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हम हनुमान भक्त हैं कायर नही, मुंह तोड़ जवाब देना जानते है : पं धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री

कवर्धा,छत्तीसगढ़। कबीरधाम में आयोजित हनुमन्त कथा के तीसरे दिन मंगलवार को अपार जनसमूह ने बागेश्वर धाम पीठाधीश पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के श्रीमुख से अद्भुत हनुमन्त कथा का श्रवण कर धर्मलाभ लिया। धर्म राजधानी कबीरधाम में इन दिनों भक्ति रस की अविरल धारा बह रही है। बताते चले कि तीन दिवसीय हनुमत कथा के द्वितीय दिवस सोमवार को दिव्य दरबार लगाया गया था। लाखों की संख्या में छत्तीसगढ़ समेत पूरे देशभर के विभिन्न स्थानों श्रद्धालु पहुंचे। दिव्य दरबार में हर बार की तरह पंडित शास्त्री ने सौभाग्यशाली भक्तों की समस्याओं का समाधान बताया।

दिव्य दरबार में नकारात्मक शक्तियों से झुमते लोग के कान में “भूत-पिशाच निकट नहीं आवे। महावीर जब नाम सुनावे” गूंजते ही सब नार्मल हुए। उल्लेखनीय है कि प्रथम दिवस बागेश्वर सरकार पंडित शास्त्री के नगर प्रवेश के दौरान नगर सीमा में अचानक बंदरो का झुंड सड़क पर आ गया था। जो चर्चा का विषय बना हुआ है की बागेश्वर बालाजी के स्वागत में उनकी सेना पहले ही पहुंच गई थी।तृतीय दिवस के हनुमन्त कथा पर बागेश्वर सरकार के समक्ष धर्मांतरण के पश्चात सनातन में वापसी का मन बना चुके परिवारों का घर वापसी वापसी हुई जिसमें 4 ईसाई धर्म व 1 मुस्लिम धर्म अपना चुकी महिलाओं ने घर वापसी की है।

राजी है हम उसी में जिसमे तेरी रजा है…
पं धीरेन्द्र शास्त्री कहते है कि हम जब अपने से बड़े को देखते है तो दुखी हो जाते है छोटे को देखते है तो सुखी होते है इसलिए जो प्राप्त है वही पर्याप्त है कामनाओ की पूर्ति कभी सम्भव नही । भगवान ने जितना दिया है उसी में संतुष्ट रहना चहिये।जनता जिसको चुनती है वो विधानसभा लोकसभा मे बैठते है जिनको भगवान चुनते है वो कथा में बैठते है । अक्सर इंसान नेता और पत्नी देख समझ कर चुनते है फिर भी दोनो बाद में किसी की नही सुनते ।

तुलसीदास जी के जीवन चरित्र की गाथा सुनाते हुए धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी कहते है कि जंहा सरकार की सड़क बिजली नही पहुंची वंहा भी तुलसीदास जी की चौपाई पहुंच गई है । ऐसी है राम कथा व हनुमान कथा जो मोक्ष प्रदान करती है ।जिस तरह अधिकारी या नेता से मिलना हो तो दरबान से मिलना जरूरी है उसी तरह राम से मिलना है तो उनके सेवक हनुमान से मिलना जरूरी है । इसी तरह दुर्गम काज को सुगम हनुमान करते है । जिसके घर के बाहर लगेगा हनुमान जी का झण्डा (पताका) उसका बजेगा डंका । पताका के फहराने की तरह यश और कीर्ति फैलती है ।

कवर्धा के झण्डा कांड को याद करते हुए कहते है कि जो सनातन धर्म के झंडे को देख के जलते है उन्हें जलाना चाहिए । विधर्मियो को चेतावनी देते हुए कहते है कि ऊ के लोगो किसी भी कट्टर सनातनी के खिलाफ अब आंख उठाकर देखे या दुबारा साधराम जैसी घटना की तो हम तुमारी ठठरी बांध देंगे पाकिस्तान भेज देंगे । धर्म विरोधियो को चुनौती देते हुए कहा कि सुन लो धर्म विरोधियों अगर हुआ मेरे धर्म पर घात करोगे तो मैं प्रतिघात करूंगा हिन्दू हुँ तो हिंदुत्व पर बात करूंगा औऱ हिन्दूओ का आह्वान करते हुए कहते है कि तुम आज नही जागे तो तुम्हारी स्थिति कश्मीरी पंडित की तरह हो जाएगी और तुम्हे कबीरधाम को छोड़ना पड़ेगा क्या कवर्धा छोड़ना चाहोगे ।

सभी सनातनियो को कहते है कि जिनके राम प्रिय है उनका साथ देना चाहिए निर्बल का साथ देना चाहिए । हम हनुमान के भक्त है कायर नही है मुंह तोड़ जवाब देंना जानते है क्योंकि हनुमान जी सन्तो के रक्षक राक्षसों के भक्षक है जिनका कृपापूर्ण स्वभाव है ।छत्तीसगढ़ को शबरी का प्राप्त है राम वन गमन पथ का गौरव मिला है । भगवान राम भाँचा के रूप में पूजे जाते है । गांव गांव नवधा रामायण होती है सरकार से मांग करते है कि सरकार को नावधारामयण दिवस घोषित करना चाहिए । इस दिन घर घर मंदिर मंदिर रामायण का पाठ होना चाहिए ।(वीएनएस)

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