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उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन बोले -मेहनत और आत्मअनुशासन ही सफलता और आध्यात्मिक उत्थान का मार्ग

भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने मैसूर के जेएसएस उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान अकादमी के दीक्षांत समारोह में छात्रों से कहा कि “निरंतर मेहनत और आत्मअनुशासन सफलता की सच्ची कुंजी हैं।” उन्होंने स्वामी विवेकानंद के संदेश “उठो, जागो और लक्ष्य प्राप्ति तक मत रुको” को जीवन का मार्गदर्शक बनाने की प्रेरणा दी। उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया के विवेकपूर्ण उपयोग, माता-पिता के सम्मान और ज्ञान को असली संपत्ति बताया।श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की शताब्दी यात्रा समारोह में भाग लेते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारतीय आध्यात्मिकता की ज्योति को पुनः प्रज्ज्वलित करता है। उन्होंने जैन दर्शन की अहिंसा, अपरिग्रह और करुणा की भावना को आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक बताया और युवाओं से विकसित भारत 2047 के निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।

  • मैसूर में दीक्षांत समारोह और श्रवणबेलगोला में शताब्दी उत्सव के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने युवाओं को लक्ष्य, ज्ञान और संयम का संदेश दिया।

उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज मैसूर के श्री शिवरात्रिश्वर नगर में आयोजित जेएसएस उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान अकादमी (जेएसएस एएचईआर) के 16वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उपराष्ट्रपति ने अपने दीक्षांत भाषण में निरंतर मेहनत को सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने हर छात्र से आग्रह किया कि वे अपनी विशेष प्रतिभा को पहचानें और अपनी क्षमता के अनुसार व्यक्तिगत लक्ष्य तय करें। स्वामी विवेकानंद के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने छात्रों को “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” के लिए प्रेरित करते हुए चुनौतियों का सामना करने में दृढ़ता और लचीलेपन पर ज़ोर दिया।

कर्नाटक की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कन्नड़ को शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता मिलने पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी 2020) की सराहना की, जिसमें अंतःविषयक शिक्षा और लचीलेपन पर ज़ोर दिया गया है, जो मेहनती छात्रों को अनुकूलन और उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाता है। उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया का समझदारी से उपयोग करने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं को सलाह दी कि वे आत्मअनुशासन रखें और ऑनलाइन गतिविधियों तथा वास्तविक जिंदगी की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाएं। उन्होंने यह भी कहा कि अपने माता-पिता का सम्मान करें और लोगों से अच्छी बातों को अपनाएं, न कि नकारात्मक चीज़ों पर ध्यान दें।

उपराष्ट्रपति ने संबोधन के आखिर में प्राचीन ज्ञान का उल्लेख किया कि “ज्ञान ही असली संपत्ति है।” उन्होंने छात्रों से कहा कि वे ज्ञान की यह रोशनी आगे बढ़ाएं, आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करें, और विनम्रता के साथ लेकिन मजबूत संकल्प के साथ राष्ट्रनिर्माण में योगदान दें, ताकि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। दीक्षांत समारोह के दौरान कुल 2,925 छात्रों को डिग्री, डिप्लोमा और फेलोशिप प्रदान की गईं। विभिन्न शैक्षणिक विषयों के सोलह स्वर्ण पदक विजेताओं को भी उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। समारोह में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावर चंद गहलोत, जेएसएस एएचईआर के कुलाधिपति परम पावन जगद्गुरु श्री शिवरात्रि देशिकेंद्र महास्वामीजी, सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री शिवराज वी. पाटिल और अन्य अतिथियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

श्रवणबेलगोला ने शताब्दी समारोहों के माध्यम से आध्यात्मिकता की ज्योति को पुनर्प्रज्ज्वलित किया : उपराष्ट्रपति

