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गंगा यात्रियों के उत्साह में ऋतुराज बसन्त का उल्लास भी

फरुर्खाबाद में गंगा पूजन शुरू यात्रा बिठूर में गंगा पूजन के साथ समाप्त

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गिरीश पांडेय :

लखनऊ, जनवरी । गंगा यात्रा का चौथा दिन। तीन दिनों तक गंगा यात्रियों और माँ गंगा के भक्तों की परीक्षा लेने के बाद गुरुवार का मौसम खुशगवार था। इसमें ऋतुराज बसन्त का असर साफ दिख रहा था। इसमें रस भी था और ऊष्मा भी। मानों बसंत ने पिछले दिनों की बारिश से रस और आज के सूरज से ऊष्मा चुरा ली हो। बारिश से धुलकर खेतों और पेड़-पौधों की हरियाली और चटक हो गई थी। आसमान पर बादल थे,पर रुई की तरह बिखरे-बिखरे। ये प्यारे लग रहे थे पिछले दिनों की तरह डरावने नहीं। मौसम के इस बदलाव से गंगा यात्री भी खुश थे और इसमें शामिल मां गंगा के भक्त भी। प्रकृति के इस उल्लास में गंगा यात्रियों और उनके स्वागत में आए गंगा भक्तों के शामिल होने से पूरा माहौल जलसे में तब्दील हो गया।

यात्रा के पूरे रास्ते में जलसे का माहौल

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फरुर्खाबाद से लेकर कन्नौज, बिल्हौर और बिठूर के करीब 125 की यात्रा में यही माहौल था। सड़क के किनारे लाइन से खड़े लोग। गंगा रथ पर सवार लोगों के स्वागत में। बिना समय की परवाह किए। देर रात तक।आखिर सदियों से सबको तारने वाली गंगा को तारने के बड़े संकल्प से खुद को जोड़ना जो था।

फरुर्खाबाद के गंगा घाट पर गंगा पूजन से शुरू यह यात्रा बिल्हौर में गंगा पूजन के साथ समाप्त हुई। यात्रा में केंद्रीय सरकार के मंत्री बाबुल सुप्रीयो, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना,सतीश महाना, ब्रजेश पाठक, सुरेश राणा, विजय कश्यप-शामिल थे। जगह-जगह आयोजित जनसभाओं में इन लोगों ने कहा कि गंगा आस्था के साथ अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और जैव विविधता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। यूं तो यह पांच राज्यों से गुजरती है, पर बिजनौर से होकर बलिया तक गुजरने के दौरान इसका सर्वाधिक हिस्सा उ.प्र. में ही पड़ता है। यह मां गंगा की अपने प्रदेश पर खास कृपा है। लिहाजा गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को साकार करने का सर्वाधिक फर्ज भी हमारा ही है। जरूरत इसेजनांदोलन बना की है। ऐसा हुआ तो देश और दुनिया के लिए गंगा सफाई का यह अभियान नजीर बन जाएगा। साथ ही प्रदेश के नाम से एक और रिकॉर्ड भी बन जाएगा।

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