
महराजगंज। लॉकडाउन के कारण कई जगह सेनेटरी पैड की अनुपलब्धता ने महिलाओं एवं लड़कियों को डिस्पोजेबल पैड की जगह कपड़े के पैड इस्तेमाल करने पर बाध्य किया है। कोरोना काल में कपड़े का सेनेटरी पैड बेहतर विकल्प बन कर सामने आया है। रेगुलर सेनेटरी पैड के विकल्प के रूप में कपड़े से बने पैड को भी समान रूप से प्रचारित किया जा सकता है, जैसे कपड़ों से बने पैड को 4-6 घंटे तक इस्तेमाल किया जाए, पैड बदलने से पूर्व एवं बाद में हाथों की सफाई की जाए, साफ़ सूती कपडे से बने पैड ही इस्तेमाल में लाये जाएं और पैड को अच्छी तरह धोने के बाद धूप में सुखाया जाए ताकि किसी भी तरह के संक्रमण के प्रसार का खतरा कम हो सके ।
लंबे समय से लॉकडाउन ने सेनेटरी पैड की उपलब्धता को किया प्रभावित :
कई राज्यों एवं जिलों में सरकार द्वारा स्कूलों में सेनेटरी पैड का वितरण किया जाता है लेकिन लॉकडाउन के कारण स्कूलों के बंद होने से बहुत सी लड़कियों एवं उनके परिवार के अन्य सदस्यों को सेनेटरी पैड उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं । लॉकडाउन के कारण सेनेटरी पैड का निर्माण भी बाधित हुआ है जिससे ग्रामीण स्तर के रिटेल पॉइंट्स पर पैड की उपलब्धता भी बेहद प्रभावित हुयी है । गाँव के जो लोग जिला स्तर से सेनेटरी पैड की खरीदारी कर सकते थे, वह भी लॉकडाउन के कारण यातायात साधन उपलब्ध नहीं होने से वहां तक आसानी से पहुँच नहीं पा रहे हैं ।
सेनेटरी पैड की आसान उपलब्धता में होल सेलर्स को भी दिक्कत का सामना करन पड़ रहा है, निरंतर दो महीने तक देशव्यापी लॉकडाउन के कारण सेनेटरी पैड का होलसेल वितरण काफी प्रभावित हुआ है ।
यद्यपि धीरे-धीरे इसे पुनः नियमित करने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन अधिक यातायात कॉस्ट ( रोड एवं हवाई भाड़ा) अभी भी चुनौती रहने वाला है । अभी सेनेटरी पैड के सीमित उत्पादन की संभावना बनी रहेगी, क्योंकि फैक्ट्री के अंदर मजदूरों को सामाजिक दूरी का ख्याल रखना होगा । इसके साथ ही जिन फैक्ट्रियों में प्रवासी मजदूरों की संख्या अधिक थी, वहाँ मजदूरों की कमी की समस्या बढ़ सकती है ।
महिलाओं एवं लड़कियों की फीडबैक भी जरुरी
इंटरनेशनल सेंटर फॉर रिसर्च ऑन वीमेन (आईसीआरडब्लू) एशिया की टेक्निकल एक्सपर्ट सपना केडिया कहती हैं, माहवारी स्वच्छता कार्यक्रमों के बेहतर क्रियान्वयन के लिए इस संबंध में महिलाओं एवं लडकियों से भी फीडबैक लेनी चाहिए. इस फीडबैक में मासिक धर्म स्वास्थ्य उत्पादों एवं सेवाओं की उपलब्धता, पहुंच, लागत, स्वीकार्यता (गुणवत्ता और अन्य स्थानीय कारक) को शामिल करना चाहिए ।



