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गांव की माटी से ग्लैमर तक: भोजपुरी सिनेमा की नायिकाओं का सफर

भोजपुरी सिनेमा भारतीय सिनेमा का वह हिस्सा है, जिसकी जड़ें गांव की माटी में गहरी पैठी हुई हैं। गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ाइबो (1963) से शुरू हुई यात्रा कई दशकों तक पारिवारिक और सांस्कृतिक कहानियों की मिसाल रही। लेकिन 2000 के दशक की शुरुआत तक यह इंडस्ट्री लगभग ठहराव की स्थिति में थी। फिर आया साल 2004—जब ससुरा बड़ा पइसावाला ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर धमाका किया, बल्कि भोजपुरी इंडस्ट्री को नया जीवन दिया। इसी फिल्म ने एक नई नायिका—रानी चटर्जी—को जन्म दिया, और यहीं से शुरू हुआ भोजपुरी की आधुनिक अभिनेत्रियों का दौर।

पिछले बीस वर्षों में भोजपुरी इंडस्ट्री ने कई सफल अभिनेत्रियों को जन्म दिया। किसी ने अपने अभिनय से, किसी ने नृत्य और ग्लैमर से, तो किसी ने सोशल मीडिया के जरिये दर्शकों पर राज किया। आइए विस्तार से जानते हैं भोजपुरी की प्रमुख नायिकाओं और उनके सफर के बारे में।

रानी चटर्जी – आधुनिक दौर की नींव

भोजपुरी के आधुनिक पुनर्जागरण की शुरुआत रानी चटर्जी से हुई। ससुरा बड़ा पइसावाला (2004) ने न सिर्फ रिकॉर्ड तोड़े बल्कि उन्हें इंडस्ट्री की पहली सुपरस्टार भी बना दिया। रानी को पारिवारिक और सामाजिक फिल्मों में मजबूत अभिनेत्री के रूप में देखा गया।
प्रमुख फिल्में: ससुरा बड़ा पइसावाला, दिलजले, लागल रहा ऐ राजा जी, फुलवा, नगीना। करीब एक दशक तक वे भोजपुरी की निर्विवाद “क्वीन” रहीं। हालांकि, इंडस्ट्री में बदलते रुझानों और नई पीढ़ी की अभिनेत्रियों के आगमन से उनकी पकड़ कमजोर पड़ी, लेकिन उनकी पहचान आज भी मजबूत है।

भोजपुरी की “क्वीन” रिंकू घोष

भोजपुरी सिनेमा की बात हो और रिंकू घोष का नाम न आए, यह संभव ही नहीं। 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने ‘दरोगा बाबू आई लव यू’, ‘बिदाई’, ‘बलिदान’, ‘गंगा जमुना सरस्वती’ और ‘नगीना’ जैसी सुपरहिट फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता। उनकी खूबसूरती और दमदार अभिनय ने उन्हें भोजपुरी की क्वीन बना दिया था। खास बात यह रही कि उनकी फिल्मों में न सिर्फ पारिवारिक संवेदनाएं झलकती थीं, बल्कि देशभक्ति और सामाजिक संदेश भी प्रमुखता से दिखते थे। आज भी रिंकू घोष की फिल्मों का जादू यूट्यूब और टीवी पर बरकरार है।

* भोजपुरी सिनेमा की चर्चित नायिकाओं में रिंकू घोष का नाम विशेष है।
* 2000 के दशक की शुरुआत में उन्होंने अपने अभिनय और खूबसूरती से दर्शकों को दीवाना बनाया।
* उनकी 5 सुपरहिट फिल्में रही हैं –

* दरोगा बाबू आई लव यू (2004) – मनोज तिवारी के साथ
* बिदाई (2008) – रवि किशन के साथ
* बलिदान (2009) – जैकी श्रॉफ का कैमियो
* गंगा जमुना सरस्वती (2012) – मल्टीस्टारर फिल्म
* नगीना (2014) – एक्शन-थ्रिलर, नया अंदाज़
* रिंकू घोष को कभी भोजपुरी की “क्वीन” कहा गया।
* आज भी उनकी फिल्मों की लोकप्रियता यूट्यूब और टीवी पर बनी हुई है।

मोनालिसा (अंतरा विश्वास) – ग्लैमर का चेहरा

मोनालिसा ने भोजपुरी इंडस्ट्री को वह ग्लैमर दिया, जो पहले कम दिखता था। उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और गंगा पुत्र, दुल्हन बनू मैं तेरी, हिटलर जैसी फिल्मों से लोकप्रियता हासिल की।उनकी खासियत यह रही कि वे सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। बिग बॉस जैसे टीवी शो और वेब सीरीज़ में आकर उन्होंने अपने करियर को नई ऊंचाई दी। आज मोनालिसा भोजपुरी से अधिक हिंदी टीवी और ओटीटी पर सक्रिय हैं।

