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विदेशी और भारतीय कोचों के लिए 4 वर्ष का अनुबंध होगा- किरेन रिजिजू

आईओए अध्यक्ष ने इस कदम की सराहना की

सरकार द्वारा ओलंपिक 2024 और 2028 पर ध्यान केंद्रित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि ओलंपिक वाले एथलीट एक कोच के साथ लगातार प्रशिक्षित करने में समर्थ रहें और इस प्रकार अपने प्रदर्शन में सुधार करने की दिशा में लगातार काम करते रहें, विदेशी और भारतीय कोचों को अब ओलंपिक चक्र के साथ ही चार वर्ष का अनुबंध प्रदान किया जाएगा।

इस निर्णय के संदर्भ में बताते हुए, केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने कहा कि, “कोच किसी भी देश की खेल पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ होते हैं और हमारे विशिष्ट एथलीटों के लिए सही कोचिंग सुनिश्चित करना, ओलंपिक सहित सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की संभावनाओं को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह निर्णय ओलंपिक 2024 और 2028 की तैयारी के लिए, भारत की दीर्घकालिक रोडमैप का एक हिस्सा है। मुझे विश्वास है कि हमारे एथलीट इससे लाभान्वित होंगे।”

कोचों के लिए 4 वर्ष का अनुबंध, कोच के प्रदर्शन और संबंधित एनएसएफ की ओर से की गई सिफारिश के आधार पर दिया जाएगा। अनुबंध, हालांकि 4 वर्ष के लिए होगा,  लेकिन इसकी वार्षिक समीक्षा की जाएगी और एक कोच के समग्र प्रदर्शन के आधार पर  उसे बढ़ाया जाएगा, जिसका संकेत प्रमुख अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में एथलीटों के प्रदर्शन से प्राप्त होगा।

सरकार के निर्णय पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, भारतीय ओलंपिक संघ के अध्यक्ष, डॉ. नरिंदर ध्रुव बत्रा ने कहा, “मैं इस फैसले का स्वागत करता हूं और खेल मंत्री, मंत्रालय और साई को धन्यवाद देता हूं। हाल ही में खेल मंत्री के साथ हुई बैठक में, विभिन्न एनएसएफ के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे को उठाया था और विदेशी कोचों के लिए लंबी अवधि के अनुबंध का अनुरोध किया था। इस फैसले से एथलीटों को बड़े पैमाने पर सहायता मिलेगी, विशेष रूप से इस समय जब उन्हें कुछ महीनों के लिए मजबूरी में ब्रेक लेना पड़ा है। मौजूदा कोच इन एथलीटों को जानते हैं और वे उनका सही रूप से निर्माण करेंगे।”

डॉ. बत्रा ने आगे कहा कि, “कोच को लगातार बदलने का मतलब है कि एक एथलीट को नए कोच के स्वभाव के साथ सामंजस्य बिठाना और इसी प्रकार से कोच के लिए भी एथलीट के स्वभाव के साथ सामंजस्य बिठाना। इससे प्रायः प्रदर्शन के स्तर पर बहुत फर्क पड़ता है। इस फैसले का सकारात्मक प्रभाव निश्चित रूप से 2022 के एशियाई खेलों और 2023 के विश्व चैंपियनशिप पर भी दिखाई देगा, जो 2014 के ओलंपिक के अग्रणी हैं। कोचों की निरंतरता के कारण निश्चित रूप से एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार होगा और इससे भारत के लिए ज्यादा पदक सुनिश्चित होगा।” इस बीच, टोक्यो 2020 ओलंपिक के आयोजन को स्थगित करके अगले वर्ष करने के मद्देनजर, सभी विदेशी कोचों का अनुबंध 30 सितंबर, 2021 तक बढ़ा दिया जाएगा।

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