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वायु सेना के पूर्वी सेक्टर में अभ्यास का तवांग घटनाक्रम से कुछ लेना देना नहीं: वायु सेना

नयी दिल्ली : वायुसेना ने गुरुवार को कहा कि पूर्वी वायु कमान द्वारा आज से शुरू किये गये दो दिन के अभ्यास का अरूणाचल प्रदेश के तवांग में हुए हाल के घटनाक्रम से कुछ लेना देना नहीं है और यह नियमित तथा पहले से निर्धारित है।वायु सेना के प्रवक्ता विंग कमांडर आशीष मोघे ने गुरूवार को कहा कि वायु सेना की पूर्वी कमान गुरुवार और शुक्रवार को अपने क्षेत्र में एक पूर्व नियोजित नियमित अभ्यास करेगी। यह अभ्यास तवांग में हाल के घटनाक्रमों से काफी पहले से निर्धारित है और यह तवांग की घटनाओं से जुड़ा नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह अभ्यास वायुसेना के पायलटों प्रशिक्षण के लिए आयोजित किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के तवांग में नौ दिसंबर के बाद बने हालात और भारत-चीन के बीच सैन्य गतिरोध को देखते हुए वायुसेना पूर्वोत्तर में आज से दो दिवसीय अभ्यास शुरू करेगी। इस अभ्यास में देश के सभी युद्धक विमान और इस क्षेत्र में तैनात अन्य संसाधन शामिल किए जाएंगे। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी चुनौतियों से निपटने के लिए सैन्य तैयारियों को परखने के मकसद से वायुसेना यह अभ्यास करेगी। अभ्यास का मकसद वायुसेना की युद्धक क्षमता को परखना भी है।

वायुसेना की युद्ध क्षमताओं और रणनीति का परीक्षण करने के लिए दो दिवसीय अभ्यास ऐसे समय में हो रहा है जब गत नौ दिसंबर को चीन और भारत के सैनिकों के बीच झड़प के बाद अरुणाचल में चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर फिर से तनाव बढ़ गया है।गौरतलब है कि संसद में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पूरे मामले की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि चीनी सेना ने तवांग सेक्टर में घुसपैठ के जरिए यथास्थिति बदलने की कोशिश की जिसका भारतीय जवानों ने करारा जवाब देते हुए उन्हें पीछे वापस खदेड़ दिया। उन्होंने कहा कि इस झड़प में दोनों तरफ के सैनिक घायल हुए हैं, लेकिन किसी भी भारतीय जवान को कोई गंभीर चोट नहीं लगी।(वार्ता)

तवांग इलाके में वायु सेना के लड़ाकू विमान गरजे, दो दिन चलेगा युद्धाभ्यास

अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में चीन सीमा के पास गुरुवार से भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों की गर्जना सुनाई दे रही है। भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 9 दिसंबर को हुई झड़प से बने तनावपूर्ण माहौल के बीच सुखोई-30 और राफेल जैसे फाइटर जेट उड़ान भरकर चीन को चुनौती दे रहे हैं। पूर्वोत्तर में चीन सीमा के पास वायु सेना का यह युद्धाभ्यास 48 घंटे तक चलेगा।पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में एलएसी पर चीन पिछले कुछ महीनों से आक्रामक रुख अपना रहा है। इसी माह की शुरुआत में कई बार चीन के ड्रोन्स ने भारतीय क्षेत्र की ओर उड़ान भरने की कोशिश की है। इसी के चलते भारतीय वायु सेना के लड़ाकू विमानों को चीन की हवाई घुसपैठ नाकाम करने के लिए हाल के हफ्तों में 2-3 बार उड़ान भरनी पड़ी है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में इस महीने की शुरुआत से चल रहे तनाव भरे माहौल के बीच 9 दिसंबर को भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई भी इसी का नतीजा है।

अरुणाचल प्रदेश के तवांग इलाके में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प के बाद से माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया है।इस बीच गुरुवार से पूर्वोत्तर में चीन सीमा के पास भारतीय वायु सेना ने शक्ति प्रदर्शन शुरू किया है। इस युद्धाभ्यास में भारत के लड़ाकू विमान सुखोई-30 और राफेल जैसे फाइटर जेट आसमान में गरज रहे हैं। इस युद्धाभ्यास में वायु सेना के लगभग सभी फ्रंटलाइन फाइटर जेट भी शामिल हो रहे हैं। इस युद्धाभ्यास का मकसद पूर्वी सेक्टर में अपने ऑपरेशन और क्षमताओं का परीक्षण करना है। वायुसेना की पूर्वी कमांड के नेतृत्व में वायु सेना का ये युद्धाभ्यास उत्तर-पूर्व के तेजपुर, छाबुआ, जोरहाट और हाशिमारा एयरबेस पर हो रहा है। चारों एयरफोर्स स्टेशन के सभी वायुवीरों को सक्रिय और अलर्ट पर रखा गया है।वायु सेना की पूर्वी कमांड ही पूर्वोत्तर से सटे चीन, बांग्लादेश और म्यांमार की सीमाओं की निगरानी करती है। भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट्स और हेलीकॉप्टर सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों में युद्धाभ्यास करेंगे। भारतीय लड़ाकू विमानों की गर्जना बीजिंग तक सुनाई पड़ेगी।

इस हवाई अभ्यास में लड़ाकू विमानों के अलावा अटैक हेलीकॉप्टर और कार्गो प्लेन भी शामिल हो रहे हैं, ताकि युद्धाभ्यास के साथ ही युद्ध की स्थिति के लिए अपनी तैयारियों को भी परखा जा सके। तेजपुर, छाबुआ, जोरहाट और हाशिमारा एयरबेस के सभी संसाधन इस युद्धाभ्यास में इस्तेमाल किए जाएंगे।वायु सेना के विंग कमांडर आशीष मोघे ने बताया कि इस युद्ध अभ्यास की योजना भारतीय और चीनी सेनाओं के आमने-सामने आने से बहुत पहले बनाई गई थी, इसलिए इस अभ्यास का हालिया झड़प से कोई संबंध नहीं है। पूर्वी वायु कमान के नेतृत्व में यह युद्ध अभ्यास फ्रंटलाइन एयरबेस और एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स में वायु सेना के चालक दल के प्रशिक्षण के लिए किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसमें सिर्फ फाइटर जेट्स की तैयारी नहीं देखी जाएगी बल्कि कार्गो ट्रांसपोर्टेशन, आपसी कम्यूनिकेशन, तेजी और समयबद्ध एक्शन की भी जांच की जाएगी। तभी पता चल सकेगा कि हम युद्ध की स्थिति में कितनी तेजी से तैयार हो पाते हैं।(हि.स.)।

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