सीमा सिंह – आइटम क्वीन

भोजपुरी फिल्मों की बात हो और आइटम सॉन्ग का जिक्र न हो, यह संभव नहीं। सीमा सिंह ने हजारों गानों पर अपने नृत्य से दर्शकों का दिल जीता। हालांकि वे मुख्य नायिका नहीं रहीं, लेकिन उनकी लोकप्रियता किसी सुपरस्टार से कम नहीं। वे भोजपुरी के मनोरंजन का “मसालेदार” चेहरा बनीं।

पाखी हेगड़े – संजीदा अदाकारा

पाखी हेगड़े ने 2000 के दशक के मध्य में भोजपुरी में कदम रखा और लागल रहा ऐ राजा जी, गंगा जमुना सरस्वती, प्यार मोहब्बत ज़िंदगी जैसी फिल्मों से पहचान बनाई। वे गंभीर भूमिकाओं और भावनात्मक अभिनय के लिए जानी गईं।

अम्रपाली दुबे – यूट्यूब क्वीन और नई स्टार

2014 में निरहुआ हिंदुस्तानी के साथ भोजपुरी सिनेमा को मिली अम्रपाली दुबे। इस फिल्म ने न सिर्फ निरहुआ को बल्कि अम्रपाली को भी स्टार बना दिया। अम्रपाली ने बहुत जल्दी भोजपुरी में “नंबर वन” अभिनेत्री का दर्जा पा लिया। प्रमुख फिल्में: निरहुआ हिंदुस्तानी, पटना से पाकिस्तान, बम बम बोल रहा है काशी, लव और लग्न, निरहुआ रिक्शावाला 2। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके गाने यूट्यूब पर करोड़ों व्यूज पाते हैं। अम्रपाली को “यूट्यूब क्वीन” कहा जाता है और वे आज भोजपुरी की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्री हैं।

अक्षरा सिंह – अभिनय और विवादों की चकाचौंध

अक्षरा सिंह भोजपुरी की बहुमुखी अभिनेत्री हैं। सत्या और सिपाही जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से मजबूत पहचान बनाई।
प्रमुख फिल्में: सत्या, सिपाही, ट्रक ड्राइवर 2, दुल्हन चाही पाकिस्तान से। अक्षरा का करियर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने गायकी में भी खुद को साबित किया और कई हिट गाने दिए। हालांकि, उनके निजी जीवन और विवादों ने अक्सर उन्हें सुर्खियों में बनाए रखा। बावजूद इसके, वे आज की सबसे लोकप्रिय और चर्चित अभिनेत्रियों में से हैं।

काजल राघवानी – मासूमियत की डॉल

काजल राघवानी ने 2011 में भोजपुरी फिल्मों में कदम रखा और अपनी मासूम अदाओं व रोमांटिक अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्रमुख फिल्में: पटना से पाकिस्तान, महाभारत, लव के लिए कुछ भी करेगा, लागल रहा बताशा। उनकी पवन सिंह और खेसारी लाल यादव के साथ जोड़ी बेहद लोकप्रिय रही। वे नई पीढ़ी की सबसे ज्यादा डिमांड वाली अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।

अनजना सिंह – हॉट केक ऑफ भोजपुरी

2010 में डेब्यू करने वाली अनजना सिंह को “हॉट केक” कहा जाता है। उन्होंने सौ से अधिक फिल्मों में काम किया और लहू के दो रंग, त्रिदेव, हथकड़ी जैसी फिल्मों से लोकप्रियता हासिल की।

स्मृति सिन्हा – पारिवारिक छवि

स्मृति सिन्हा ने साजन चले ससुराल से भोजपुरी में पहचान बनाई। उनकी छवि परिवारिक और संजीदा भूमिकाओं के लिए जानी जाती है।

मौजूदा स्थिति

आज भोजपुरी सिनेमा में नायिकाओं की लोकप्रियता दो मोर्चों पर देखी जाती है—

1. बॉक्स ऑफिस की कमाई
2. सोशल मीडिया पर प्रभाव

रानी चटर्जी और मोनालिसा ने जहां शुरुआती दौर में इंडस्ट्री को मजबूत किया, वहीं आज अम्रपाली दुबे, अक्षरा सिंह और काजल राघवानी ने इस इंडस्ट्री की धुरी अपने कंधों पर उठा रखी है।

