रेलवे को मिलेगी नई रफ्तार, 4 राज्यों में 9,450 करोड़ की परियोजनाओं पर मुहर
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में करीब 9,450 करोड़ रुपये की चार रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कुल 410 किलोमीटर लंबी इन परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा किया जाएगा। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इससे रेल परिचालन क्षमता बढ़ेगी, भीड़भाड़ कम होगी और माल ढुलाई को गति मिलेगी। करीब 6,448 गांवों और 60 लाख लोगों को लाभ मिलने के साथ 7.6 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता विकसित होगी।
नयी दिल्ली : रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल मार्गों के विद्युतीकरण और रेल पटरियों को उन्नत बनाने के काम में पिछले 10-12 वर्ष में हुई प्रगति को अभी ” शुरुआत” बताते हुए बुधवार को कहा कि मोदी सरकार परिवहन क्षेत्र में दशकों की उपेक्षा और अड़चनों को दूर करने में लगी है। श्री वैष्णव के पास सूचना प्रसारण और इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालयों की भी जिम्मेदारी है।वह यहां मंत्रिमंडल और आंतरिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक के निर्णयों की जानकारी दे रहे थे।
श्री वैष्णव ने इस अवसर पर संवाददाताओं के सवालों का जवाब देते हुए कहा, ‘ परिवहन क्षेत्र में साठ साल की उपेक्षा को 12 साल में दूर करने का प्रयास किया गया है।” उन्होंने रेलवे को जल-मार्ग के बाद परिवहन का सबसे किफायती जरिया बताते हुए कहा कि इन बारह वर्षों में रेलवे के 81 प्रतिशत ट्रैक (पटरियों) का उन्नयन और रेल नेटवर्क का करीब करीब शत प्रतिशत का विद्युतीकरण किया जा चुका है।रेल मंत्री ने कहा, ” अभी तो यह शुरुआत है। आगे विकास का एक नया ही स्तर होगा।
“उन्होंने कहा कि रेल मार्गों के उन्नयन से ट्रेनों की औसत गति बढ़ी है। हर वर्ष तीन हजार किलोमीटर से चार हजार किलोमीटर नयी रेल पटरियां बिछाई जा रही हैं। पटरियों के उन्नयन की देन है कि रेलवे के लिए पिछले साल विभिन्न अवसरों पर कुल मिला कर 75,000 विशेष ट्रेनों का परिचालन करना संभव हुआ।उन्होंने कहा कि देश में परिवहन क्षेत्र में बहुत अधिक अड़चने थीं। इन अड़चनों को तेजी से दूर करने का प्रयास है।
श्री वैष्णव ने कहा कि भारत में परिवहन सेवाओं की मांग में साल-दर -साल औसतन 10 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। रेलवे, पोत परिवहन , ट्रक ट्रांसपोर्ट और हवाई परिवहन सभी के लिए अवसरों का विस्तार हो रहा है।उन्होंने कहा कि परिवहन की विभिन्न प्रणालियों में सबसे कम खर्च जल-मार्ग पर आता है ।उसके बाद किफायत के मामले में रेलवे का स्थान है।इसी कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2024 के बाद रेलवे में बड़े निवेश के निर्णय किये हैं। इससे लॉजिस्टिक्स की लागत कम होती है तथा पर्यावरण का नुकसान भी कम होता है।
उन्होंने कहा कि सरकार अध्ययन के आधार पर पुलों के डिजाइन पर विशेष ध्यान दे रही है ताकि वे मजबूत और अच्छे हो। यह काम वाजपेयी सरकार के समय से ही किया जा रहा है।मंत्रिमंडल और सीसीईए की आज की बैठक में पश्चिम बंगाल,ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में रेलवे अवसंरचना के विस्तार और बिहार में एनएच-22 के मुजफ्फरपुर-सीतीमढ़ी-सोनबरसा खंड को उन्नत कर चार लेन का बनाने की परियोजनाओं को मंजूरी दी गयी।
चार राज्यों में रेल पटरियों का विस्तार की 9,450 करोड़ रुपये की चार परियोजनाओं को मंत्रिमंडल की मंजूरी
सरकार ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में रेल पटरियों की संख्या बढ़ाने वाली चार परियोजनाओं को मंजूरी दी है।सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। करीब 410 किलोमीटर की इन परियोजनाओं के निर्माण की अनुमानित लागत करीब 9,450 करोड़ रुपये है और इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा किया जाना है।
उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में 173 किलोमीटर लंबी खड़गपुर-भद्रक (रानीताल) चौथी लाइन, ओडिशा में 75 किलोमीटर लंबी भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में 90 किलोमीटर लंबी गुम्मिडीपुंडी-गुडूर तीसरी एवं चौथी लाइन तथा ओडिशा में 72 किलोमीटर लंबी कटक-पारादीप (बदाबंधा) तीसरी एवं चौथी लाइन शामिल हैं।केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन चारों परियोजनाओं के पूरा होने से आठ जिलों में रेल संपर्क मजबूत होगा और करीब 6,448 गांवों को इसका लाभ मिलेगा।
परियोजनाओं के पूरा इन राज्यों की लगभग 60 लाख आबादी को फायदा होगा इससे रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी, भीड़भाड़ कम होगी तथा यात्रियों और माल की आवाजाही सुगम होगी। इन परियोजनाओं से कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, वाहन और खाद्यान्न आदि के परिवहन के लिए करीब 7.6 करोड़ टन सालाना अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता बेहतर होगी।
श्री वैष्णव ने बताया कि इन परियोजनाओं से कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, मां भद्रकाली मंदिर, मां धामराई मंदिर, पंचलिंगेश्वर मंदिर, तटवर्ती पर्यटन स्थलों, पुलिकट झील, नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य, वीरराघव पेरुमल मंदिर, गडा कुजंगा जगन्नाथ मंदिर, सरला मंदिर, धाबलेश्वर मंदिर और ललितगिरि जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को बेहतर रेल संपर्क मिलेगा।इन परियोजनाओं से करीब 13 करोड़ लीटर तेल आयात में कमी और लगभग 65 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। ये परियोजनाएं पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत तैयार की गयी हैं।(वार्ता)
मुख्यमंत्री योगी ने दिया नया मंत्र- बड़ा सोचो, यूपी जैसा सोचो
नौ वर्षों में यूपी में 360 डिग्री बदलाव ने प्रदेश को बनाया निवेश का ड्रीम डेस्टिनेशन: मुख्यमंत्री



