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अमृत महोत्सव से जोश, जुनून से जुड़ रहा है पूरा देश – मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आजादी की 75 वीं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह से पहले देशभर में चल रहे अमृत महोत्सव कार्यक्रम से पूरा देश जुड़ रहा है और हर देशवासी के लिए यह महोत्सव प्रेरणा का स्रोत बन रहा है।श्री मोदी ने रविवार को रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ,,’मन की बात’ में रविवार को कहा कि अमृत महोत्सव पूरे देश में आयोजित हो रहा है और इसमें सभी लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और देश का हर नागरिक इस महोत्सव से जुड़कर भारत को आगे ले जाने के लिए काम कर रहा है।उन्होंने सीतापुर के ओजस्वी का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनको अमृत महोत्सव से जुड़ी चर्चाएँ खूब पसंद आ रही हैं। वह दोस्तों के साथ ‘मन की बात’ सुनते हैं और स्वाधीनता संग्राम के बारे में जानने और सीखने का प्रयास करते हैं।

अमृत महोत्सव को प्रेरणादायक बताते हुए उन्होंने कहा कि देश-भर में आम लोग, सरकारें, पंचायत से लेकर संसद तक इस महोत्सव की गूँज है और लगातार इस महोत्सव से जुड़े कार्यक्रमों का सिलसिला चल रहा है।प्रधानमंत्री ने इस सम्बन्ध में दिल्ली में हुए एक वाकये का जिक्र करते हुए कहा “आजादी की कहानी-बच्चों की जुबानी’ कार्यक्रम में बच्चों ने स्वाधीनता संग्राम से जुड़ी गाथाओं को पूरे मनोभाव से प्रस्तुत किया। इसमें भारत के साथ ही नेपाल, मॉरिशस, तंजानिया, न्यूजीलैंड और फिजी के छात्र भी शामिल हुए। देश का महारत्न ओ एन जी सी भी कुछ अलग तरीके से अमृत महोत्सव मना रहा है। अपने ऑयल फील्ड में इन दिनों वह छात्रों के लिए स्टडी टूर का आयोजन कर रहा है। इनमें युवाओं को ओएनजीसी के ऑयल फील्ड ऑपरेशन की जानकारी दी जा रही है – उद्धेश्य यह कि हमारे उभरते इंजीनियर राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में पूरे जोश और जुनून के साथ हाथ बंटा सकें।

भारत में हर 10 दिन में एक यूनिकॉर्न: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत में आज हर 10 दिन में एक नया यूनिकार्ड स्टार्टअप खड़ा हो रहा है, भारत स्टार्टअप क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व कर रहा है और भारतीय स्टार्टअप कंपनियां वैश्विक समाधान वैश्विक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत कर रही हैं।श्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो संबोधन ‘मन की बात’ में देशवासियों से बातचीत करते हुए कहा, भारत की विकास गाथा का यह नया मोड़ है। पहले युवकों को नौकरी के लिए प्रेरित किया जाता था और आज अपना रोजगार शुरू करने वालों को सराहना और प्रोत्साहन मिल रहा है। मोदी ने कहा कि उनकी पहली सरकार आने के समय देश में 9-10 यूनिकॉर्न हुआ करते थे।

यूनीकार्न ऐसे स्टार्टअप कंपनी को कहा जाता है जिन का मूल्यांकन एक अरब डॉलर या 7000 करोड़ रुपए से कुछ ज्यादा होता है।उन्होंने कहा कि भारत यूनिकॉर्न के क्षेत्र में आज दुनिया में तेज उड़ान भर रहा है और एक रिपोर्ट के अनुसार देश में इस समय 70 से अधिक स्टार्टअप यूनिकॉर्न की श्रेणी में आ गए हैं। दुनिया का ध्यान इस ओर गया है। यूनिकॉर्न के क्षेत्र में भारत निवेश को आकर्षित कर रहा है भारतीय युवा वैश्विक समाज समस्याओं के समाधान में योगदान कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि यूनिकॉर्न के क्षेत्र में भारत विश्व का नेतृत्व कर रहा है। आज चारों तरफ स्टार्टअप की चर्चा है ।अब छोटे छोटे शहरों में भी स्टार्टअप कंपनियां खड़ी हो रही हैं। पहले जब कोई युवा अपना काम शुरू करने की बात करता था तो बड़े बुजुर्ग उसे नौकरी की सलाह देते थे और कहते थे कि नौकरी में आराम है, पैसा है। लेकिन आज अपना काम शुरू करने वालों को उनके परिवार और समाज से प्रोत्साहन मिलता है और सहायता मिलती है।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने मयूर नाम के एक युवा उद्यमी से बातचीत की जिसने पढ़ते हुए अपनी मोटरसाइकिल का माइलेज बढ़ाने और और वाहन प्रदूषण कम करने की प्रौद्योगिकी के विकास पर काम किया। आज वह अपने साथियों के साथ प्रौद्योगिकी का विकास कर चुका है। मयूर ने प्रधानमंत्री को बताया कि उसने अपने चार साथियों के साथ मिलकर जो फिल्टर प्रौद्योगिकी विकसित की है उससे मोटरसाइकिल का एवरेज 25 किलोमीटर प्रति लीटर से बढ़कर 39 किलोमीटर प्रति लीटर तक पहुंच गया और कार्बन उत्सर्जन में 40 प्रतिशत की कमी आई है। इस प्रौद्योगिकी का प्रयोग उसने सरकारी बसों में किया है।राजेश ने प्रधानमंत्री के सवालों के जवाब में कहा कि बसों में उत्सर्जन में 35 से 40 प्रतिशत की कमी देखी गई है और ईंधन में भी 10 प्रतिशत की बचत हुई है। उसने इस प्रौद्योगिकी का पेटेंट कराने के लिए आवेदन कर रखा है और उसे उम्मीद है कि पेटेंट जल्दी मिल जाएगा उद्यमी ने बताया कि उसे नीति आयोग की अटल इंडिया चैलेंज योजना के तहत ग्रांड प्राप्त हुई है।प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में स्टार्टअप का वातावरण बना है और युवा नौकरी खोजने की वजह नौकरी देने वाले बन रहे हैं। भारत में आर्थिक वृद्धि की कहानी आज एक निर्णायक मोड़ ले रही है। इससे दुनिया में भारत का प्रभाव बढ़ा है।

