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वित्त वर्ष 2020-25 के दौरान 111 लाख करोड़ रुपये के कुल अवसंरचना निवेश का अनुमान

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर गठित कार्यदल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को अपनी अंतिम रिपोर्ट पेश की ,‘एनआईपी’ का उद्देश्‍य देश भर में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचागत सुविधाएं प्रदान करना और सभी नागरिकों का जीवन स्‍तर बेहतर करना है

नई दिल्ली । राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (एनआईपी) पर गठित कार्यदल ने आज यहां केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण को वित्त वर्ष 2019-25 के लिए एनआईपी पर अपनी अंतिम रिपोर्टपेश की। वित्त वर्ष 2019-2025 के लिए राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन पर गठित कार्यदल की सारांश रिपोर्ट वित्त मंत्री द्वारा 31 दिसंबर, 2019 को पहले ही जारी की जा चुकी है।

केंद्रीय वित्त मंत्री  निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण 2019-20 में घोषणा की थी कि अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचे यानी अवसंरचना पर 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। प्रधानमंत्री  नरेन्‍द्र मोदी ने वर्ष 2019 के अपने स्‍वतंत्रता दिवस भाषण में इस बात पर प्रकाश डाला था, आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास करने हेतु इस अवधि के लिए 100 लाख करोड़ रुपये की राशि रखी गई है जो लोगों का जीवन स्तर बेहतर करने के अलावा नए रोजगार अवसरों का सृजन करेगी।

‘एनआईपी’ पूरी तरह से सरकार की ओर से अपनी तरह की पहली कवायद है जिसका उद्देश्‍य देश भर में विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचागत सुविधाएं प्रदान करना और सभी नागरिकों का जीवन स्‍तर बेहतर करना है। इसका उद्देश्य परियोजना तैयार करने की व्‍यवस्‍था को बेहतर बनाना एवं बुनियादी ढांचागत क्षेत्र में निवेश (घरेलू और विदेशी दोनों) को आकर्षित करना है,  और यह वित्त वर्ष 2025 तक भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अत्‍यंत महत्वपूर्ण होगी। एनआईपी को विभिन्न हितधारकों द्वारा प्रदान की गई जानकारियों को संयोजित करके सर्वोत्तम प्रयास के आधार पर बनाया गया है। इन हितधारकों में संबंधित मंत्रालय, विभाग, राज्य सरकारें और बुनियादी ढांचागत सेक्‍टर के उन उप-सेक्‍टरों के निजी क्षेत्र शामिल हैं जिन्‍हें अवसंरचना की समन्वित मूल सूची (मास्‍टर लिस्‍ट) में चिन्हित किया गया है। एनआईपी तैयार करने के लिए ‘बॉटम-अप दृष्टिकोण’ को अपनाया गया था जिसके तहत प्रति प्रोजेक्ट 100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली सभी परियोजनाओं (ग्रीनफील्ड या नई अथवा ब्राउनफील्ड या मौजूदा, कार्यान्वयन जारी या फि‍लहाल परिकल्‍पना के स्‍तर पर) पर गौर किया गया।

एनआईपी कार्यदल की अंतिम रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2020-25 की अवधि के दौरान 111 लाख करोड़ रुपये के कुल अवसंरचना निवेश का अनुमान लगाया गया है। एनआईपी पर कार्यदल की सारांश रिपोर्ट जारी होने के बाद से लेकर अब तक केंद्रीय मंत्रालयों/राज्य सरकारों द्वारा प्रदान किए गए अतिरिक्त/संशोधित आंकड़ों को ध्‍यान में रखते हुए ही इस बढ़े हुए अवसंरचना निवेश का अनुमान लगाया गया है।

