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बनारस के खिलौने, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और बागपत का घेवर, AI-सेमीकंडक्टर तक छाया यूपी का हुनर

ग्रेटर नोएडा में चल रहे यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश की परंपरा और आधुनिक विकास की तस्वीर एक साथ दिखाई दे रही है। बागपत का घेवर, बनारस के लकड़ी के खिलौने, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, लखनऊ की चिकनकारी और शामली की मिठाइयों ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल परिवहन सेवाओं और ग्रामीण महिला उद्यमिता ने प्रदेश की नई संभावनाओं को सामने रखा। विदेशी व्यापारियों की रुचि से स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिला।

ग्रेटर नोएडा : उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) के तीसरे दिन ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो मार्ट में उत्तर प्रदेश की विविधता और बदलती आर्थिक तस्वीर एक साथ देखने को मिली। एक ओर बागपत का पारंपरिक घेवर लोगों को अपनी कुरकुराहट और खोये की परत से आकर्षित करता नजर आया, तो दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न जिलों की कला, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों ने लोगों का ध्यान खींचा। कौशल विकास मिशन के ‘स्किल मंच’ पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी प्रतिभा दिखाई, जबकि एआई, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बढ़ती संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

ट्रेड शो में परिवहन विभाग ने सड़क सुरक्षा और डिजिटल सेवाओं की जानकारी दी, वहीं ग्राम्य विकास विभाग ने ग्रामीण योजनाओं से लाभान्वित लोगों की सफलता की कहानियों और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों को सामने रखा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली से आई कंपनियों और मिठाई उत्पादों को विदेशी व्यापारियों से मिल रही रुचि ने भी आयोजन को खास बनाया। इस तरह यूपीआईटीएस में परंपरा से आधुनिक तकनीक तक उत्तर प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक बदलाव की कई तस्वीरें एक साथ दिखाई दीं।

सावन के बाद भी बागपत के घेवर की मिठास

यूपीआईटीएस के ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन कुजीन’ पवेलियन में बागपत का घेवर खास आकर्षण बना हुआ है। स्टॉल पर पहुंचने वाले लोग पहले घेवर को बनते देखते हैं और फिर उसका स्वाद चखते हैं। दिल्ली, गुरुग्राम और गाजियाबाद से आए लोगों ने घेवर की कुरकुराहट और खोये की परत को पसंद किया।

आमतौर पर सावन से जुड़ी मिठाई माने जाने वाले घेवर की सितंबर में भी उपलब्धता कई लोगों के लिए कौतूहल का विषय बनी। बागपत के अमीनगर सराय निवासी ईश्वर दयाल अग्रवाल के परिवार में तीन पीढ़ियों से घेवर बनाने का कारोबार है। इसी परिवार से जुड़े दीपक गोयल ट्रेड शो में स्टॉल का संचालन कर रहे हैं। उनके अनुसार कई लोग यह सवाल करते हैं कि घेवर तो सावन में मिलता है, फिर सितंबर में कैसे तैयार हो रहा है। उनका कहना है कि बागपत में घेवर की मांग केवल सावन तक सीमित नहीं है और सोशल मीडिया के माध्यम से भी अलग-अलग मौसम में इसकी उपलब्धता की जानकारी लोगों तक पहुंच रही है।

आंखों के सामने तैयार हो रहा ताजा घेवर

बागपत से पांच कारीगर ट्रेड शो में पहुंचे हैं, जो स्टॉल पर ही लोगों के सामने ताजा घेवर तैयार कर रहे हैं। घेवर बनाने की प्रक्रिया को करीब से देखने के लिए भी बड़ी संख्या में लोग स्टॉल पर रुक रहे हैं। दीपक गोयल के अनुसार ट्रेड शो में रोजाना अच्छी बिक्री हो रही है और घेवर 600 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। शुद्ध दूध से तैयार खोये की परत, नीचे का कुरकुरा हिस्सा और पारंपरिक बनाने की प्रक्रिया इसकी खासियत बताई गई है।

दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज सहित कई आगंतुकों ने घेवर का स्वाद लिया और इसे तैयार होते हुए भी देखा। पहली बार ‘एक जिला, एक व्यंजन’ के तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को ट्रेड शो में स्थान मिला है। बागपत का घेवर इसी पहल के तहत यहां पहुंचा है।

‘स्किल मंच’ पर बच्चों से बुजुर्गों तक ने दिखाया हुनर

ट्रेड शो के तीसरे दिन उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का पवेलियन भी आकर्षण का केंद्र रहा। रविवार का दिन होने के कारण परिवारों, युवाओं, बच्चों और बुजुर्गों की बड़ी संख्या यहां पहुंची। लोगों ने प्रदेश की पारंपरिक कला और उत्पादों को देखने के साथ कई कौशलों को स्वयं आजमाने का अनुभव भी लिया।