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने कर्नाटक के श्रवणबेलगोला में आज परमपूज्य आचार्य श्री 108 शांतिसागर महाराज जी की यात्रा के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। आचार्य जी ने 100 साल पहले 1925 में महामस्तकाभिषेक समारोह के लिए इस पवित्र स्थल की यात्रा की थी। उपराष्ट्रपति ने श्रवणबेलगोला में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की प्रतिमा का अनावरण भी किया। सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने दिगंबर परंपरा को पुनर्जीवित करने में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की महत्वपूर्ण भूमिका की प्रशंसा की और उनके जीवन को अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद के जैन सिद्धांतों का मूर्त रूप बताया, जो आंतरिक शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि भौतिकतावादी और बेचैनी से भरे इस युग में आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी का जीवन हमें याद दिलाता है कि सच्ची स्वच्छंदता संपत्ति इकठ्ठा करने में नहीं, बल्कि आत्म-संयम में है, भोग में नहीं, बल्कि आंतरिक शांति में निहित है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इस शताब्दी समारोह के माध्यम से, श्रवणबेलगोला स्थित दिगंबर जैन मठ ने न केवल एक महान संत को सम्मानित किया है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक ज्योति भी प्रज्वलित की है। उन्होंने कहा कि नवअनावृत प्रतिमा यहाँ आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सादगी, पवित्रता और करुणा की शक्ति का स्मरण कराने वाले प्रतीक के रूप में स्थापित होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की कि आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी का संदेश सभी भारतीयों को धार्मिकता, सहिष्णुता और शांति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।

दो हजार वर्षों से अधिक समय तक जैन आस्था के केंद्र के रूप में श्रवणबेलगोला के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने भगवान बाहुबली की 57 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा के बारे में बताया जिसे गंग वंश के मंत्री चामुंडराय ने बनवाया था। उपराष्ट्रपति ने इसे आध्यात्मिक भक्ति और कलात्मक उत्कृष्टता का एक शाश्वत प्रमाण बताया। श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने बताया की सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य ने जैन संत आचार्य भद्रबाहु के मार्गदर्शन में श्रवणबेलगोला में संन्यास लिया। उन्होंने कहा कि महान सम्राट का यह कृत्य इस बात का प्रतीक था कि सभी सांसारिक उपलब्धियाँ प्राप्त करने के बाद भी, व्यक्ति को अंततः आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति अवश्य करनी चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने भारत सरकार द्वारा प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने और जैन पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण हेतु ज्ञानभारतम मिशन की शुरुआत करने की सराहना की। उन्होंने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण हेतु इन प्रयासों की प्रशंसा भी की। उन्होंने तमिलनाडु और जैन धर्म के बीच मज़बूत ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया और संगम काल और संगमोत्तर काल के दौरान तमिल साहित्य और संस्कृति में जैन धर्म के गहन योगदान का उल्लेख किया जो शिलप्पादिकारम जैसी शास्त्रीय रचनाओं में प्रतिबिंबित होता है। उपराष्ट्रपति ने जैन मठ के वर्तमान प्रमुख श्री अभिनव चारुकीर्ति भट्टारक स्वामीजी की भी सराहना की, जिन्होंने प्राकृत अनुसंधान संस्थान जैसे संस्थानों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा देकर आचार्य श्री शांतिसागर महाराज जी की विरासत को आगे बढ़ाया।

श्रवणबेलगोला भारत की आध्यात्मिक विरासत का एक चमकता हुआ रत्न बना रहेगा इस विश्वास को व्यक्त करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आने वाली पीढ़ियों को धार्मिकता, सहिष्णुता और शांति के सिद्धांतों को अपनाने के लिए प्रेरित करता रहेगा। इस कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल श्री थावर चंद गहलोत, केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी, कर्नाटक के राजस्व मंत्री श्री कृष्ण बायरे गौड़ा, कर्नाटक के योजना एवं सांख्यिकी मंत्री श्री डी. सुधाकर, हासन से सांसद श्री श्रेयस एम. पटेल, श्री क्षेत्र श्रवणबेलगोला दिगंबर जैन महासंस्थान मठ के पूज्य साधुगण और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे।

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