Varanasi

श्रीबिहारीलाल दिगंबर जैन मंदिर का 163वां स्थापना दिवस श्रद्धा और भक्ति के साथ सम्पन्न

वाराणसी के मैदागिन स्थित श्रीबिहारीलाल दिगंबर जैन मंदिर में 163वें स्थापना दिवस पर विशेष पूजन, पंचकल्याणक पूजा और भगवान पार्श्वनाथ की भव्य नालकी यात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने भजनों और जयकारों के साथ सहभागिता की। आयोजन ने अहिंसा, सत्य और संयम के जैन मूल्यों का संदेश दिया।

वाराणसी। श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अनुपम संगम रविवार को उस समय देखने को मिला, जब मैदागिन स्थित श्रीबिहारीलाल दिगंबर जैन मंदिर में मंदिर के 163वें स्थापना दिवस का आयोजन अत्यंत भव्य और गरिमामय रूप से किया गया। इस पावन अवसर पर विशेष पूजन-अर्चन के उपरांत भगवान पार्श्वनाथ की भव्य नालकी यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी बने।

मंदिर प्रांगण सुबह से ही भक्ति-भाव से ओतप्रोत रहा। मंदिर के ट्रस्टी भूपेंद्र कुमार जैन ने स्थापना दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज से 163 वर्ष पूर्व इसी पावन तिथि को इस ऐतिहासिक जैन मंदिर की स्थापना हुई थी। उन्होंने कहा कि श्रीबिहारीलाल दिगंबर जैन मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि जैन दर्शन के महान सिद्धांत-अहिंसा, सत्य, अपरिग्रह, संयम और आत्मकल्याण-का जीवंत केंद्र है। यह मंदिर पीढ़ियों से समाज को शांति, सद्भाव, नैतिकता और करुणा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता आ रहा है।

उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि भगवान पार्श्वनाथ के उपदेशों को आत्मसात कर अपने जीवन को पवित्र, संयमित और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण बनाना है। यह दिन आत्मचिंतन, आत्मशुद्धि और सहनशीलता का संकल्प लेने का अवसर भी प्रदान करता है।

कार्यक्रम का शुभारंभ विधिविधान से देव-शास्त्र-गुरु पूजा के साथ हुआ। इसके पश्चात मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की विशेष पूजा तथा पंचकल्याणक पूजा-गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान एवं निर्वाण-श्रद्धा और मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न कराई गई। वातावरण में शांति, पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव हो रहा था।

इसके बाद चांदी की भव्य पालकी में विराजमान भगवान पार्श्वनाथ की नालकी यात्रा निकाली गई। यह यात्रा मैदागिन क्षेत्र की प्रमुख गलियों से होकर गुजरी और पुनः मंदिर परिसर में सम्पन्न हुई। यात्रा के दौरान श्रद्धालु “रोम-रोम से निकले प्रभु नाम तुम्हारा” और “दयालु प्रभु से दया मांगते हैं” जैसे भावपूर्ण भजनों का सामूहिक गान करते हुए चल रहे थे। चारों ओर “भगवान पार्श्वनाथ की जय” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा।

मंदिर परिसर में नालकी यात्रा के समापन पर महिलाओं द्वारा पारंपरिक मंगल बधाइयाँ गाई गईं। इसके पश्चात भगवान पार्श्वनाथ का पंचामृत अभिषेक विधिविधान से सम्पन्न हुआ, जिसके साथ सभी धार्मिक अनुष्ठानों का पूर्णाहुति हुई।

इस अवसर पर अनिल कुमार जैन, नेमचंद्र जैन, विनोद कुमार जैन, प्रदीप चंद्र जैन, पुनीत चंद जैन, सीए अभिषेक जैन, प्रमोद कुमार बागड़ा, आशीष जैन, मंजू जैन, रेनू जैन, साधना जैन, विदू जैन, रजनी जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं एवं युवा उपस्थित रहे।

समूचा आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बन गया, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं के हृदय में भक्ति, करुणा और आत्मकल्याण की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।

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