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शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा सोलह कलाओं से होंगे परिपूर्ण, मां लक्ष्मी की बरसेगी की कृपा

शरद पूर्णिमा 30 को मनाई जाएगी

ज्योतिष गणना के अनुसार इसबार शरद पूर्णिमा 30 सितम्बर को मनाई जाएगी। ज्योतिष मत के अनुसार पूर्णिमा तिथि का आरंभ – 30 अक्तूबर को शाम 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा। पूर्णिमा तिथि की समाप्ति – 31 अक्तूबर को रात के 8 बजकर 21 मिनट पर होगी। इस दौरान ही पूजा का विधान रहेगा।

वाराणसी। साल में आने वाली सभी पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का खास महत्व होता है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा कहा जाता है। 30अक्टूबर को सायं शरद पूर्णिमा का महत्वपूर्ण त्यौहार मनाया जायेगा। इसे रास पूर्णिमा, कोजागिरी पूर्णिमा या कौमुदीव्रत भी कहा जाता है। ज्‍योतिष शास्त्र के अनुसार पूरे साल में केवल इसी दिन चन्द्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण होता है। हिन्दू धर्म में इस दिन को कोजागर व्रत भी माना गया है। पुरानी मान्यता है कि इस रात्रि को चन्द्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है। तभी तो इस दिन उत्तर भारत में खीर बनाकर रात भर चाँदनी में रखने का विधान है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा की रात को जो भी व्यक्ति सोता हुआ मिलता है माता लक्ष्मी उनके घर पर प्रवेश नहीं करती हैं। ऐसे में देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने और हर मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए कुछ उपाय किए जाते हैं। प्रतिवर्ष किया जाने वाला यह कोजागर व्रत लक्ष्मीजी को संतुष्ट करने वाला है। कहा जाता है इससे प्रसन्न हुईं माँ लक्ष्मी इस लोक में तो समृद्धि देती ही हैं, शरीर का अंत होने पर परलोक में भी सद्गति प्रदान करती हैं।

जब खीर भी अमृत बन जाता है

शरद पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसे पूरी रात खुले आसमान के नीचे गुपचुप सुरक्षित तरीके से रख दिया जाता है, ताकि उस पर चंद्रमा का प्रकाश सीधे पड़ता रहे।अगले दिन सुबह उसे प्रसाद के रूप में सभी परिजनों को बाँट कर खाया जाता है।कहते हैं कि शरद पूर्णिमा पर चांद की किरणें अमृत बरसाती हैं और खीर में अमृत का अंश मिल जाता है।

रात्रि जागरण का है विधान

कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा की रात देर तक जगने के बाद बिना भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का नाम लिए नहीं सोना चाहिए। रात में जगने की वजह से इसको कोजागरी पूर्णिमा यानी जागने वाली रात भी कहते हैं।

पूजा से होती है कर्जो से मुक्ति

यह भी मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी जी की पूजा करने से सभी कर्जों से मुक्ति मिलती हैं। इसीलिए इसे कर्जमुक्ति पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा की रात को माता लक्ष्मी के स्वागत करने के लिए पूर्णिमा की सुबह-सुबह स्नान कर तुलसी को भोग, दीपक और जल अवश्य चढ़ाएं। ऐसा करने से मां लक्ष्मी बेहद प्रसन्न होती है।

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