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95 साल बाद साउथ ब्लॉक से विदाई, अब ‘सेवातीर्थ’ से चलेगा देश का शासन

करीब 95 वर्षों तक देश के शासन का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से प्रधानमंत्री कार्यालय को नए परिसर ‘सेवातीर्थ’ में स्थानांतरित कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2026 को इस नए कार्यालय को राष्ट्र को समर्पित किया। यह बदलाव औपनिवेशिक विरासत से आधुनिक और विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को अब राष्ट्रीय संग्रहालय के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे देश के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित किया जा सके।

  • ऐतिहासिक बदलाव: साउथ ब्लॉक से ‘सेवातीर्थ’ पहुंचा प्रधानमंत्री कार्यालय, नए युग की शुरुआत

नई दिल्ली : भारत के प्रशासनिक इतिहास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक साउथ ब्लॉक में आयोजित हुई और इसके साथ ही प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को नए परिसर ‘सेवातीर्थ’ में स्थानांतरित कर दिया गया। लगभग 95 वर्षों तक देश के शासन और नीति निर्माण का केंद्र रहे साउथ ब्लॉक से सरकार का यह स्थानांतरण केवल कार्यालय बदलने का निर्णय नहीं, बल्कि औपनिवेशिक विरासत से आधुनिक और विकसित भारत की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जा रहा है।

औपनिवेशिक काल से आधुनिक भारत तक का सफर

साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण ब्रिटिश शासन के दौरान किया गया था। इन भवनों का उद्देश्य औपनिवेशिक प्रशासन को संचालित करना था। स्वतंत्रता के बाद 1947 से लेकर अब तक प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से ही कार्य करता रहा। इन भवनों ने स्वतंत्र भारत के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में अनेक ऐतिहासिक निर्णयों को साकार होते देखा। पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक, देश की नीतियों और दिशा को तय करने वाले कई महत्वपूर्ण फैसले यहीं से लिए गए।

साउथ ब्लॉक: ऐतिहासिक फैसलों का साक्षी

साउथ ब्लॉक ने भारत के इतिहास के कई महत्वपूर्ण क्षणों को देखा है। विभाजन की त्रासदी, युद्ध, आपातकाल, आर्थिक सुधार और तकनीकी परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण दौर इसी भवन से संचालित हुए। यहीं से डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत अभियान, जीएसटी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), तीन तलाक कानून और अनुच्छेद 370 हटाने जैसे ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे महत्वपूर्ण फैसले भी इसी परिसर में लिए गए।

‘सेवातीर्थ’: आधुनिक और भविष्य उन्मुख प्रशासनिक केंद्र

प्रधानमंत्री कार्यालय का नया परिसर ‘सेवातीर्थ’ आधुनिक तकनीक, बेहतर कार्यक्षमता और पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं से सुसज्जित है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा कार्य वातावरण तैयार करना है, जो प्रशासनिक दक्षता को बढ़ाए और ‘सेवा भाव’ की संस्कृति को मजबूत करे। यह बदलाव ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ की अवधारणा को और प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

नॉर्थ और साउथ ब्लॉक बनेंगे राष्ट्रीय संग्रहालय

सरकार ने निर्णय लिया है कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यह संग्रहालय भारत की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक विरासत, स्वतंत्रता संग्राम और आधुनिक भारत के विकास की कहानी को प्रदर्शित करेगा। इससे आने वाली पीढ़ियों को देश के गौरवशाली इतिहास और प्रशासनिक विकास को समझने का अवसर मिलेगा।

विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

सरकार ने इस स्थानांतरण को विकसित भारत के संकल्प से जोड़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रशासनिक ढांचे को आधुनिक और कुशल बनाने के प्रयासों का यह हिस्सा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की प्रशासनिक प्रणाली को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा और देश को एक वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करने में सहायक होगा।

प्रतीकात्मक और ऐतिहासिक महत्व

साउथ ब्लॉक से सेवातीर्थ तक का यह सफर भारत के औपनिवेशिक अतीत से आधुनिक और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ने का प्रतीक है।यह बदलाव केवल भवन परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन की सोच में बदलाव का संकेत है—जहां सत्ता के बजाय सेवा को प्राथमिकता दी जा रही है।

इस ऐतिहासिक निर्णय के साथ भारत ने प्रशासनिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है, जो आने वाले वर्षों में विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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