
भीलवाड़ा । भीलवाड़ा जिले के कई राजघरानों के करोड़ों रुपये के सैकड़ों बेशकीमती हथियार भीलवाड़ा पुलिस के मालखाने से ही चोरी हो गए हैं। राजघरानों ने चांदी व अन्य कीमती मेटल से बने अपने हथियार करीब 50 साल पहले पुलिस मालखाने में जमा कराए थे। रियासतों के विलय और आर्म्स एक्ट लागू होने पर ऐसा करना जरूरी होने के कारण राजघरानों की ओर से पुलिस के मालखाने में इनको जमा करा दिये गये है। पुलिस लाइन के प्रभारी के बदलने के मौके पर चार्ज के लेनदेन के दौरान कमेटी ने अपनी जांच में इसका खुलासा किया है। जांच कमेटी की रिपोर्ट में प्रारंभिक तौर पर अनुमान लगाया गया है कि राजघरानों के 317 हथियार पुलिस मालखाने से गायब हैं। कर्नल जेम्स टॉड की ओर से बनेड़ा राजपरिवार को गिफ्ट में दी गई चांदी की दो पिस्टल भी चोरी कर ली गई।
इस सनसनी खेज प्रकरण के सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने भी भीलवाड़ा पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। अजमेर रेंज के आईजी रूपविंदरसिंह का कहना है कि यह भी जांच का विषय है कि मालखाने का इंटरनल इंसपेक्शन भी होता था तब क्यों नहीं यह मामला सामने आया। जांच करायी जा रही है दोषी को बख्शा नहीं जायेगा।उधर राजस्थान राज्य धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह जाड़ावत ने इसे भीलवाड़ा पुलिस की बड़ी चूक बताया है। उन्होंने कहा कि वो स्वयं डीजीपी से मिलकर पूरे राज्य में इस प्रकार की जांच की मांग करेंगे।
राजघरानों के जमा कराये गये हथियारों के चोरी होने के मामले को लेकर जिले के बनेड़ा राजघराने के मुखिया व भाजपा बनेड़ा मंडल अध्यक्ष गोपाल चरण सिंह सिसोदिया ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त कर मामले को गंभीर बताते हुए इसकी गहनता से जांच की मांग की है। उल्लेखनीय है कि पुलिस के मालखाने से हथियार चुराने वाले बदमाश भी इतने शातिर थे कि असली एंटीक हथियारों की जगह कई नकली हथियार रखकर चले गए। चोरी गए हथियारों में चांदी की 200 साल पुरानी पिस्टल, टोपीदार व सोने-हाथी दांत से नक्काशी वाली बंदूकें और राइफल शामिल हैं।
भीलवाड़ा जिले के बदनौर, बनेड़ा, हमीरगढ़, करेड़ा, नांदशा, बिजौलिया, मांडलगढ़ जैसे ठिकानों ने भी अपने अमानती और ऐतिहासिक हथियार जमा करा दिए थे। भीलवाड़ा के अलग-अलग राजघरानों के 174 हथियार गायब हैं। अकेले बनेड़ा राज परिवार की दो चांदी की पिस्टल और 12 टोपीदार बंदूक है। जिनकी कीमत एक करोड़ रुपये थी।बनेड़ा राज परिवार के मुखिया व बनेड़ा भाजपा मंडल अध्यक्ष गोपाल चरण सिसोदिया ने कहा कि फरवरी में इंग्लैंड की रॉयल एशियन सोसाइटी का प्रोग्राम है। उसमें चांदी की पिस्टल पर भी चर्चा होगी, लेकिन अब उन्हें क्या जवाब दिया जाएगा।
गोपाल चरण सिंह सिसोदिया ने बताया कि मालखाने से चोरी हथियारों में दो चांदी की पिस्टल भी थी। ये पिस्टल कर्नल जेम्स टॉड ने बतौर गिफ्ट बनेड़ा महाराजा भीम सिंह को दी थी। उन्होंने बताया कि कर्नल जेम्स टॉड ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के एक अधिकारी और भारतविद् थे। वह इंग्लैंड के रहने वाले थे। साल 1817-18 में पश्चिमी राजपूत राज्यों के पॉलिटिकल एजेंट बनकर उदयपुर आए थे। 5 साल तक अलग-अलग रियासतों का इतिहास और सामंती प्रथा की जानकारी ली थी।
