
नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने सहारा समूह की कई कंपनियों के खिलाफ जांच के लिए केंद्र सरकार की ओर से पारित दो आदेशों के संचालन, निष्पादन और कार्यान्वयन पर रोक लगाने के दिल्ली उच्च न्यायालय आदेश को गुरुवार को रद्द कर दिया।न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की अवकाशकालीन पीठ ने संबंधित पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उच्च न्यायालय के फैसले पर रोक लगाने संबंधी आदेश पारित करते हुए कहा कि प्रारंभिक चरण में जांच को रोकना तर्कसंगत नहीं होगा। उच्च न्यायालय द्वारा जांच पर रोक लगाने का आदेश उचित नहीं था।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सहारा समूह की सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कोऑपरेटिव निगम लिमिटेड एवं अन्य कंपनियों के खिलाफ जांच करने के संबंध में केंद्र सरकार की ओर से पारित दो आदेशों पर 13 दिसंबर 2021 को रोक लगा दी थी।उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार द्वारा पारित 31 अक्टूबर 2018 और 27 अक्टूबर 2020 के जांच आदेशों के संचालन, कार्यान्वयन और निष्पादन पर रोक लगा लगा दिया था। उच्च अदालत ने साथ ही (सरकार की ओर से पारित आदेशों के बाद शुरू की गई) सभी कार्रवाइयों और कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस “अनावश्यक और असाधारण” आदेश को रद्द कर दिया, जिसके द्वारा उसने सहारा समूह से संबंधित कंपनियों की जांच के अलावा इसके प्रमुख सुब्रत रॉय और उनकी पत्नी के खिलाफ जारी लुक आउट सर्कुलर पर रोक लगा दी गई थी थी।सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) ने ‘विशेष अनुमति’ याचिका के जरिए उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी थी। उच्चतम न्यायालय ने ‘विशेष अनुमति’ याचिका स्वीकार करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश पर लगा दीहै।
शीर्ष अदालत की पीठ ने ‘विशेष अनुमति’ याचिका स्वीकार करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय से इस मामले को गर्मी की छुट्टियों के बाद दो महीने के अंदर निपटारा करने की कोशिश करने का अनुरोध करते हुए कहा कि उसके द्वारा रोक संबंधी इस आदेश का अन्य मामलों कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।(वार्ता)



