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चीनी सब्सिडी योजना दो वर्षों के लिए बढाई गयी

कैबिनेट ने मई 2009 - नवंबर 2015 की अवधि के लिए उर्वरक (यूरिया) के लिए घरेलू गैस की आपूर्ति के लिए विपणन मार्जिन को अनुमति दी

नयी दिल्ली : सरकार ने सार्वजनिक वितरण योजना (पीडीएस) के माध्यम से वितरित अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) परिवारों के लिए चीनी सब्सिडी की योजना को दो और वर्षों यानी 31 मार्च 2026 तक बढ़ाने को अनुमति दे दी है।प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में गुरूवार को यहां हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी।यह योजना निर्धनतम लोगों तक चीनी की पहुंच सुगम बनाती है और उनके आहार में ऊर्जा को शामिल करती है ताकि उनकी सेहत बेहतर हो सके।

इस योजना के तहत केंद्र सरकार प्रतिभागी राज्यों के एएवाई परिवारों को चीनी पर प्रति माह प्रति किलोग्राम 18.50 रुपये की सब्सिडी देती है। इससे 15 वें वित्त आयोग (2020-21 से 2025-26) की अवधि के दौरान 1850 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ मिलने की उम्मीद है। इस योजना से देश के लगभग 1.89 करोड़ एएवाई परिवारों को लाभ मिलने की संभावना है।सरकार पहले से ही प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएम-जीकेएवाई) के तहत मुफ्त राशन प्रदान कर रही है।

पीएम-जीकेएवाई के अलावा भी नागरिकों की थाली में पर्याप्त भोजन सुनिश्चित करने के उपाय के तौर पर किफायती और उचित कीमतों पर ‘भारत आटा’, ‘भारत दाल’ और टमाटर और प्याज की बिक्री की जाती है। अब तक लगभग 3 लाख टन भारत दाल (चना दाल) और लगभग 2.4 लाख टन भारत आटा पहले ही बेचा जा चुका है, जिससे आम उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है। इस प्रकार, सब्सिडी वाली दाल, आटा और चीनी की उपलब्धता ने भारत के आम नागरिक के लिए भोजन की पूर्ति कर दी है, जिससे ‘सबको भोजन, सबको पोषण’ की मोदी की गारंटी पूरी हो गई है।

इस अनुमति के साथ, सरकार पीडीएस के माध्यम से एएवाई परिवारों को प्रति माह प्रति परिवार एक किलोग्राम की दर से चीनी वितरण के लिए प्रतिभागी राज्यों को सब्सिडी देना जारी रखेगी। चीनी की खरीद और वितरण की जिम्मेदारी राज्यों की है। (वार्ता)

कैबिनेट ने मई 2009 – नवंबर 2015 की अवधि के लिए उर्वरक (यूरिया) के लिए घरेलू गैस की आपूर्ति के लिए विपणन मार्जिन को अनुमति दी

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 1 मई 2009 से 17 नवंबर 2015 की अवधि में उर्वरक (यूरिया) इकाइयों को घरेलू गैस की आपूर्ति पर विपणन मार्जिन के निर्धारण को अनुमति दे दी है।यह अनुमति एक संरचनात्मक सुधार है। विपणन मार्जिन, गैस विपणन कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं से गैस की लागत के अतिरिक्‍त वसूला जाता है। ऐसा गैस के विपणन से जुड़े अतिरिक्त जोखिम और लागत को वहन करने के लिए किया जाता है। सरकार ने पहले 2015 में यूरिया और एलपीजी उत्पादकों को घरेलू गैस की आपूर्ति पर विपणन मार्जिन निर्धारित किया था।

यह अनुमोदन विभिन्न उर्वरक (यूरिया) इकाइयों को 01.05.2009 से 17.11.2015 की अवधि के दौरान खरीदी गई घरेलू गैस पर उनके द्वारा भुगतान किए गए विपणन मार्जिन के घटक के लिए अतिरिक्त पूंजी प्रदान करेगा, जो 18.11.2015 से पहले से ही भुगतान की जा रही दरों के आधारित होगा। सरकार के आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप, इस अनुमति से निर्माताओं को निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। बढ़े हुए निवेश से उर्वरकों में आत्मनिर्भरता आएगी और गैस अवसंरचना के क्षेत्र में भविष्य के निवेश के लिए निश्चितता आएगी।

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