पहली बार शुरू किए गए ‘स्किल मंच’ पर बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों की तालियां बटोरीं। युवाओं ने गायकी और फाइन आर्ट्स के माध्यम से अपनी रचनात्मकता दिखाई। ‘हुनर’ थीम पर रंगों के जरिए युवाओं ने अपनी कल्पनाओं को आकार दिया।इस मंच की खासियत यह रही कि इसमें केवल युवाओं को ही नहीं, बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को अपनी प्रतिभा और कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिला। इसका उद्देश्य लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ कौशल, करियर और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना बताया गया।

मिट्टी से लेकर चिकनकारी तक, सीखने का अवसर

पवेलियन में विभिन्न कौशलों के लाइव डेमो भी दर्शकों के लिए आकर्षण बने। पॉटरी और टेराकोटा स्टॉल पर आगंतुकों ने मिट्टी को अपने हाथों से आकार देकर कलाकृतियां बनाने की कोशिश की। लखनऊ की चिकनकारी के स्टॉल पर लोगों ने सुई-धागे से होने वाली बारीक कारीगरी को करीब से समझा और उसे खुद आजमाने का प्रयास किया।

बनारस के लकड़ी के खिलौने, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी, मथुरा के डेकोरेटिव आइटम्स और प्रतापगढ़ के आंवला उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। आगंतुक केवल उत्पाद देखने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके निर्माण, परंपरा और उनसे जुड़े कौशल की जानकारी भी लेते दिखाई दिए।

एआई और सेमीकंडक्टर की दिशा में बढ़ते कदम

ट्रेड शो के दौरान ‘यूपीज जर्नी फ्रॉम इलेक्ट्रॉनिक्स लीडर टू एआई एंड सेमीकंडक्टर पावरहाउस’ विषय पर आयोजित सत्र में उत्तर प्रदेश के आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने प्रदेश में तकनीक आधारित उद्योगों की संभावनाओं पर बात रखी।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग के साथ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर के क्षेत्र में भी अपनी क्षमता विकसित कर रहा है। उनके अनुसार आने वाले समय में एआई और आईटी को कृषि तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ना महत्वपूर्ण होगा।

मंत्री के मुताबिक हाल में 52 स्टार्टअप के साथ हुई बैठक में सामने आया कि बड़ी संख्या में स्टार्टअप फूड सप्लाई से जुड़े हैं, जबकि कृषि क्षेत्र में एआई का उपयोग करने वाले स्टार्टअप की संख्या अभी कम है। उन्होंने इसे अवसर बताते हुए कृषि आधारित उद्योगों में तकनीक के इस्तेमाल से किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाने की संभावना पर जोर दिया।

उन्होंने मक्का उत्पादन को इथेनॉल उत्पादन से जोड़ने का उदाहरण देते हुए कहा कि इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की बात सामने आई है। उनका कहना था कि भविष्य में तकनीक आधारित समाधान कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला सकते हैं।

निवेश और औद्योगिक विकास पर भी जोर

सुनील कुमार शर्मा ने कहा कि उद्योगों की जरूरत के अनुरूप सरकार स्तर पर नीतिगत बदलाव किए जा रहे हैं। निवेश प्रोत्साहन राशि के वितरण में पारदर्शिता पर जोर देने तथा निवेश प्रोत्साहन से जुड़ी फाइलें लंबित न रखने की व्यवस्था का भी उन्होंने उल्लेख किया।

उनके अनुसार पिछले एक वर्ष में करीब 500 से 600 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन वितरित किए गए हैं। उन्होंने एक्सप्रेसवे, इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग तथा एयर कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हुए विकास का भी उल्लेख किया। रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में भी प्रदेश में हो रहे बदलाव की चर्चा की गई।

उन्होंने 2017 में राज्य के करीब 3.36 लाख करोड़ रुपये के बजट से बढ़कर लगभग 9.72 लाख करोड़ रुपये होने का आंकड़ा भी प्रस्तुत किया और इसे बढ़ती आर्थिक गतिविधियों, निवेश और राजस्व क्षमता से जोड़ा। उन्होंने एआई, सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर और इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम से निवेशकों तथा तकनीकी विशेषज्ञों को जोड़ने का आह्वान किया।

सड़क सुरक्षा और डिजिटल परिवहन सेवाओं पर फोकस

यूपीआईटीएस में परिवहन विभाग के स्टॉल पर सड़क सुरक्षा और परिवहन सेवाओं में तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी जा रही है। विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि अनधिकृत बसों के खिलाफ 28 से 30 सितंबर तक ‘ऑपरेशन कवच’ अभियान चलाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य परिवहन नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करना और सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है।

एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए उन्होंने एंड ऑफ लाइफ (ईओएल) वाहनों को अधिकृत स्क्रैप केंद्रों पर स्क्रैप कराने की अपील की। पुराने और निर्धारित जीवन पूरा कर चुके वाहनों को अधिकृत केंद्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।

परिवर्तन पोर्टल और फेसलेस सेवाएं

परिवहन विभाग की ओर से बीएस-1, बीएस-2, बीएस-3 और बीएस-4 मानक वाले पुराने वाहनों के स्वामियों को ‘परिवर्तन पोर्टल’ के माध्यम से आवेदन करने की जानकारी दी गई।

कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए यातायात नियमों के पालन पर भी जोर दिया गया। दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट, चारपहिया में सीट बेल्ट, शराब पीकर वाहन न चलाने और ड्राइविंग के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की गई।विभाग के अनुसार उसकी 52 सेवाएं फेसलेस की जा चुकी हैं और 40 सेवाएं ऑटो अप्रूवल मोड में संचालित हो रही हैं। ट्रेड शो में ड्राइविंग लाइसेंस से संबंधित आधुनिक तकनीक और सिमुलेटर के माध्यम से युवाओं को जानकारी भी दी जा रही है।

ग्रामीण महिलाओं की सफलता की कहानियां भी बनीं आकर्षण

ग्राम्य विकास विभाग का स्टॉल भी ट्रेड शो में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। यहां ग्रामीण योजनाओं के लाभार्थियों की सफलता की कहानियों को तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के जरिए व्यापक मंच मिल रहा है। प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू ने स्टॉल का निरीक्षण कर लाभार्थियों की प्रदर्शित सफलता की कहानियों और वीडियो को देखा।

उन्होंने अधिकारियों को वीबी-जी राम जी, मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण सहित विभिन्न योजनाओं की जानकारी आगंतुकों तक पहुंचाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों पर पहुंचकर महिलाओं के कार्य की सराहना भी की।

शामली के उत्पादों को विदेशी बाजार की झलक

यूपी ट्रेड शो में शामली जिले से 10 कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इनमें एक दशक से अधिक समय से निर्यात कर रही कैरियर व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड सहित विभिन्न कंपनियां शामिल हैं। विदेशी व्यापारियों में इन कंपनियों के उत्पादों के प्रति रुचि दिखाई देने की जानकारी दी गई है। शामली से कैरियर व्हील्स प्राइवेट लिमिटेड, अमर स्प्लिंट्स प्राइवेट लिमिटेड, बेजरिका प्राइवेट लिमिटेड, कैरा डाइम हेल्थ केयर एलएलपी, आरव एग्रो फूड्स, श्री आयुर्वेदिक संस्थान और अंकित हैंडलूम सहित अन्य कंपनियां भाग ले रही हैं। ‘एक जिला, एक व्यंजन’ के तहत साधु स्वीट्स और अग्रवाल स्वीट्स के स्टॉल भी लगाए गए हैं।

पलंग तोड़ पेड़ा और बर्फी की विदेशी मेहमानों में चर्चा

साधु स्वीट्स के मालिक राकेश गर्ग के अनुसार ट्रेड शो के पहले दिन से ही स्टॉल पर ग्राहकों की भीड़ है। उनकी दुकान की विभिन्न मिठाइयों में पलंग तोड़ बर्फी और पलंग तोड़ पेड़ा ग्राहकों की पसंद बने हुए हैं। उनके अनुसार ट्रेड शो के माध्यम से इन उत्पादों को विदेशी मेहमानों तक पहुंचने का अवसर मिला है। बताया गया कि हाल नंबर 17 में वियतनाम, रूस, बेलारूस और ऑस्ट्रिया के विदेशी व्यापारी ठहरे हैं, जिनकी भारतीय मिठाइयों में रुचि दिखाई दे रही है।

एक ही मंच पर परंपरा से तकनीक तक का सफर

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के तीसरे दिन की तस्वीरों को एक साथ देखा जाए तो आयोजन में उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के कई स्तर दिखाई देते हैं। बागपत का पारंपरिक घेवर अपनी पीढ़ियों पुरानी कारीगरी के साथ लोगों को आकर्षित कर रहा है, वहीं बनारस के लकड़ी के खिलौने, आजमगढ़ की ब्लैक पॉटरी और लखनऊ की चिकनकारी प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सामने ला रहे हैं।

दूसरी ओर ‘स्किल मंच’ नई पीढ़ी को अपनी प्रतिभा दिखाने और कौशल सीखने का अवसर दे रहा है। एआई, सेमीकंडक्टर और डेटा सेंटर जैसे आधुनिक क्षेत्रों पर चर्चा प्रदेश की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को सामने रखती है। परिवहन विभाग की डिजिटल सेवाएं और सड़क सुरक्षा अभियान प्रशासनिक व्यवस्थाओं में तकनीक के इस्तेमाल की तस्वीर पेश करते हैं। ग्रामीण विकास विभाग के स्टॉल पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की सफलता की कहानियां और शामली के उत्पादों को विदेशी व्यापारियों की मिल रही रुचि स्थानीय उत्पादन को व्यापक बाजार से जोड़ने की दिशा को दर्शाती है।

इस तरह यूपीआईटीएस में उत्तर प्रदेश की तस्वीर केवल बड़े उद्योगों और निवेश तक सीमित नहीं दिखाई दे रही, बल्कि घेवर बनाने वाले कारीगर से लेकर एआई पर काम करने वाले तकनीकी विशेषज्ञ, चिकनकारी कलाकार से लेकर स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमी और स्थानीय मिठाई निर्माता से लेकर निर्यातक कंपनियों तक-प्रदेश की विविध आर्थिक और सामाजिक क्षमता एक ही मंच पर दिखाई दे रही है।

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