देशभर में हर्षोल्लास से मना 77वां गणतंत्र दिवस, कर्तव्य पथ पर दिखी सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक वैभव
77वें गणतंत्र दिवस पर पूरे देश में राष्ट्रभक्ति और उत्साह के साथ समारोह आयोजित हुए। कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य परेड में सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखी। स्वदेशी 105 मिमी तोपों से 21 तोपों की सलामी दी गई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया। समारोह ने विकसित भारत के संकल्प को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती दी।
नई दिल्ली । राष्ट्रीय राजधानी सहित पूरे देश में 77वां गणतंत्र दिवस सोमवार को देशभक्ति, उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर राजधानी के ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, असीम सैन्य शक्ति और सशस्त्र बलों के जांबाज जवानों की लयबद्ध कदमताल का भव्य और अनूठा दृश्य देखने को मिला। परेड स्थल देशभक्ति के नारों, राष्ट्रगीतों और तिरंगे के रंग में रंगा नजर आया।
इस वर्ष की गणतंत्र दिवस परेड ‘स्वतंत्रता के मंत्र – वंदे मातरम्’ और ‘समृद्धि के मंत्र – आत्मनिर्भर भारत’ विषय पर आधारित रही। परेड में भारत की विविध सांस्कृतिक झलकियों के साथ-साथ रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, आधुनिक सैन्य तकनीक और सशस्त्र बलों की शक्ति का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया। सेना, नौसेना और वायु सेना की टुकड़ियों ने अनुशासन और पराक्रम का परिचय देते हुए कदमताल की, जिसे दर्शकों ने तालियों के साथ सराहा।
कर्तव्य पथ पर विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की आकर्षक झांकियों ने देश की सांस्कृतिक विविधता, विरासत और विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इन झांकियों में ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप संस्कृति, स्वच्छ भारत, हरित ऊर्जा और आत्मनिर्भर भारत की झलक देखने को मिली। लोकनृत्य, पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सैन्य प्रदर्शन परेड का प्रमुख आकर्षण रहा। आधुनिक टैंक, मिसाइल प्रणालियां, ड्रोन तकनीक, स्वदेशी रक्षा उपकरण और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया गया, जिससे भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता की दिशा में हो रही प्रगति को दर्शाया गया। वायु सेना के लड़ाकू विमानों की फ्लाई-पास्ट ने आसमान में तिरंगे की छटा बिखेरी और पूरे वातावरण को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।
देश के विभिन्न हिस्सों में भी गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वजारोहण, परेड, सांस्कृतिक कार्यक्रम और देशभक्ति से जुड़े आयोजनों का आयोजन किया गया। राज्यों की राजधानियों, जिला मुख्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी कार्यालयों में तिरंगा फहराया गया और स्वतंत्रता सेनानियों व शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और संविधान के मूल्यों, लोकतंत्र, एकता और अखंडता को मजबूत करने का संकल्प दोहराया। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह ने न केवल भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक समृद्धि को प्रदर्शित किया, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के संकल्प को भी राष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।
गणतंत्र दिवस समारोह में सेना की स्वदेशी तोपों से दी गयी राष्ट्रीय ध्वज को सलामी
कर्तव्य पथ पर सोमवार को 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में सेना की 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) ने राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की पारंपरिक सलामी दी। इसकी एक विशेषता यह रही कि आर्टिलरी बैटरी ने देश में ही बनी 105 मिमी लाइट फील्ड तोपों से फायरिंग कर सलामी दी।
गौरतलब है कि गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी देना एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परंपरा है। यह कर्तव्य पथ के लॉन से राष्ट्रीय ध्वज को दिया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है। इन तोपों से फायरिंग एक साथ होने वाली तीन गतिविधियों का तालमेल होती है जिसमें प्रोटोकॉल अधिकारी द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराना, सेना बैंड द्वारा राष्ट्रगान बजाना और राष्ट्रपति बॉडीगार्ड द्वारा राष्ट्रीय सलामी देना शामिल है।यह सेरेमोनियल बैटरी दिल्ली में तैनात है और इसकी जिम्मेदारी राष्ट्रीय महत्व के अलग-अलग अवसरों पर पारंपरिक फायरिंग कर सलामी देना है।यह बैटरी 1721 फील्ड रेजिमेंट का हिस्सा है जो मुख्यालय 36 आर्टिलरी ब्रिगेड के तहत आती है।
सेरेमोनियल बैटरी ने 21 तोपों की सलामी देने के लिए 105 मिमी लाइट फील्ड गन का इस्तेमाल किया जो स्वदेशी तोप प्रणाली है। पहले यह फायरिंग ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोप से की जाती थी।यह तोप प्रणाली आत्मनिर्भर भारत में देश की रक्षा निर्माण क्षमता को प्रदर्शित करती है। पहले 21 तोपों की सलामी के लिए ब्रिटिश काल की 25 पाउंडर तोपों का इस्तेमाल किया जाता था। 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) सेना की एक विशेष इकाई है जो गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में 21 तोपों की पारंपरिक सलामी देती है। सलामी में ध्वनि और धुएं के लिए विशेष सेरेमोनियल कारतूसों का इस्तेमाल किया जाता है जिससे किसी को नुकसान नहीं होता।
ग्रुप कैप्टन शुक्ला शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जाने वाले पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री और वायु सेना के जांबाज पायलट ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर सोमवार को शांतिकाल के सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र से सम्मानित किया।ग्रुप कैप्टन शुक्ला के साथ गगनयान मिशन के लिए चुने गये वायु सेना के पायलट ग्रुप कैप्टन प्रशांत बालकृष्णन नायर को भी कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। ग्रुप कैप्टन शुक्ला ने पहले भारतीय के रूप में 26 जून को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जाकर इतिहास रचा था।
इससे पहले वायु सेना के विंग कमांडर राकेश शर्मा सोवियत संघ के मिशन में अंतरिक्ष गये थे।ग्रुप कैप्टन शुक्ला को चार सदस्यों वाले भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए भी चुना गया है। उन्होंने 18 दिन की अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा के दौरान विभिन्न शोध कार्यो में योगदान दिया था। उन्हें लड़ाकू विमानों सहित विभिन्न विमानों को उडाने का दो हजार घंटे से भी अधिक का अनुभव है।अशोक चक्र भारत का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है जो सैनिकों और नागरिकों को असाधारण बहादुरी, साहस या सर्वोच्च बलिदान के लिए दिया जाता है।(वार्ता)
कर्तव्य पथ से पहले शहीदों को नमन, परेड के बाद दर्शकों के बीच पहुंचे प्रधानमंत्री
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