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पूर्वांचल के उद्योगों को योगी की बड़ी सौगात, भदोही-मीरजापुर-वाराणसी बनेंगे सिल्क क्लस्टर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भदोही, मीरजापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित करने का ऐलान किया है। 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो के शुभारंभ पर उन्होंने वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान जल्द लागू करने की बात कही। मुख्यमंत्री ने कालीन उद्योग के उद्यमियों से सीधा संवाद किया और अलग कालीन नीति की मांग पर संज्ञान लेने का भरोसा दिया। सीईपीसी में महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने और उनके लिए स्थान आरक्षित करने पर भी जोर दिया।

संत रविदास नगर (भदोही) : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश के संत रविदास नगर (भदोही), मीरजापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान भी जल्द लागू होगा। इससे पूर्वांचल के पारंपरिक उद्योगों, हस्तशिल्प, कालीन कारोबार और स्थानीय रोजगार को नई गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि जिस उत्तर प्रदेश में कभी कारीगर और हस्तशिल्पी रोजी-रोजगार के लिए पलायन करने को मजबूर थे, आज उन्हें अपनी ही माटी में अपने हुनर को प्रदर्शित करने और दुनिया के बाजार तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है। प्रदेश में बेहतर कानून-व्यवस्था, आधुनिक तकनीक, डिजाइन, बाजार और कनेक्टिविटी ने कारोबार की तस्वीर बदल दी है।

मुख्यमंत्री रविवार को संत रविदास नगर भदोही स्थित कारपेट एक्सपो मार्ट में 4 से 7 अक्टूबर तक आयोजित 50वें इंडिया कारपेट एक्सपो के स्वर्ण जयंती संस्करण का शुभारंभ करने के बाद आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने फीता काटकर एक्सपो का उद्घाटन किया और विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण कर कालीन निर्माताओं, कारीगरों और हस्तशिल्पियों के उत्पादों का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने निर्यातकों, विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों से सीधा संवाद भी किया तथा उनकी समस्याओं, सुझावों और अपेक्षाओं को गंभीरता से सुना।

एक्सपो में 65 देशों के 450 से अधिक विदेशी खरीदार हिस्सा ले रहे हैं। वहीं 227 से अधिक एग्जीबिटर्स ने अपने उत्पाद प्रदर्शित किए हैं। इनमें ब्रिक्स देशों के 106 खरीदार भी शामिल हैं। आयोजन में अंतरराष्ट्रीय बाजार के खरीदारों, निर्यातकों और कालीन उद्योग से जुड़े कारोबारियों की भागीदारी भदोही के हस्तनिर्मित कालीनों को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

अब पलायन नहीं, अपनी माटी में हुनर दिखा रहे कारीगर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में दंगा, कर्फ्यू, उपद्रव और माफियागिरी के कारण कारोबार का वातावरण बेहद खराब था। कारीगरों को काम नहीं मिलता था और देशी-विदेशी खरीदार भी प्रदेश में आने से कतराते थे। उद्यमियों और हस्तशिल्पियों के सामने रोजगार के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने का संकट था। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं। प्रदेश में सुरक्षा और बेहतर औद्योगिक वातावरण के कारण कारीगरों को अपनी ही माटी में काम करने का अवसर मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि अब कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर किसी व्यापारी या उद्यमी को धमका नहीं सकता और न ही किसी बेटी की सुरक्षा में सेंध लगा सकता है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है और कारोबारियों में सुरक्षा का विश्वास बढ़ा है। सरकार का उद्देश्य है कि स्थानीय प्रतिभा और पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़कर रोजगार के नए अवसर तैयार किए जाएं।

ओडीओपी ने कालीन उद्योग को दिया नया बाजार

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के तहत भदोही के कालीन उद्योग को विशेष पहचान दिलाई। इस योजना के माध्यम से स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को तकनीक, डिजाइन, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने का काम किया गया। इससे पारंपरिक कालीन उद्योग को नई ऊर्जा मिली और स्थानीय उत्पादों की वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान हुई।

उन्होंने कहा कि भदोही के हस्तनिर्मित कालीन को जीआई टैग प्राप्त है, जो इसकी विशिष्ट पहचान और पारंपरिक गुणवत्ता को प्रमाणित करता है। कालीन और टेक्सटाइल तकनीक के क्षेत्र में शिक्षा, डिजाइनिंग और डाइंग के प्रशिक्षण के लिए भदोही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कारपेट टेक्नोलॉजी भी स्थापित है। इससे उद्योग को प्रशिक्षित मानव संसाधन और तकनीकी विशेषज्ञता मिल रही है।

