यूपी में भारी बारिश से हाहाकार: 56 जिलों में अत्यधिक वर्षा, 1021 मकान क्षतिग्रस्त; राहत अभियान तेज
उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और प्राकृतिक आपदा के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। अयोध्या और बस्ती में आपदा प्रभावित परिवारों को घटना के 24 घंटे के भीतर चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई। 25 से 27 सितंबर के बीच प्रदेश में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई और 56 जिलों में अत्यधिक वर्षा हुई। 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना है। प्रशासन फसल सर्वे, रेस्क्यू, राहत वितरण और बिजली आपूर्ति बहाली में जुटा है।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश, आंधी-तूफान और प्राकृतिक आपदा के बीच योगी सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रहा है और आपदा से प्रभावित परिवारों तक तत्काल राहत पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है। अयोध्या और बस्ती में आपदा से प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे जनपद के प्रभारी मंत्री एवं कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा दैवीय आपदा राहत कोष से घटना के 24 घंटे के भीतर चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता के चेक सौंपे।
सरकार की ओर से राहत अभियान को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा गया है। अतिवृष्टि से क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन, फसल क्षति का सर्वे, जलभराव वाले क्षेत्रों में रेस्क्यू, राहत सामग्री का वितरण और बारिश से प्रभावित बिजली आपूर्ति को सामान्य करने के लिए विभागीय टीमें लगातार मैदान में काम कर रही हैं। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित लोगों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ तत्काल समाधान किया जाए और राहत कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए।
अयोध्या में मृतकों के परिजनों को चार-चार लाख की सहायता
अयोध्या में अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण चार लोगों की असामयिक मृत्यु हुई। इनमें सोहावल तहसील के शिवदासपुर, शुक्ला का पुरवा निवासी 18 वर्षीय आकाश वर्मा, मिल्कीपुर तहसील निवासी 12 वर्षीय आर्यन, रुदौली तहसील निवासी 76 वर्षीय रामस्वरूप और 40 वर्षीय धर्मराज शामिल हैं। इन सभी की मृत्यु पेड़ गिरने की घटनाओं में हुई। प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने अयोध्या सर्किट हाउस में आकाश वर्मा, रामस्वरूप और धर्मराज के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों से बातचीत कर उन्हें हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
बस्ती में भी आपदा प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद
बस्ती में भी प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई। बस्ती सदर तहसील के चौबाह गांव निवासी मोतीराम की आंधी में छप्पर गिरने से मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी कैलाशा देवी को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी गई।इसी प्रकार महुली पश्चिम के ग्राम बलुआ निवासी प्रशांत की सर्पदंश से मृत्यु के बाद उनकी माता मीरा देवी को भी चार लाख रुपये की सहायता राशि का चेक सौंपा गया।
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा, सेवा और सहायता के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री के निर्देश हैं कि प्राकृतिक या दैवीय आपदा की स्थिति में प्रभावित परिवारों को बिना अनावश्यक विलंब के राहत, चिकित्सीय सुविधा और आर्थिक संबल उपलब्ध कराया जाए।
25 से 27 सितंबर तक सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद ने प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों और अपर जिलाधिकारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 25 सितंबर से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि में सामान्य वर्षा 7.6 मिलीमीटर होती है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
प्रदेश के 75 जिलों में से 56 जिलों में अत्यधिक वर्षा दर्ज की गई। फर्रूखाबाद में सामान्य से 7,385 प्रतिशत, कन्नौज में 5,664 प्रतिशत, शाहजहांपुर में 4,408 प्रतिशत, हमीरपुर में 4,240 प्रतिशत और महोबा में 4,100 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई।
भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में जलभराव, मकान क्षति और जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रशासन को प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा जरूरत के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना
अतिवृष्टि और आंधी-तूफान के कारण प्रदेश में अब तक 1021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली है। इनमें हरदोई में 272, सीतापुर में 108, चंदौली में 75, औरैया में 60, गोंडा में 54, हमीरपुर में 51, शाहजहांपुर में 47 और बहराइच में 44 मकान शामिल हैं।
प्रशासन द्वारा क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन कराया जा रहा है। जरूरत के अनुसार प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था करने तथा पात्र परिवारों को आवास योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए गए हैं।
फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण
बारिश से कृषि क्षेत्र पर पड़े प्रभाव का भी आकलन शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में फसल क्षति का तत्काल सर्वेक्षण और आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि नियमानुसार पात्र किसानों को सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