लेकिन यह भी सच है कि इंडस्ट्री पर लगातार अश्लीलता के आरोपों का असर नायिकाओं की छवि पर भी पड़ा है। पारिवारिक दर्शक कम होने के कारण अभिनेत्रियां ग्लैमर और मसाले में उलझकर रह गईं। हालांकि सोशल मीडिया और यूट्यूब ने उन्हें नई लोकप्रियता दी है।

सबसे सफल अभिनेत्री

अगर पूरे 2004–2025 के दौर को देखें तो

* रानी चटर्जी को शुरुआती दौर की “क्वीन” और सबसे सफल अभिनेत्री कहा जा सकता है।
* वहीं मौजूदा समय में अम्रपाली दुबे सबसे प्रभावशाली और सफल नायिका हैं। उनके नाम पर बॉक्स ऑफिस भी चलता है और यूट्यूब व्यूज भी।

भोजपुरी सिनेमा की नायिकाओं ने पिछले दो दशकों में संघर्ष, लोकप्रियता और आलोचना सब कुछ देखा है। 2004 में गांव की माटी से उठकर शुरू हुआ यह सफर आज ग्लैमर, यूट्यूब और सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। रानी चटर्जी से अम्रपाली दुबे तक और मोनालिसा से अक्षरा सिंह तक—हर अभिनेत्री ने भोजपुरी इंडस्ट्री को अपनी तरह से रंग दिया। लेकिन असली चुनौती अभी भी वही है—क्या भोजपुरी सिनेमा फिर से नदिया के पार और गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ाइबो जैसी पारिवारिक और भावनात्मक फिल्मों की ओर लौट पाएगा? अगर हाँ, तो ये नायिकाएं निश्चित ही उस बदलाव की अगुवाई करेंगी।

भोजपुरी अभिनेत्रियों की टाइमलाइन (2004–2025)

| वर्ष/दौर | प्रमुख अभिनेत्री | डेब्यू/पहचान | प्रमुख फिल्में | मौजूदा स्थिति |

| | 2004–2010 | रानी चटर्जी | ससुरा बड़ा पइसावाला (2004) से शुरुआत | ससुरा बड़ा पइसावाला, लागल रहा ऐ राजा जी, फुलवा, दिलजले | भोजपुरी की “क्वीन”, आज टीवी-रियलिटी शो और सोशल मीडिया पर सक्रिय |

| | मोनालिसा (अंतरा विश्वास) | जय श्रीराम, गंगा पुत्र | दुल्हन बनू मैं तेरी, हिटलर, प्रतिज्ञा | हिंदी टीवी व वेब सीरीज में सक्रिय |

| | पाखी हेगड़े | लागल रहा ऐ राजा जी | गंगा जमुना सरस्वती, प्यार मोहब्बत ज़िंदगी, दिल दिया है जान भी देंगे | अब फिल्मों में कम सक्रिय |

| | सीमा सिंह | आइटम सॉन्ग से पहचान | *राजा बाबू*, *लहू के दो रंग* (गाने) | भोजपुरी की “आइटम क्वीन” |

| |2010–2014 | अनजना सिंह | फौजी (2010) | लहू के दो रंग, त्रिदेव, हथकड़ी | “हॉट केक ऑफ भोजपुरी” के नाम से मशहूर |

| | स्मृति सिन्हा | साजन चले ससुराल | बैरी कंगना 2, साजन चले ससुराल | पारिवारिक छवि, सीमित फिल्में |

| | मोनालिसा | – | इस दौर में भी सक्रिय | ओटीटी और हिंदी टीवी पर ज्यादा फोकस |

| | 2014–2018 | अम्रपाली दुबे | निरहुआ हिंदुस्तानी (2014) | पटना से पाकिस्तान, बम बम बोल रहा है काशी, लव और लग्न, निरहुआ रिक्शावाला 2 | आज भोजपुरी की नंबर वन स्टार, “यूट्यूब क्वीन” |

| | अक्षरा सिंह | सत्या, सिपाही | दुल्हन चाही पाकिस्तान से, ट्रक ड्राइवर 2 | अभिनय व गायकी दोनों में सक्रिय, विवादों से भी सुर्खियों में |

| | काजल राघवानी | रिहाई (2011) | पटना से पाकिस्तान, महाभारत, लागल रहा बताशा | नई पीढ़ी की टॉप अभिनेत्रियों में |

|  | 2018–2022 | अम्रपाली दुबे | – | निरहुआ चलल लंदन, राजा बाबू, शेर सिंह | सोशल मीडिया पर सबसे बड़ी फैन फॉलोइंग |