देश के कुल कालीन निर्यात में पूर्वांचल की 60 प्रतिशत हिस्सेदारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि संत रविदास नगर और सिल्क क्लस्टर से लगभग 6,100 करोड़ रुपये का निर्यात हो रहा है। देश के कुल कालीन निर्यात में संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी के सिल्क क्लस्टर की हिस्सेदारी लगभग 60 प्रतिशत है। अकेले संत रविदास नगर में करीब 2,500 एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जिनका वार्षिक कारोबार लगभग 10 हजार करोड़ रुपये है। इस उद्योग से पांच लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है।

उन्होंने कहा कि भदोही में निर्मित लगभग 90 प्रतिशत कालीन अमेरिका, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन सहित दुनिया के विभिन्न देशों में निर्यात किए जाते हैं। भदोही के कालीनों ने अपनी गुणवत्ता, आकर्षक डिजाइन और हस्तनिर्मित विशेषता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अलग पहचान बनाई है। नए संसद भवन में भी भदोही में तैयार कालीन बिछाए गए हैं, जो स्थानीय कारीगरों के हुनर और भारतीय हस्तशिल्प की प्रतिष्ठा का प्रमाण है।

सिल्क क्लस्टर और रीजनल डेवलपमेंट प्लान से पूर्वांचल को मिलेगी नई पहचान

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि संत रविदास नगर, मीरजापुर और वाराणसी को सिल्क क्लस्टर के रूप में विकसित किया जाएगा। इससे तीनों जिलों के पारंपरिक उद्योगों को एक साझा औद्योगिक और व्यापारिक पहचान मिलेगी। वाराणसी-विंध्य रीजनल डेवलपमेंट प्लान जल्द लागू करने की भी तैयारी है। इस योजना के माध्यम से क्षेत्रीय स्तर पर औद्योगिक विकास, कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में कालीन, सिल्क, हस्तशिल्प और टेक्सटाइल उद्योग की व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों को संगठित रूप से विकसित करने से निर्यात में वृद्धि के साथ स्थानीय युवाओं और कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

बेहतर कनेक्टिविटी से छह घंटे में पहुंचेगा भदोही का कालीन नोएडा एयरपोर्ट

मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क, हवाई और जलमार्ग कनेक्टिविटी का सीधा लाभ प्रदेश के उद्योगों और निर्यातकों को मिल रहा है। गंगा एक्सप्रेसवे का विंध्य एक्सप्रेसवे के रूप में विस्तार होने पर संत रविदास नगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक की दूरी लगभग छह घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे एयरपोर्ट की कार्गो सुविधाओं के माध्यम से भदोही के कालीनों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना अधिक आसान होगा।

उन्होंने बताया कि वाराणसी से हल्दिया के बीच इनलैंड वाटरवे की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा वाराणसी के लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी कार्गो सुविधा है। बेहतर परिवहन व्यवस्था से निर्यातकों को समय और लागत दोनों के स्तर पर लाभ मिलेगा।

यूपी को मिले 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव, कारखानों की संख्या 35 हजार के पार

मुख्यमंत्री ने प्रदेश की औद्योगिक प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश को लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें से 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है, जबकि साढ़े सात लाख करोड़ रुपये के उद्योग बहुत जल्द धरातल पर उतरने जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में लगभग 14 हजार कारखाने थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 35 हजार से अधिक हो गई है। प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां हैं और प्रत्येक इकाई को पांच लाख रुपये का सुरक्षा बीमा कवर दिया जा रहा है। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से निवेशकों और उद्यमियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में बनने वाले 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का निर्माण उत्तर प्रदेश में हो रहा है। डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड पर काम चल रहा है तथा प्रदेश में 12 निजी औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं। लखनऊ और हरदोई के बीच एक हजार एकड़ में पीएम मित्र टेक्सटाइल पार्क भी विकसित किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एंप्लॉयमेंट एंड स्किलिंग जोन स्थापित करने की तैयारी है। इन केंद्रों के माध्यम से उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं को प्रशिक्षित कर कुशल मानव संसाधन तैयार किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा उत्तर प्रदेश में है।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में पहुंचे छह लाख से अधिक विजिटर

मुख्यमंत्री ने ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का उल्लेख करते हुए कहा कि 25 से 29 सितंबर तक इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित इस आयोजन में छह लाख से अधिक विजिटर पहुंचे। यहां डेढ़ लाख से अधिक बीटूबी बैठकें हुईं। इसमें 2,400 से अधिक एग्जीबिटर्स और 650 से अधिक विदेशी खरीदारों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, उत्पादों और निर्यात संभावनाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित किया।

