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टिड्डी दल पर नियंत्रण के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत

तोमर ने कहा कि सरकार पूरी तरह से तैयार है, छिड़काव मशीनें, वाहन और कार्यबल की तैनाती बढ़ा दी गई है और केन्द्र सरकार टिड्डी नियंत्रण के लिए राज्य सरकार के साथ सामंजस्य में काम कर रही है

नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गौतम बुद्ध नगर, ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश स्थित एक हेलीपैड से स्प्रे  उपकरण से युक्त एक बेल हेलीकॉप्टर को हरी झंडी दिखाई। हेलीकॉप्टर उत्तरलाई, बाड़मेर स्थित वायु सेना स्टेशन के लिए रवाना होगा, जहां वह शुरुआती तौर पर तैनात रहेगा और वहां से बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर और नागौर के रेगिस्तानी इलाकों में टिड्डी नियंत्रण के लिए भेजा जाएगा। बेल 206-बी3 हेलीकॉप्टर एक ही पायलट से चलेगा, जिसमें एक बार में 250 लीटर कीटनाशक ले जाने की क्षमता है और एक बार में इसे 25 से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में उपयोग में लाया जा सकता है। एक अधिकार प्राप्त समिति ने डीजीसीए और नागर विमानन मंत्रालय से सभी स्वीकृतियां मिलने के बाद रेगिस्तानी इलाकों में हवाई छिड़काव के लिए एक हेलीकॉप्टर की तैनाती के लिए कंपनी का चयन किया गया था।

बाद में, मीडिया के साथ संवाद के दौरान  नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि 26 साल के लंबे अंतराल के बाद, बीते साल टिड्डी दल का हमला हुआ था। भारत सरकार और राज्य सरकारें इन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए मिलकर काम कर रही हैं। अनुमान था कि इस साल टिड्डी दल का संकट ज्यादा बड़ा होगा, लेकिन सरकार पूरी तरह तैयार है और सभी राज्य सरकारों को सतर्क कर दिया गया है और वे केन्द्र सरकार के साथ समन्वय में काम कर रही हैं। मशीनों, वाहनों और कार्यबल की तैनाती बढ़ा दी गई है और संबंधित राज्य संकट से निबटने के लिए एसडीआरएफ कोष का उपयोग कर रहे हैं। टिड्डी नियंत्रण में पहली बार ड्रोन का उपयोग किया गया है और आज हेलीकॉप्टर के उपयोग से कीटनाशकों के हवाई छिड़काव की शुरुआत भी कर दी गई है। उन्होंने ड्रोन और हेलीकॉप्टर की तैनाती में सक्षम बनाने के लिए नागर विमानन मंत्रालय के प्रति आभार प्रकट किया। श्री तोमर ने बताया कि यूके की एक कंपनी को 5 हवाई छिड़काव मशीनों का ऑर्डर जारी किया था और इनमें से एक मशीन मिल गई है। इन मशीनों को आईएएफ के हेलीकॉप्टरों में लगाया जाएगा और टिड्डी नियंत्रण के लिए काम में लाया जाएगा। इस अवसर पर केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी, सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री महेश शर्मा और कृषि सचिव श्री संजय अग्रवाल भी उपस्थित रहे।

ड्रोन, हेलीकॉप्टर और विमानों के माध्यम से टिड्डी नियंत्रण के लिए हवाई नियंत्रण क्षमताओं की जरूरत महसूस होने के बाद ही टिड्डी नियंत्रण के लिए हेलीकॉप्टर की तैनाती की गई है। कैबिनेट सचिव ने 27 मई, 2020 को टिड्डी दल की स्थिति की समीक्षा की और नागर विमानन मंत्रालय को ड्रोन, विमान/ हेलीकॉप्टर के माध्यम से कीटनाशकों के हवाई छिड़काव के लिए वस्तु एवं सेवाओं की खरीद को आसान बनाने में कृषि सहयोग एवं किसान कल्याण विभाग को सहयोग करने के निर्देश दिए। इसके बाद कीटनाशकों के हवाई छिड़काव से संबंधित वस्तु एवं सेवाओं की खरीद सुनश्चित करने के लिए अपर सचिव, कृषि की अध्यक्षता में एक अंतर मंत्रालयी अधिकार प्राप्त समिति की स्थापना की गई थी। इस समिति में एमओसीए, पवन हंस, डीजीसीए, एयर इंडिया और डीएसीएंडएफडब्ल्यू के अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हैं।

