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जेल के अंदर कैदियों ने बनाया अपना ‘विश्वनाथ धाम’, रोजाना लगाते हैं हाजिरी, गुनाहों के लिए मांगते हैं माफी

  • कानूनी बंदिशों के चलते बाबा विश्वनाथ के चौखट तक नहीं पहुंच सकते बंदी
  • जेल प्रशासन के सहयोग से कारागार में ही सजाया बाबा विश्वनाथ का दरबार
  • अधिकांश बंदी आस्था के साथ बाबा के दरबार में रोजाना लगाते हैं हाजिरी

रत्नेश राय

वाराणसी । नव्य व भव्य श्री काशी विश्वनाथ धाम की महिमा अब जेल की चाहरदीवारियों के भीतर तक पहुंच गई है। नियम के तहत जिला जेल के बंदी जब बाबा के दर्शन के लिए विश्वनाथ धाम तक नहीं पहुंच पाए तो उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ धाम का चित्र ही जेल की दीवारों पर उकेर दिया। अब हर रोज़ वे विश्वनाथ जी के दर्शन कर पाते हैं।

पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट श्री काशी विश्वनाथ धाम के विस्तारित और सौंदर्यीकरण होने के बाद इसकी महिमा देश विदेश तक पहुंची, तो शिव भक्तों का हुजूम बाबा के धाम में उमड़ पड़ा। बाबा के दरबार की महिमा जेल तक भी पहुंची, लेकिन कानून की बंदिशों के चलते जेल के बंदी बाबा के चौखट तक नहीं जा सकते, लेकिन ‘जहां चाह वहां राह’ की कहावत को चरितार्थ करते हुए बंदियों ने विश्वनाथ धाम की हूबहू तस्वीर जेल की दीवारों पर बना दी है।

अब अधिकांश बंदी आस्था के साथ बाबा के इसी दरबार में रोजाना हाजिरी लगाते हैं। कैदी यहां अपने गुनाहों की माफी भी मांगते हैं। यही नहीं बंदियों ने संत कबीर जन्मस्थली, तुलसीदास और भगवान बुद्ध की उपदेश स्थली सारनाथ, काशी के घाट की विश्व प्रसिद्ध आरती समेत काशी की छटा दीवारों पर उकेरी है।

वाराणसी जिला जेल के अधीक्षक अरुण कुमार सक्सेना ने बताया कि अमृत महोत्सव के तहत कैदियों ने बनारस के प्रमुख स्थलों को जेल कैंपस की दीवारों पर उकेरा है। थ्री डी तस्वीरों को तीन बंदियों ने तीन महीने में तैयार किया है। बंदी कलाकारों की मांग पर इसके लिए सीमेंट, रेत, रंग और अन्य सामग्री जेल अधीक्षक ने उपलब्ध करायी है। पेंटिंग तीन कैदियों राक्षस बच्चन द्रविड़, भोलाराम और मनीष शर्मा ने बनाया है। कुछ कैदियों ने इनका सहयोग भी किया है। बंदियों का कहना है कि काशी विश्वनाथ धाम की पेंटिंग बनाने और रोज दर्शन करने से मन को सुकून और शांति मिलती है।

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