उन्होंने बताया कि कर्नल ने राजस्थान में रहते हुए 1820 में बनेड़ा राजा भीम सिंह से भी मुलाकात की थी। महाराज भीम सिंह उनका स्वागत करने के लिए दो मील तक गए थे। कर्नल व महाराज के बीच दोस्ती हो गई थी। महाराज भीम सिंह कर्नल को छोड़ने के लिए उनके टेंट पर भी गए थे। तब कर्नल टॉड ने उन्हें दो चांदी की पिस्टल और एक टेलिस्कोप गिफ्ट किया था। दोनों पिस्टल को आजादी के बाद 1959 में आर्म्स एक्ट लगने पर मालखाने में जमा करवाया गया था।
गोपाल सिंह ने बताया कि कर्नल टॉड को राजस्थान और अन्य राज परिवारों की ओर से दिए गए गिफ्ट और किताबों को इंग्लैंड में एक म्यूजियम में रखा गया था। म्यूजियम को संभालने के लिए रॉयल एशियन सोसाइटी बनाई गई थी। अब करीब 200 साल बाद एशियन सोसायटी के सदस्य टॉड के भारत दौरे की अलग-अलग जगहों पर जा रहे हैं। उनकी किताब में लिखी बातों की जांच की जा रही है। एक महीने पहले सोसाइटी की सदस्य एलिजाबेथ ड्राइवर भी बनेड़ा आई थीं। फरवरी में रॉयल एशियन सोसाइटी की ओर से कार्यक्रम किया जा रहा है, जिसमें कर्नल जेम्स टॉड की ओर से दी गईं दोनों पिस्टल के बारे में भी चर्चा होगी। उससे पहले ही पिस्टल मालखाने से चोरी हो गई।
गायब हुए हथियार ऐतिहासिक रूप से काफी मूल्यवान हैं। वर्तमान में हेरिटेज हथियारों के रेट की बात करें तो गायब हुई चांदी की एक पिस्टल की रेट 30 से 35 लाख रुपये है। एक टोपीदार बंदूक की कीमत 8 से 10 लाख रुपये आंकी जा रही है। सब मिलाकर करीब एक करोड़ की कीमत है।बनेड़ा राज परिवार की ओर से पुलिस लाइन में 14 हथियार जमा करवाए गए थे। इसमें 2 चांदी की पिस्टल व 12 टोपीदार बंदूक थी। इन बंदूक को बनेड़ा राजा सरदार सिंह ने 1737-38 में शाहपुरा से युद्ध में, 1836-55 के बीच राजा संग्राम सिंह ने मराठा के खिलाफ सतारा व पनाला की लडाई में और अंतिम बार 1855 से 1905 में राजा गोविंदसिंह ने अपने युद्ध में काम लिया था।
दो कमेटी की जांच में हथियार शाखा में गड़बड़ी मिली
भीलवाड़ा एसपी आदर्श सिद्धू ने बताया कि 28 जुलाई को पुलिस अधिकारियों की दो कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी को हथियार शाखा में गड़बड़ मिली थी। मालखाने में जब्त किए गए करीब 317 हथियार गायब मिले। पुलिस की कमेटी ने तीन महीने तक इस मालखाने के सभी हथियारों की जांच की है। इसमें 50 साल पहले राज परिवारों की ओर से जमा कराए गए पिस्टल, देसी बंदूक और राइफल जैसे हथियार भी शामिल हैं। कमेटी ने हथियार शाखा के प्रभारी शंकरलाल के खिलाफ प्रताप नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। मामले की जांच अब प्रताप नगर थाना प्रभारी राजेंद्र गोदारा कर रहे हैं।
यह हथियार मिले गायब
कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में मालखाने से सिंगल और डबल बैरल की 135 बंदूक, 12 बोर के 3 तमंचा, 8 पिस्टल, सिंगल और डबल बैरल की 141, 12 बोर की 4 बंदूकें, 12 बोर बैरल 4, राइफल 7, राइफल बैरल 8, 12 बोर तमंचा 8 यह हथियार कम है जो रिकॉर्ड में फर्जी तरीके से चढ़ाए गए हैं। चोरी हुई 12 बंदूक भी काफी ऐतिहासिक है। इन बंदूक पर सोने और चांदी से कारीगरी की गई है। साथ ही हाथी दांत को लगाया गया है। यह सभी बंदूक इंग्लैंड से बनेड़ा राज परिवार ने खरीदी थी।(हि.स.)