अधिकार प्राप्त समिति की सिफारिश पर डीएसीएंडएफडब्ल्यू ने ऊंचे पेड़ों और दुर्गम क्षेत्रों में बैठे टिड्डी दलों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से ड्रोन सेवाएं उपलब्ध कराने वाली पांच कंपनियों को जोड़ा है, जिसमें प्रति कंपनी 5 ड्रोन उपलब्ध कराएगी। अभी तक टिड्डी नियंत्रण के लिए जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर व नागौर में 12 ड्रोन तैनात किए गए हैं। इस प्रकार भारत प्रोटोकॉल्स को अंतिम रूप देकर टिड्डी नियंत्रण के लिए ड्रोन का उपयोग करने वाला दुनिया का पहला देश बन गया है। ड्रोन का उपयोग लंबे पेड़ों व दुर्गम क्षेत्रों के लिए खासा प्रभावी है। एक ड्रोन एक घंटे में 16-17 हेक्टेयर और 4 घंटे में 70 हेक्टेयर क्षेत्र कवर कर सकता है। एमओसीए ने टिड्डी रोधी अभियान में ड्रोन के लिए सशर्त छूट से संबंधित नियमों एवं शर्तों को लचीला किया गया था और टिड्डी रोधी परिचालनों के लिए 50 किलोग्राम तक के इंजन चालित ड्रोन के उपयोग तथा रात के समय में ड्रोन के उपयोग को अनुमति दी गई थी।

वर्तमान में वाहनों पर लगे छिड़काव उपकरणों के साथ 60 नियंत्रण दलों के माध्यम से टिड्डी नियंत्रण की रणनीति है और 200 से ज्यादा केन्द्रीय कर्मचारी राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और बिहार राज्यों में ऐसे परिचालनों में लगे हुए हैं। भारत सरकार का टिड्डी चेतावनी संगठन (एलडब्ल्यूओ) और 10 टिड्डी मंडलीय कार्यालय राजस्थान (जैसलमेर, बीकानेर, फलोदी, बाड़मेर, जालौर, चुरु, नागौर, सूरतगढ़) और गुजरात ( पालनपुर और भुज) में स्थित हैं, जो प्रमुख रूप से राजस्थान और गुजरात के दो लाख वर्ग किलोमीटर अनुसूचित रेगिस्तानी क्षेत्र में प्रमुख रूप से रेगिस्तानी टिड्डी की निगरानी, सर्वेक्षण और नियंत्रण करते हैं। अनुसूचित रेगिस्तानी क्षेत्रों के अलावा टिड्डी के प्रभावी नियंत्रण के लिए राजस्तान में जयपुर, अजमेर में, मध्य प्रदेश में शिवपुर, पंजाब में फजिल्का और उत्तर प्रदेश के झांसी में एलसीओ के अस्थायी नियंत्रण शिविर स्थापित किए गए हैं।

राज्य सरकारें ट्रैक्टर पर लगे स्प्रेयर और फायर टेंडर वाहनों की तैनाती से नियंत्रण का काम करती हैं। 11 अप्रैल, 2020 से 28 जून, 2020 के बीच राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, हरियाणा और बिहार में 2,33,487 हेक्टेयर क्षेत्र में नियंत्रण परिचालन किया गया है। गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, बिहार और हरियाणा राज्यों में इससे कोई खास नुकसान दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि राजस्थान के कुछ जिलों में फसलों को मामूली नुकसान सामने आया है।

खाद्य एवं कृषि संगठन के 27.06.2020 के लोकस्ट (टिड्डी) स्टेटस अपडेट के तहत, उत्तरी सोमालिया में जमा झुंडों के भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे ग्रीष्मकालीन प्रजनन क्षेत्रों के लिए हिंद महासागर का रुख करने का अनुमान है। पाकिस्तान के सिंध में झुंड अंडे देने की शुरुआत कर चुके हैं और वर्तमान में झुंड सिंधु घाटी में मौजूद हैं। दक्षिण पश्चिम एशियाई देशों (अफगानिस्तान, भारत, ईरान और पाकिस्तान) के तकनीक अधिकारियों की आभासी बैठकें साप्ताहिक आधार पर हुई हैं। इस साल अभी तक एसडब्ल्यूएसी-टीओसी की 15 बैठक हो चुकी हैं। क्षेत्र में टिड्डी नियंत्रण से संबंधित तकनीक जानकारियां साझा की जा रही हैं।

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