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न्याय लोकतंत्र का महत्वूर्ण आधार: कोविंद

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने शनिवार को न्याय को लोकतंत्र का महत्वूर्ण आधार बताया और कहा कि न्यायाधीशों के लिए यह आवश्यक है कि वे अदालती कार्यवाही के दौरान अपनी टिप्पणियों में अत्यधिक विवेक का इस्तेमाल करें।उन्होंने उच्चतम न्यायालय द्वारा आयोजित ‘संविधान दिवस’ समारोह के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि न्याय वह महत्वपूर्ण आधार है, जिसके चारों ओर लोकतंत्र घूमता है। न्यायपालिका ने शुरू से ही अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए आचरण के उच्चतम मानकों का लगातार पालन किया है तथा लोगों की नजर में यह सबसे भरोसेमंद संस्था है।

उन्होंने न्यायाधीशों का आह्वान करते हुए कहा कि इस बात का हमेशा ध्यान रखा जाये कि बेशक अच्छे इरादा हों लेकिन अविवेकपूर्ण टिप्पणी न्यायपालिका को नीचा दिखाने के लिए संदिग्ध बहस को जगह देती है।राष्ट्रपति ने कहा कि इसमें संदेह नहीं कि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों ने सूचनाओं को लोकतांत्रिक बनाने के लिए आश्चर्यजनक रूप से काम किया है, फिर भी इनका एक स्याह पक्ष है। इस पहलू पर ध्यान देना जरूरी है कि हाल में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर न्यायपालिका के खिलाफ कुछ अपमानजनक टिप्पणियों के मामले सामने आए हैं।

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि इस घटना के पीछे क्या हो सकता है। क्या हम एक स्वस्थ समाज के लिए सामूहिक रूप से इसके पीछे के कारणों की पड़ताल कर सकते हैं।राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान हमारी सामूहिक यात्रा का रोडमैप है। इसके मूल में न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व हैं। उन्होंने कहा, “ न्याय वह महत्वपूर्ण आधार है जिसके चारों ओर लोकतंत्र घूमता है। यदि राज्य की तीन संस्थाएं- न्यायपालिका, विधायिका और कार्यपालिका-एक सामंजस्यपूर्ण अस्तित्व में हैं, तो यह और मजबूत हो जाती हैं। ”उन्होंने कहा कि संविधान में तीनों स्तंभों का अपना परिभाषित स्थान है और वे अपनी सीमा के भीतर कार्य करती हैं।

श्री कोविंद ने विज्ञान भवन में आयोजित दो दिवसीय समारोह के समापन अवसर पर कहा कि उच्चतम न्यायालय ने लोगों तक सुलभ तरीके से न्याय पहुंचाने दिशा में सराहनीय कदम उठाये हैं।राष्ट्रपति ने लंबे समय से लंबित मामलों की ओर इशारा करते हुए कहा कि इससे आर्थिक विकास और तरक्की भी प्रभाव पड़ता है। अब समय आ गया है कि सभी हितधारक राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखकर कोई रास्ता निकालें।उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान न्यायपालिका के क्षेत्र में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को अपनाने में तेजी लायी गयी। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में युवा दिमाग कंप्यूटर और इंटरनेट का उपयोग न्याय और नागरिकों की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

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