उद्यमियों ने रखी कालीन उद्योग के लिए अलग नीति बनाने की मांग

इंडिया कारपेट एक्सपो के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कालीन उद्योग के निर्यातकों, विक्रेताओं और प्रमुख उद्यमियों के साथ सीधा संवाद किया। इस दौरान कारोबारियों ने उद्योग से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं, सरकारी नीतियों, निर्यात सुविधाओं और भविष्य की संभावनाओं पर अपने सुझाव रखे।

मीरजापुर के कालीन कारोबारी अनिल कुमार ने बेहतर कनेक्टिविटी के लिए प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने प्राचीन शहर मीरजापुर और वहां के कालीन व्यवसाय से जुड़े विषयों को मुख्यमंत्री के सामने रखा। मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनते हुए संबंधित मुद्दों पर संज्ञान लेने का आश्वासन दिया।

इम्तियाज अहमद ने कहा कि ओडीओपी योजना से कालीन उद्योग से जुड़े उद्यमियों को काफी लाभ मिला है। यदि इसी तर्ज पर कालीन उद्योग के लिए अलग नीति बनाई जाए तो कारोबार को और प्रोत्साहन मिलेगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें तीसरी बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है।

हस्तनिर्मित कालीन के लिए अलग नीतिगत व्यवस्था का सुझाव

उद्यमी पीयूष कुमार बरनवाल ने कहा कि हस्तनिर्मित कालीन के क्षेत्र में भारत दुनिया में अग्रणी है। मशीन से तैयार उत्पादों और हस्तनिर्मित कालीन की उत्पादन प्रक्रिया में काफी अंतर होता है। हस्तनिर्मित कालीन तैयार करने में अधिक समय और श्रम लगता है। इसलिए इसे सामान्य मैन्युफैक्चरिंग श्रेणी से थोड़ा अलग रखते हुए इसकी विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप नीति बनाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने इस सुझाव को अच्छा बताते हुए कहा कि उन बुनकरों और कारीगरों का अभिनंदन किया जाना चाहिए, जिन्होंने अपने पूर्वजों से मिली धरोहर को आज तक जीवित रखा है। उन्होंने भरोसा दिया कि सरकार इस सुझाव पर जरूर संज्ञान लेगी।

सीईपीसी में महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर

संवाद के दौरान महिला उद्यमी आदर्श पूर्णिमा ने कालीन उद्योग में महिलाओं की भूमिका और कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) में उनकी भागीदारी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि पहले इंडिया कारपेट एक्सपो का आयोजन दिल्ली में होता था। उस समय किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि एक दिन इतना बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन भदोही में होगा। आज अपने ही जनपद में विश्वस्तरीय एक्सपो का आयोजन हो रहा है और मुख्यमंत्री लगातार दूसरी बार कालीन उद्योग का उत्साह बढ़ाने पहुंचे हैं।

उन्होंने कहा कि कालीन उद्योग में बड़ी संख्या में महिलाएं उद्यमी और वर्कर के रूप में काम कर रही हैं, लेकिन सीईपीसी के मौजूदा ढांचे में महिलाओं को अपेक्षित भागीदारी नहीं मिल पाई है। महिलाओं के लिए परिषद में स्थान आरक्षित करने जैसी व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे वे निर्णय प्रक्रिया में शामिल हो सकें और उनका मनोबल मजबूत हो।

इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आए हैं। अब नारी केवल सरकार या सरकारी भरोसे पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि अपने लिए कानून बनाने की भी भूमिका निभाएगी। उन्होंने सीईपीसी से महिला उद्यमियों की भागीदारी सुनिश्चित करने तथा उनके लिए स्थान आरक्षित करने की दिशा में कदम उठाने को कहा। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का भरोसा भी दिया।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में सांसद डॉ. विनोद कुमार बिंद, जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, औराई विधायक दीनानाथ भास्कर, ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे, कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (सीईपीसी) के अध्यक्ष कैप्टन मुकेश गोम्बर, उपाध्यक्ष असलम महबूब, एमएसएमई विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील तथा इंडिया एक्सपो मार्ट लिमिटेड के चेयरमैन डॉ. राकेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में कालीन उद्योग से जुड़े उद्यमी, निर्यातक, कारीगर, हस्तशिल्पी और देश-विदेश से आए खरीदार उपस्थित रहे।

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