहुल क्षेत्रों में इनफ्रास्ट्रक्चर बनाने और बढ़ाने पर सरकार द्वारा तेजी से काम किया जा रहा है। हमारे आदिवासी भाई बहन तकनीकी का भी लाभ उठा सके इसके लिए दूर के इलाकों में डिजिटल इनफ्रास्ट्रक्चर भी बढाया जा रहा है।

उन्होंने कहा “पूरे समाज को प्रयास करना है कि महिलाएं आर्थिक विकास को गित प्रदान करें तथा महिला नेतृत्व में विकास की सोच को कार्यरुप दे। महिलाओं में शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा देना चाहिए। ऐसा करने से महिलाएं देश की विश्व की प्रगति में बराबर की साझीदार बन सकेगी। आज जनजातीय बहनें और बेटियां भारत की विकास यात्रा में सराहनीय योगदान दे रही है। मुझे विश्वास है कि भविष्य में भी ये भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में अग्रणी भूमिका निभाती रहेंगी। इनकी सफलता के बल पर ही समस्त भारत का भविष्य उज्जवल होगा।”उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार ने लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता से प्रभावित होकर लखपति दीदी के लक्ष्य को दो करोड़ से बढ़ाकर तीन करोड़ करने का निश्चय किया है। उन्हें खुशी है कि यह योजना सफलतापूर्वक अपने लक्ष्यों के अनुरुप कार्य कर रही है।

भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हर इकाई को स्वावलंबी होने की जरुरत-मुर्मू

राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू ने स्वयं सहायता समूहों और उससे जुड़े लोगों की सराहना करते हुए कहा है कि भारत आत्मनिर्भर तभी हो सकता है जब भारत की हर इकाई स्वावलंबी हो।श्रीमती मुर्मू बुधवार को यहां स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी आदिवासी महिलाओं के सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने स्वावलंबन को प्रोत्साहन देने के लए सभी स्वयं सहायता समूहों और उससे जुड़े हर व्यक्ति की सराहना की।उन्होंने कहा कि जनजातीय महिलाओं के सशक्तीकरण के इस महत्वपूर्ण आयोजन में आकर उन्हें प्रसन्नता हो रही है। माही, सोम और जाखम नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित बेणेश्वर धाम की यह भूमि बहुत ही पवित्र मानी जाती है । राजस्थान वीरों एवं इंद्रधनुषी संस्कृति की भूमि है, पधारो महारे देस की अतिथि सत्कार की भावना यहां की पहचान है।

उन्होंने कहा कि जब राजस्थान की वीरता की बात होती है तो यहां के आदिवासी समाज के भाई बहनों का गौरवशाली इतिहास हमेशा याद किया जाता है। महाराणा प्रताप की सेना में आदिवासी वीरों की संख्या बहुत बड़ी थी उन वीरों ने राणा का हरदम साथ दिया। आदिवासी माताएं और बहनें अपने पति और बेटों को मातृभूमि की सेवा में मर मिटने के लिए खुशी खुशी विदा करती थीं। उन्होंने कहा “मै उन सभी ऐतिहासिक वीर माताओं और बहनों को सादर नमन करती हूं, आधुनिक युग में भी हमारे देश की आदिवासी बहनें परिश्रम और प्रगति के अच्छे उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।”राष्ट्रपति ने कहा “पिछले साल दिसंबर में मैं जैसलमेर आई थीं जहां मैंने लखपति दीदी सम्मेलन को संबोधित किया, वहां मैंने देखा कि कैसे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। यह परितर्तन देश भर में हो रहा है। मैंने अनेक राज्यों में महिला स्वयं सहायता समूहों के सदस्यो को संबोधित करते हुए उनसे बातचीत करते हुए वहां की महिलाओं के आत्म विश्वास को महसूस किया है।

”उन्होंने कहा कि प्राय गरीब व्यक्ति विशेषकर महिलाओं को क्रेडिट या लोन मिलने में कठिनाइयो का सामना करना पड़ता है। यह खुशी की बात है कि महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर राजस्थान सरकार इस समस्या का समाधान निकाल रही है। स्वयं सहायता समूह न केवल कार्य पूंजी प्रदान करने का काम रहे है बल्कि मानव पूंजी और सामाजिक पूंजी बनाने में भी सराहनीय काम करते हैं। उन्हें बताया गया है कि महिलाओं के स्वास्थ्य एव स्वच्छता को सुनिश्चित करने के लिए राजस्थान सरकार निशुल्क सेनेटरी पैड का वितरण कर रही है। इस विवेकश्याील , प्रगतिशील एवं संवेदनशील कदम के लिए वह राज्य सरकार की सहराना करती है। (वार्ता)

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