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नई आबकारी नीति से फिरोजाबाद के कांच कारोबार को लग रहे पंख

5 लाख से अधिक बोतलों की प्रतिदिन शराब कंपनियों को हो रही आपूर्ति

फिरोजाबाद । कांच नगरी से प्रसिद्ध फिरोजाबाद जनपद के कांच कारोबार को नई आबकारी नीति से पंख लगेंगे। इस नीति के तहत जिले के कांच कारखानों में शराब की बोतलें बनना शुरू हो गई हैं। शहर से प्रतिदिन लगभग 5 लाख से अधिक बोतलों की शराब कंपनियों को आपूर्ति हो रही है।

प्रदेश में 2 साल पहले तक देसी शराब की बिक्री प्लास्टिक की बोतल में होती थी। इसके बाद असेप्टिक ब्रिक पैक (टेट्रा पैक) में इसकी बिक्री शुरू हुई। इसमें देसी शराब को कागज, प्लास्टिक और एल्यूमीनियम फ्वाइल से तैयार पैकिंग में बेचा जाता है। प्रदेश सरकार की पहल के बाद अब ट्रेटा पैक की विदाई हो गई है।

वित्तीय वर्ष 2022-23 के लिए लागू नई आबकारी नीति में देसी शराब की बिक्री सिर्फ कांच की बोतलों में ही करने का प्रावधान किया है। इससे कांच उद्योग को पंख लगेंगे। शहर के ऑटोमैटिक प्लांट पर देशी शराब की बोतलें बन रही हैं। कांच उत्पादन के साथ ही शराब कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 5 लाख से अधिक बोतलों की आपूर्ति हो रही है।

इन कंपनियों की बन रही बोतलें

रेडिको खेतान, इंडिया ग्लाइकोल, उन्नाव डिस्टलरी, वेब डिस्टलरी, रायल स्टैग, इंपीरियल ब्लू, ब्लैंडर स्प्राइड, रायल स्टैग, बेग पाइपर, रेड नाइट, पीटर स्काच, एरिटोक्रेट, बीयर मेक डबल नंबर वन, किंग फिशर सहित अन्य कंपनियों को कांच की बोतलें बन रही हैं।

इन कारखानों में बनती हैं बोतलें

सीताराम ग्लास वर्क्स, पूजा ग्लास वर्क्स, एडवांस ग्लास, मित्तल सिरेमिक, गीता ग्लास वर्क्स, नवीन ग्लास वर्क्स, मीरा ग्लास वर्क्स, एसआर ग्लास, जीएम ग्लास, आनंद ग्लास सहित डेढ़ दर्जन से अधिक कारखानों में कांच की बोतल तैयार हो रही हैं।

यूपीजीएमएस अध्यक्ष राजकुमार मित्तल का कहना है, प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति से फिरोजाबाद के कांच उद्योग को कोरोना की मार से बचाने में काफी मदद मिली है। शराब कंपनियों को प्रतिदिन 5 लाख से अधिक बोतलों की आपूर्ति की जा रही है।

प्रमुख उद्यमी मुकेश बंसल टोनी का कहना है, देसी शराब की बिक्री कांच की बोतल में होने से जिले की अर्थव्यवस्था में काफी सुधर आएगा। इससे शराब कंपनियों को भी फायदा होगा और सरकार को भी अधिक राजस्व मिलेगा।(हि.स.)

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