
नई दिल्ली । वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) को सलाह दी है कि प्रस्तावित संशोधन के प्रभाव को उधारदाताओं के साथ-साथ अन्य कानूनों के तहत छूट पाने वालों के अधिकारों पर भी विचार किया जाना चाहिए। आर्थिक मामलों के विभाग का विचार है कि प्रस्तावित संशोधन मेट्रो अधिनियम की अन्य शर्तों को प्रभावित कर सकते हैं और मेट्रो परियोजनाओं के बारे में उधारदाताओं के दृष्टिकोण को भी प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि उधारदाताओं को ऐसी परियोजनाओं के राजस्व प्रवाह के लिए सहारा देने से इनकार किया जा सकता है।
व्यय विभाग (वित्त मंत्रालय) ने भी सुरक्षा उपायों की मांग की है, ताकि भारत सरकार के हितों की रक्षा के लिए महानगरों द्वारा भारत सरकार को बकाया राशि का भुगतान किया जा सके, जो कि अपरिवर्तनीय होगा। आवास व शहरी मंत्रालय ने मेट्रो अधिनियम में प्रस्तावित संशोधन पर विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों से टिप्पणियां मांगी गई थीं।प्रस्तावित संशोधन निश्चित रूप से आपूर्तिकर्ताओं/ठेकेदारों के अलावा अंतरराष्ट्रीय और घरेलू वित्त पोषण एजेंसियों को भारतीय बुनियादी ढांचा क्षेत्र में भागीदारी से हतोत्साहित करेगा। यह संशोधन समाधान करने की तुलना में अधिक चिंताएं उठाता है। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय का एकल बिंदु एजेंडा इस तरह के कदम के बाद के प्रभावों की परवाह किए बिना, मध्यस्थता निर्णयों और सिविल कोर्ट के आदेशों के अनुसार, निष्पादन कार्यवाही से मेट्रो रेल संपत्ति को घेरना है।(वीएनएस )