राहत आयुक्त ने जिलाधिकारियों, अपर जिलाधिकारियों और आपदा विशेषज्ञों को फील्ड में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करने को कहा है। राहत सामग्री और अनुमन्य सहायता राशि का वितरण प्राथमिकता के आधार पर करने के साथ प्रभावित परिवारों की समस्याओं का संवेदनशीलता से समाधान करने के निर्देश दिए गए हैं।
जलभराव वाले क्षेत्रों में रेस्क्यू अभियान जारी
प्रदेश के जलभराव वाले क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए लोगों को आवश्यक राहत सामग्री और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि जलभराव, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों तथा नदियों और नालों के तेज बहाव वाले स्थानों पर अनावश्यक आवागमन न करें। आपात स्थिति में राहत आयुक्त कार्यालय की हेल्पलाइन 1070 पर संपर्क किया जा सकता है।
बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम
लगातार बारिश और पेड़ों के गिरने से प्रदेश के कई हिस्सों में विद्युत आपूर्ति भी प्रभावित हुई है। इसे जल्द सामान्य करने के लिए ऊर्जा विभाग और बिजली निगम की टीमें लगातार काम कर रही हैं।
प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं यूपी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने अधिकारियों को युद्धस्तर पर काम करते हुए जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति सामान्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं की शिकायतों का फीडरवार निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और 1912 पर आने वाली प्रत्येक सूचना को गंभीरता से लिया जाए।
अधिकारियों को उपभोक्ताओं को यह जानकारी देने के लिए भी कहा गया है कि उनके क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति कब तक बहाल होने की संभावना है। अस्पताल, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े संस्थानों की बिजली प्राथमिकता के आधार पर बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं।
33 और 11 केवी फीडरों में ब्रेकडाउन, पोल और लाइनें क्षतिग्रस्त
बारिश और पेड़ों के गिरने के कारण 33 और 11 केवी फीडरों में बड़े पैमाने पर ब्रेकडाउन हुआ है। कई स्थानों पर विद्युत पोल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। बिजली विभाग की टीमें टूटे पोल बदलने और क्षतिग्रस्त लाइनों की मरम्मत में दिन-रात जुटी हैं। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में भी विद्युत विभाग की टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। मुख्यालय स्तर से अधिकारियों को प्रभावित जिलों में भेजकर स्थिति की निगरानी कराई जा रही है।
अधिकांश शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति लगभग सामान्य
डिस्कॉम अधिकारियों के अनुसार लखनऊ समेत प्रदेश के अधिकांश शहरी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति लगभग सामान्य कर दी गई है। मध्यांचल में बरेली मंडल को छोड़कर शहरी क्षेत्रों में आपूर्ति सामान्य है। 33 केवी के छह सबस्टेशन बंद हैं, जिन्हें शाम तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है।
पूर्वांचल में बस्ती और संतकबीरनगर को छोड़कर अधिकांश शहरी क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति सामान्य बताई गई है। पश्चिमांचल में अमरोहा, बिजनौर, संभल और मुरादाबाद के ग्रामीण क्षेत्रों को छोड़कर आपूर्ति सामान्य है। दक्षिणांचल में इटावा, कन्नौज, औरैया और फर्रुखाबाद को छोड़कर अन्य शहरों में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई है। केस्को क्षेत्र में 33 केवी का कोई ब्रेकडाउन नहीं है और वहां आपूर्ति सामान्य कर दी गई है।
प्रभावित जिलों में 24 घंटे निगरानी
बारिश से अधिक प्रभावित जिलों में अंबेडकरनगर, भदोही, आजमगढ़, बलिया, बहराइच, बस्ती, बरेली, गोंडा, देवरिया, लखीमपुर, मऊ, सिद्धार्थनगर, कानपुर देहात, हमीरपुर, शाहजहांपुर, आगरा, फिरोजाबाद, कानपुर नगर, बुलंदशहर, गोरखपुर और वाराणसी ग्रामीण शामिल हैं। इन जिलों में लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। मुख्यालयों से अधिकारियों को प्रभावित जिलों में भेजा गया है। आरडीएसएस और बिजनेस प्लान के कार्यों में लगी कार्यदायी संस्थाओं को भी आवश्यकता के अनुसार अनुरक्षण और विद्युत बहाली के कार्य में लगाया गया है।
शक्ति भवन और डिस्कॉम कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय
यूपी पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष ने निर्देश दिया है कि विद्युत आपूर्ति बहाली के कार्य में मैनपावर की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। जिला और फीडरवार लगातार मॉनिटरिंग करते हुए कार्य कराया जाए और कोई भी प्रभावित फीडर छूटने न पाए।
शक्ति भवन तथा सभी डिस्कॉम के कंट्रोल रूम 24 घंटे सक्रिय हैं। अधिकारियों को पर्याप्त सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ अस्पताल, पेयजल और अन्य आवश्यक सेवाओं की बिजली प्राथमिकता से बहाल करने के निर्देश दिए गए हैं। डिस्कॉम के प्रबंध निदेशकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याओं और चल रहे अनुरक्षण कार्यों की जानकारी दी। यूपीपीसीएल के प्रबंध निदेशक नितेश कुमार ने भी अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सरकार का फोकस-राहत, बचाव और बहाली
भारी बारिश के बीच प्रदेश सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों को बहुस्तरीय रूप से आगे बढ़ाया है। एक ओर आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं दूसरी ओर क्षतिग्रस्त मकानों और फसलों का आकलन, प्रभावित लोगों का रेस्क्यू, राहत सामग्री का वितरण तथा विद्युत एवं अन्य आवश्यक सेवाओं की बहाली पर जोर दिया जा रहा है।
सरकार और प्रशासन का जोर इस बात पर है कि आपदा से प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचने में अनावश्यक देरी न हो और जरूरतमंद लोगों को स्थानीय स्तर पर ही राहत उपलब्ध कराई जाए। प्रभावित जिलों में अधिकारी फील्ड पर रहकर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
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