
कुशीनगर हादसाः’देवदूत’ बने पुलिस वाले,फटी शर्ट और नंगे पांव 15 लोगों को पहुंचाया अस्पताल
खूब हो रहे बहादुरी के चर्चे,4 एंबुलेंसकर्मियों पर गिरी गाज
कुशीनगर : नौरंगिया गांव में कुएं हादसे के शिकार लोगों को हॉस्पिटल तक पहुंचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने अपनी वर्दी की परवाह नहीं की। घायलों को निकालने में उनकी वर्दी फट गई, पैरों में जूते भी नहीं थे, लेकिन वे शिद्दत से लोगों को बचाने में लगे रहे। वहीं, पर शादी समारोह में शामिल होने के लिए एंबुलेंस चालक मरते हुए लोगों को छोड़ गया। पुलिसकर्मियों के इस काम को लेकर एक तरफ जहां उनके बहादुरी के चर्चे हो रहे हैं, वहीं कुशीनगर के सीएमओ सुरेश पटरिया ने स्वास्थ्य विभाग से चार लोगों को कार्रवाई करते हुए दो को बर्खास्त कर दिया और दो के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कर रहे हैं।

नेबुआ नौरंगिया के सीओ खड्डा संदीप वर्मा और थानाध्यक्ष गिरजेश उपाध्याय को कुएं हादसे की सूचना 16 की रात 9.30 बजे मिल गई। दोनों अधिकारी साथ ही तत्काल फोर्स लेकर मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को अपने वाहनों से हॉस्पिटल पहुंचाया। हालांकि, इस दौरान उनके जूते पैर से निकल करके गायब हो गए और वर्दी भी कई जगह से फट गई। 16 फरवरी की रात से लेकर 17 फरवरी की शाम तक वह मौके पर ही रहे। इस दौरान उनके साथ महेंद्र पांडेय, सोनू कुमार, विनोद, मानवेंद्र सिंह, अमित कुमार सिंह सहित नौ लोगों की टीम लगातार काम कर रही थी।
पुलिसकर्मी एक साथ 13 शव को लेकर पनिहवा घाट के लिए निकले। अंतिम यात्रा के दौरान रास्ते में जाम न हो, इसके लिए पुलिसकर्मी शव के आगे स्कार्ट बनाकर रास्ता साफ करवा रहे थे। हालांकि, इस दौरान नाराज ग्रामीणों ने प्रदर्शन भी किया और नारेबाजी भी की, लेकिन पुलिस वालों ने उनके दर्द को समझते हुए सिर्फ समझाते ही दिखे। करीब 20 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गुरुवार की देर शाम पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान किसी भी पुलिसकर्मी ने न ही कुछ खाया और न पीया। भीड़ में फटी वर्दी और नंगे पांव वे अपनी ड्यूटी पर जमे रहे।



