Politics

सपा का हर कार्यकाल रहजनों की रहनुमाई का दस्तावेज :गिरीश यादव

आतंकियों के आका, माफियाओं के अब्बा का कानून-व्यवस्था से क्या सरोकार ,जिनके कार्यकाल की पहचान ही अराजकता हो वह इसकी चर्चा लायक भी नहीं ,अखिलेश ने बार-बार किया है मुलायम-शिवपाल का अपमान, भूला नहीं है यदुवंश समाज

लखनऊ : कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाने वाले अगर इसकी बात करें तो इससे बड़ा मजाक कोई और हो ही नहीं सकता। खासकर जब यह बात सपा के लोग करें। यह तो वही वाली बात हुई, “खुद मियां फजीहत औरों को नसीहत”। यह बातें प्रदेश सरकार के आवास एवं शहरी नियोजन राज्य मंत्री गिरीश यादव ने बुधवार को जारी एक बयान में कहीं। उन्होंने कहा कि सपा ने अपने हर कार्यकाल में कानून-व्यवस्था की नई परिभाषा ही रच दी। उनके लिए “अराजकता” ही कानून था। कानून-व्यवस्था की खुलेआम धज्जियां उड़ाने वाले गरीबों की संपत्ति लूटकर अपनी हवेलियां खड़ी करने वाले अतीक अहमद और मुख्तार अहमद जैसे दुर्दांत माफिया ही उनके समय मे सबसे बड़े कानून रखवाले हुआ करते थे।

श्री यादव ने कहा कि अब जब अवैध तरीके से बनाई गई माफियाओं की हवेलियों को योगी आदित्यनाथ की सरकार में बुलडोजर से जमींदोज करवाया जा रहा है। इनकी अरबों की चल-अचल संपत्तियां जब्त/कुर्क की जा रही हैं तो इनको खाद-पानी देने वालों के दिल में दर्द हो रहा है। होगा भी क्योंकि इनके लिए तो रहजन ही रहबर थे। ऐसे कई उदाहरण हैं जब सपा ने ऐसे रहजनों की रहनुमाई की। अखिलेश यादव और उनकी पार्टी के झंडाबरदारों को भले यह याद न हो पर जनता को ठीक से याद है।

आपकी सरकार तो माफियाओं पर कार्यवाई करने की बजाय उन अफसरों को ही सजा देती थी जो माफियाओं पर करवाई करते थे। आईएएस अधिकारी दुर्गा नागपाल इसका उदाहरण हैं। हद तो तब हो गई जब अपने मिठास के लिए देश-दुनिया में मशहूर मुजफ्फरनगर सरकार प्रायोजित दंगों की आग जल रहा था तो नीरो की तरह अखिलेश सैफई के जश्न में मशगूल थे। यह सपा के राष्ट्रघाती तुष्टीकरण के सबसे बड़े उदाहरणों में से एक है।

मथुरा का जवाहर बाग कांड तो एक तरीके से सपा द्वारा ही प्रयोजित था। इसमें दो पुलिस अधिकारियों सहित 29 लोगों की जान गई थी। इसका मुख्य आरोपी रामवृक्ष यादव किसका करीबी था? सबको पता है। सरकार की नॉक के नीचे लखनऊ में व्यापारी श्रवण साहू हत्याकांड के जांच की आंच तो सरकार तक पहुँची थी। शाहजहांपुर के पत्रकार जगेंद्र सिंह को सरकार की आलोचना के लिए जिंदा जलाने से शर्मनाक क्या हो सकता है?

श्री यादव ने कहा कि तुष्टिकरण की राष्ट्रघाती राजनीति के लिए आपकी (अखिलेश यादव) पार्टी तो निर्दोषों का खून बहाने वाले आतंकियों तक की आका बन गई। 2005 में वाराणसी में आतंकियों ने बम धमाके के किए थे। इनमें 25 निर्दोष लोगों की जान गई थी। वलीउल्लाह और शमीम इसके आरोपी थे। इनके मुकदमे वापस लेने के लिए आपकी सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस समय माननीय जजों ने याचिका खारिज करते हुए बेहद तल्ख टिप्पणी की थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि ,”आज आप उनके खिलाफ मुकदमें वापस ले रहे हैं। कल क्या उनको पद्मविभूषण से भी नवाजेंगे।’

राज्यमंत्री श्री यादव ने अखिलेश यादव पर यदुवंश समाज को अपमानित करने व निजी लाभ के लिए बरगलाने का भी आरोप लगाया। कहा कि अपने निहित स्वार्थ के आगे उन्हें किसी की सुध नहीं है। यही वहज है कि राष्ट्रीय अधिवेशन से लेकर बार-बार उन्होंने सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव और पार्टी को खड़ा करने में बड़ी भूमिका निभाने वाले शिवपाल सिंह यादव को अपमानित किया है। इस अपमान को यदुवंश समाज भूला नहीं है और वह अखिलेश को सबक सिखाकर रहेगा।

Tags

Related Articles

Back to top button
Close