111 लाख करोड़ रुपये के कुल अपेक्षित पूंजीगत व्यय में से 44 लाख करोड़ रुपये (एनआईपी का 40%) की लागत वाली परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं, 33 लाख करोड़ रुपये (30%) की लागत वाली परियोजनाएं अभी परिकल्‍पना के स्तर पर हैं और 22 लाख करोड़ रुपये (20%) की लागत वाली परियोजनाएं अभी विकास के चरण में हैं। उधर, 11 लाख करोड़ रुपये (10%) की लागत वाली परियोजनाओं के लिए परियोजना चरण की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। विभिन्‍न सेक्‍टरों जैसे कि ऊर्जा (24%), सड़कें (18%), शहरी (17%) और रेलवे (12%) का हिस्‍सा भारत में कुल अनुमानित अवसंरचना निवेश में लगभग 71% है। भारत में एनआईपी को कार्यान्वित करने में केंद्र (39%) एवं राज्यों (40%) की लगभग समान हिस्सेदारी है और इसके बाद निजी क्षेत्र (21%) की हिस्‍सेदारी है।

अंतिम रिपोर्ट में बुनियादी ढांचे के सभी सेक्‍टरों में भारत के साथ-साथ पूरी दुनिया में अवसंरचना संबंधी हालिया रुझानों की पहचान की गई है और उन पर प्रकाश डाला गया है। इसमें सेक्‍टर-वार प्रगति, कमी और चुनौतियों के बारे में भी बताया गया है। मौजूदा सेक्‍टर-वार नीतियों को अपडेट करने के अलावा  अंतिम रिपोर्ट में सुधारों के एक समूह की पहचान की गई है और उन पर प्रकाश डाला गया है, ताकि पूरे देश में विभिन्न सेक्‍टरों में बुनियादी ढांचागत निवेश को बढ़ाया जा सके। रिपोर्ट में एनआईपी के वित्तपोषण के तरीके और साधन भी सुझाए गए हैं जिनमें नगरपालिका बॉन्‍डों के बाजार सहित कॉरपोरेट बॉन्ड के बाजारों को मजबूत करना, बुनियादी ढांचागत क्षेत्र के लिए विकास वित्तीय संस्थान स्थापित करना, बुनियादी ढांचागत परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण में तेजी लाना, भूमि मुद्रीकरण, इत्‍यादि शामिल हैं।

कार्यदल ने सिफारिश की है कि निम्‍नलिखित तीन समितियां स्‍थापित की जाएं:

  1. एनआईपी की प्रगति की निगरानी करने और देरी समाप्त करने के लिए एक समिति;
  2. कार्यान्वयन में सहयोग करने के लिए प्रत्येक अवसंरचना मंत्रालय स्तर पर एक संचालन समिति; और
  3. एनआईपी हेतु वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए डीईए में एक संचालन समिति।

वैसे तो बुनियादी निगरानी का अधिकार मंत्रालय और परियोजना एजेंसी के पास होगा, लेकिन लागू किए जाने वाले सुधारों और रुकी हुई परियोजनाओं के मुद्दों से निपटने के लिए उच्च स्तर की निगरानी की आवश्यकता है। गवर्नेंस बढ़ाने संबंधी अनुशंसित संरचना सहित निगरानी और आकलन की रूपरेखा के मूल तत्वों का उललेख एनआईपी रिपोर्ट के खंड-I में किया गया है।

एनआईपी परियोजना के डेटाबेस को शीघ्र ही इंडिया इन्‍वेस्‍टमेंट ग्रिड (आईआईजी) पर उपलब्‍ध कराया जाएगा, ताकि एनआईपी को दृश्यता प्रदान की जा सके और उन भावी घरेलू एवं विदेशी निवेशकों के जरिए इसके वित्तपोषण में मदद मिल सके, जो परियोजना स्तर की अद्यतन जानकारियों तक पहुंचने में सक्षम हैं। प्रत्येक संबंधित मंत्रालय/राज्य कुछ और नई परियोजनाओं को जोड़ेंगे एवं पूर्व-निर्धारित समय अंतराल पर अपने संबंधित परियोजना विवरण को अपडेट करेंगे, ताकि भावी निवेशकों को अद्यतन डेटा उपलब्ध हो सके।

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