| | अक्षरा सिंह | – | सत्या 2, बलम जी लव यू | गायकी और ओटीटी में सक्रिय |

| | काजल राघवानी | – | मुकद्दर, पटना से पाकिस्तान 2 | स्टार पावर बरकरार |

| | अनजना सिंह | – | दिलवाला, लव के लिए कुछ भी करेगा | लोकप्रियता में थोड़ी कमी |

| | 2023–2025 | अम्रपाली दुबे | – | जय भारत, लव विवाह डॉट कॉम, पटना से दुबई | भोजपुरी की नंबर वन अभिनेत्री |

| | अक्षरा सिंह | – | सत्या: द फाइनल, दिलवाले, लव स्टोरी | एक्टिंग व म्यूजिक एल्बम दोनों में सक्रिय |

| | काजल राघवानी | – | बोल बम 2, हमरा से बढ़ के का भुलाइलू | अभी भी व्यावसायिक फिल्मों में मांग |

| | रानी चटर्जी | – | लेडी सिंघम, नगीना 2 | सीमित लेकिन चर्चित भूमिकाएँ |

| | नई पीढ़ी | श्वेता महारा, तनुश्री, पूजा गिरी | विभिन्न म्यूजिक वीडियो व फिल्में | सोशल मीडिया से पहचान बना रही नई नायिकाएँ |

* 2004–2010: रानी चटर्जी और मोनालिसा का दबदबा।
* 2010–2014: अनजना सिंह और पाखी हेगड़े ने जगह बनाई।
* 2014–2018: अम्रपाली दुबे, अक्षरा सिंह और काजल राघवानी का स्टारडम।
* 2018–2025: अम्रपाली दुबे निर्विवाद नंबर वन, अक्षरा और काजल की मजबूत स्थिति, नई अभिनेत्रियों की एंट्री।

सबसे अधिक अश्लील फिल्म बनाने का आरोप किन भोजपुरी अभिनेत्रियों पर लगा?

मोनालिसा (अंतरा बिस्वास)

इन्हें “भोजपुरी आइटम क्वीन” भी कहा गया। उनकी कई फिल्मों और गानों में अश्लील डांस और डायलॉग्स को लेकर विवाद हुआ। “दामिनी”, “सौतन”, “बंधन मोहे प्यार के”, और दर्जनों बी-ग्रेड फिल्मों पर आरोप लगे कि इनसे इंडस्ट्री की छवि खराब हुई।

सीमा सिंह

मुख्य रूप से *आइटम गर्ल* के रूप में पहचान। उनके नृत्य और गानों पर कई बार अश्लीलता का आरोप लगा। इन्हें “भोजपुरी की मल्लिका शेरावत” कहा जाने लगा।

अंजना सिंह

2012 के बाद भोजपुरी सिनेमा में “हॉट एंड बोल्ड” इमेज के कारण लोकप्रियता पाई। कई फिल्मों और गानों में अश्लील बोल और दृश्य पर आरोप लगे।

पाखी हेगड़े

हालांकि इन्होंने गंभीर किरदार भी निभाए, लेकिन कई फिल्मों में बोल्ड सीन ने विवाद खड़ा किया।

कौन सी भोजपुरी फिल्म अश्लीलता के लिए बदनाम हुई?

सौतन (2006 – मोनालिसा) इस फिल्म पर सबसे ज़्यादा अश्लीलता का आरोप लगा। बोल्ड सीन और डायलॉग्स के कारण यह परिवारिक दर्शकों के लिए अनुपयुक्त मानी गई। दामिनी (2007 – मोनालिसा) मोनालिसा के हॉट सीन के कारण यह फिल्म भी विवादों में रही। लोहा पहलवान (2008 – पवन सिंह, मोनालिसा) गानों और सीन दोनों के कारण अश्लीलता की मिसाल बनी। त्रिदेव (2016 – पवन सिंह, अंजना सिंह) गानों और डांस सीन्स को लेकर अश्लील करार दिया गया।

भोजपुरी सिनेमा की “आइटम क्वीन संस्कृति”** ने इंडस्ट्री की छवि सबसे अधिक बिगाड़ी। खासकर मोनालिसा और सीमा सिंह पर अश्लीलता फैलाने के सबसे अधिक आरोप लगे। “सौतन” और “लोहा पहलवान” जैसी फिल्में दर्शकों की नजर में भोजपुरी सिनेमा को “बी-ग्रेड” के खांचे में डालने वाली साबित हुईं।

“भोजपुरी सिनेमा क्यों खो बैठा अपना सुनहरा दौर?”

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