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लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन, 6 अहम संकल्प पारित

लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का समापन हो गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि 24 राज्यों के 36 सदस्यों ने भाग लिया। सम्मेलन में तकनीक व एआई के उपयोग, विधायकों की क्षमता निर्माण और जनता के प्रति जवाबदेही पर चर्चा हुई। छह संकल्प पारित हुए, जिनमें 2047 विकसित भारत लक्ष्य, न्यूनतम 30 दिन विधानसभा सत्र और नेशनल लेजिस्लेटिव इंडेक्स शामिल है।

  • विधायी निकायों का मूल्यांकन व तुलनात्मक आकलन किया जाएगा: ओम बिरला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 19 जनवरी को शुरू हुए 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का आज समापन हुआ। सम्मेलन के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि तीन दिन के इस सम्मेलन में देश के 24 राज्यों से कुल 36 सदस्य शामिल हुए, जिनके साथ तीन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई। पहला विषय था पारदर्शी, कुशल और जनकेन्द्रित विधायी प्रक्रियाओं के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग। दूसरा कार्यकुशलता बढ़ाने और लोकतांत्रिक शासन को मजबूत करने के लिए विधायी संस्थाओं में सदस्यों में क्षमता निर्माण और तीसरा सबसे आवश्यक, जनता के प्रति सदस्यों की जवाबदेही। इन तीनों विषयों पर चर्चा के बाद 6 संकल्प लिए गए।

पहला संकल्प: सभी राज्यों की विधानसभाएं 2047 तक विकसित भारत लक्ष्य की प्राप्ति करें और इसके लिए सभी विधानमंडलों में अपने राज्य के साथ-साथ देश के विकास पर चर्चा हो।

दूसरा संकल्प: राज्य के विधानमंडलों में न्यूनतम 30 दिनों की बैठकें हों, ताकि हम रचनात्मक व प्रभावी रूप से इन लोकतांत्रिक संस्थाओं को जनता के प्रति उत्तरदायी बना सकें।

तीसरा संकल्प: भारत के विधायी निकायों में बेहतर कार्य संचालन हो, इसके लिए प्रौद्योगिकी व एआई का उपयोग किया जाए ताकि जनता व जन प्रतिनिधियों के बीच सम्पर्क स्थापित हो। साथ ही सबकी सार्थक रूप से सहभागिता सुनिश्चित हो। टेक्नोलॉजी के वर्तमान और आने वाले भविष्य को देखते हुए इसका प्रयोग ज्यादा से ज्यादा किया जाए। लेकिन, एआई के प्रयोग में पूरी सावधानी, जवाबदेही, विश्वसनीयता व नैतिकता भी होनी चाहिए।

चौथा संकल्प: जितनी लोकतांत्रिक संस्थाएं हैं, जैसे पंचायत, नगर निगम, विधानसभा, लोकसभा समेत सभी संस्थाएं, सभी जगह अच्छा संवाद हो, इसके लिए आदर्श नेतृत्व स्थापित हो।

पांचवा संकल्प: विधानमंडलों के अंदर प्रभावी, सार्थक, तथ्यपूर्ण, ज्ञानपूर्वक चर्चाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विधायकों की कैपेसिटी बिल्डिंग के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग हो। सभी विधानमंडलों में रिसर्च विंग हों, पुरानी बहसें डिजिटलाइज्ड की जाएं और लाइब्रेरी डिजिटल हों।

छठा संकल्प: विधायी निकायों के कार्य संचालन का वस्तुनिष्ठ मानकों के आधार पर मूल्यांकन और तुलनात्मक आकलन करने के लिए एक नेशनल लेजिस्लेटिव इंडेक्स बनेगा। गठित की गई कमेटी मानक तय करेगी, जिसके आधार पर विधायी निकायों के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता होगी।

ओम बिरला ने बताया कि सम्मेलन के दौरान यह चर्चा भी हुई कि सभी पीठासीन अधिकारी निष्पक्ष, निर्विवाद हों और सबसे साथ संतुलन बनाकर आगे बढ़ें। 2015 में भी जब उत्तर प्रदेश में यह सम्मेलन हुआ था, तब यहां संकल्प लिया गया था कि प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग हो, पेपरलेस विधानसभाएं हों।

खुशी की बात है कि आज देश की सभी विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं, सभी राज्यों में विधानसभा की कार्यवाही लाइव प्रसारित होती हैं, सभी जगह रिसर्च विंग हैं। कई विधानसभाएं अपनी पुरानी डीबेट डिजिटलाइज्ड कर चुकी हैं और कुछ अभी कर रही हैं। इन कार्यों में लोकसभा की ओर से भी सहयोग दिया जा रहा है। जल्द ही सभी विधानसभाएं एक साथ डिजिटल संसद के प्लेटफॉर्म पर होंगी।

1 फरवरी को आएगा बजट

लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ प्रारम्भ होगा। 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया जाएगा और 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आम बजट प्रस्तुत करेंगी। सत्र 13 फरवरी तक चलेगा और इसके बाद अगला सत्र 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा।

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