Uttar Pradesh

बिल्थरारोड तहसील में कमजोर प्रशासन को महिलाओं ने दिखाई एकता की ताकत

एसडीएम पर फेंकी चूड़ियां, कार्यालय से न्यायालय तक रहा महिलाओं का कब्जा - पिछले रास्ते से निकल एसडीएम ने बंद कमरे में स्वयं को किया सुरक्षित

बलियाः बागी बलिया के आखिरी छोर पर स्थित बिल्थरारोड तहसील में गुरुवार को कमजोर प्रशासन को महिलाओं ने एकजुटता की ताकत का एहसास कराया। अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए महिलाओं ने वादाखिलाफी करने वाले अधिकारी की जमकर खबर ली। एसडीएम संतलाल पर चूड़ियां फेंकी और उनके कार्यालय से न्यायालय तक कब्जाकर जमकर नारेबाजी की। जिससे अपनी फजीहत होता देख एसडीएम संतलाल ने होमगार्ड की मदद से पिछले दरवाजे से तहसील के अंदर ही एक कमरे में स्वयं को बंदकर सुरक्षित किया। बावजूद महिलाओं ने एसडीएम का पीछा नहीं छोड़ा और एसडीएम न्यायालय से एसडीएम को परिसर से होते हुए प्रथम तल स्थित दूसरे छोर के कमरे तक पीछा किया।

इस दौरान एसडीएम साहब पूरी तरह से विवश दिखे और किसी तरह महिलाओं से पीछा छुड़ाने की जुगत में लगे रहे। मालूम हो कि अपने आठ सूत्रीय मांगों को लेकर पूर्व मंत्री छट्ठू राम पहले से ही आमरण अनशन पर है। बुधवार की देर शाम पुलिस ने पूर्व मंत्री समेत 13 नामजद व 20 अज्ञात के खिलाफ सीआरसीपी की धारा 144 उलंघन एवं बिना अनुमति टेंट लगा आंदोलन करने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया। जिससे आंदोलनकारी और उग्र हो गए। गुरुवार को गोंड समाज की महिलाएं अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाणपत्र जारी करने समेत अन्य मांग को लेकर तहसील में पूर्व मंत्री छट्ठू राम द्वारा जारी आंदोलन के समर्थन में नारेबाजी करती रही।

पहले घंटो तक पारंपरिक गोंड़ऊ नृत्व का प्रदर्शन किया और दोपहर 12 बजे के करीब एसडीएम को चूड़ी पहनाने की जिद संग महिलाएं उनके कार्यालय पहुंच गई। जहां तैनात होमगार्ड ने उन्हें रोकने का प्रयास किया किंतु बड़ी संख्या में महिलाओं ने जबरन पहले एसडीएम के कार्यालय में पहुंची और वहां चुड़ियां लहराया। यहां अधिकारी को न पाकर महिलाएं एसडीएम कोर्ट में सुनवाई कर रहे एसडीएम के समक्ष पहुंच गई और जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कुछ महिलाओं ने होमगार्ड संग धक्कामुक्की करते हुए न्यायालय में बैठे एसडीएम संतलाल पर चूड़ियां फेंका।

हंगामे के दौरान एसडीएम कार्यालय से लेकर एसडीएम न्यायालय तक करीब एक घंटे तक महिलाओं का कब्जा रहा और सभी ने जमकर नारेबाजी की। जहां से कुछ अधिवक्ताओं व होमगार्ड की मदद से एसडीएम संतलाल किसी तरह महिलाओं के बीच से बचकर बाहर निकले और तहसील परिसर के पहले तल पर एक कमरे में कैद हो गए। जिसके बाद अन्य थानों की पुलिस भी तहसील पहुंची किंतु करीब दो घंटे तक महिलाएं टस से मस न हुई। जिससे तहसील परिसर में हंगामा की स्थिति बनी रही।

हंगामे की सूचना पर उभांव थाना के प्रभारी इंचार्ज सियाराम यादव, एसआई उमाशंकर यादव, एसआई विनोद यादव, एसआई रणविजय सिंह, सीयर चैकी इंचार्ज राजकुमार सिंह थोड़ी देर बाद महिला पुलिस व हमराहियों संग बड़ी संख्या में पुलिस बल पर पहुंच गया। लेकिन महिलाएं तहसील परिसर में ही एसडीएम को घेरने व चूड़ी पहनाने की जिद पर अड़ी रही। इस दौरान महिला पुलिस व महिलाओं संग नोंकझोंक भी हुआ और पुलिस को जमकर पसीना बहाना पड़ा। पूरे हंगामे के दौरान बिना तैयारी पुलिस प्रशासन पूरी तरह से विवश दिखी।

करीब दो घंटे बाद महिलाओं को पुलिस किसी तरह तहसील परिसर से बाहर तो कर सकी किंतु महिलाएं तहसील के गेट के मुख्य बरामदे में ही धरने पर बैठी रही। जबकि एसडीएम तहसील परिसर स्थित एक कमरे में कैद रहे। बाद में नगरा एसओ यादवेंद्र पांडेय, नगरा एसआई संतोष राय, भीमपुरा इंस्पेक्टर शिवमिलन के साथ सीओ रसड़ा केपी सिंह भी पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने में लगे रहे। हालांकि इसके पहले अपने मांगों के समर्थन में तहसील परिसर में सुबह से ही डमरु, झाल संग महिलाओं ने पारंपरिक गोडऊ नाच का भी प्रदर्शन किया। जो लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहा।

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