प्रकृति का संरक्षण ज़रूरी : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राकृतिक संसाधनों को बचाने और उन्हें फिर से उनके असली रूप लौटाने की अपील करते हुए कहा कि इसी में हम सबका हित है, जग का हित है।श्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में आज कहा कि हमारे देश में अनेक राज्य हैं, अनेक क्षेत्र है जहाँ के लोगों ने अपनी प्राकृतिक विरासत के रंगों को सँजोकर रखा है। इन लोगों ने प्रकृति के साथ मिलकर रहने की जीवनशैली आज भी जीवित रखी है। ये हम सबके लिए भी प्रेरणा है। हमारे आस-पास जो भी प्राकृतिक संसाधन है, हम उन्हें बचाएं, उन्हें फिर से उनका असली रूप लौटाएँ। इसी में हम सबका हित है, जग का हित है।उन्होंने कहा कि वीरता केवल युद्ध के मैदान में ही दिखाई जाए, ऐसा जरूरी नहीं होता। वीरता जब एक व्रत बन जाती है और उसका विस्तार होता है तो हर क्षेत्र में अनेकों कार्य सिद्ध होने लगते हैं। मुझे ऐसी ही वीरता के बारे में श्रीमती ज्योत्सना ने चिट्ठी लिखकर बताया है।

जालौन में एक पारंपरिक नदी थी – नून नदी। नून, यहाँ के किसानों के लिए पानी का प्रमुख स्त्रोत हुआ करती थी, लेकिन, धीरे-धीरे नून नदी लुप्त होने की कगार पर पहुँच गई, जो थोड़ा बहुत अस्तित्व इस नदी का बचा था, उसमें वो नाले में तब्दील हो रही थी, इससे किसानों के लिए सिंचाई का भी संकट खड़ा हो गया था। जालौन के लोगों ने इस स्थिति को बदलने का बीड़ा उठाया। इसी साल मार्च में इसके लिए एक कमेटी बनाई गई। हजारों ग्रामीण और स्थानीय लोग स्वतः स्फूर्त इस अभियान से जुड़े। यहाँ की पंचायतों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर काम करना शुरू किया, और आज इतने कम समय में, और बहुत कम लागत में, ये नदी, फिर से जीवित हो गई है। कितने ही किसानों को इसका फायदा हो रहा है। युद्ध के मैदान से अलग वीरता का ये उदाहरण, हमारे देशवासियों की, संकल्प शक्ति को दिखाता है, और ये भी बताता है कि अगर हम ठान लें, तो, कुछ भी असंभव नहीं है और तब ही तो मैं कहता हूँ – सबका प्रयास।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब हम प्रकृति का संरक्षण करते हैं तो बदले में प्रकृति हमें भी संरक्षण और सुरक्षा देती है। इस बात को हम अपने निजी जीवन में भी अनुभव करते हैं और ऐसा ही एक उदाहरण तमिलनाडु के लोगों ने व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया है। ये उदाहरण है तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले का। हम जानते हैं कि तटीय इलाकों में कई बार ज़मीन के डूबने का खतरा रहता है। तूतुकुड़ी में भी कई छोटे द्वीप और टापू ऐसे थे जिनके समुद्र में डूबने का खतरा बढ़ रहा था। यहाँ के लोगों ने और विशेषज्ञों ने इस प्राकृतिक आपदा का बचाव प्रकृति के जरिये ही खोजा। ये लोग अब इन टापुओं पर पाल्मेरा के पेड़ लगा रहे हैं। ये पेड़ तूफानों में भी खड़े रहते है और जमीन को सुरक्षा देते हैं। इनसे अब इस इलाके को बचाने का एक नया भरोसा जगा है।उन्होंने कहा कि प्रकृति से हमारे लिये खतरा तभी पैदा होता है जब हम उसके संतुलन को बिगाड़ते हैं या उसकी पवित्रता नष्ट करते हैं। प्रकृति माँ की तरह हमारा पालन भी करती है और हमारी दुनिया में नए-नए रंग भी भरती है।

देशवासियों ने जनजातीय गौरव सप्ताह मनाया : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आजादी में अपने जनजातीय समुदाय के योगदान को देखते हुए देश ने जनजातीय गौरव सप्ताह मनाया है।श्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में आज कहा कि आजादी में अपने जनजातीय समुदाय के योगदान को देखते हुए देश ने जनजातीय गौरव सप्ताह भी मनाया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इससे जुड़े कार्यक्रम भी हुए। अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में जारवा और ओंगे, ऐसे जनजातीय समुदायों के लोगों ने अपनी संस्कृति का जीवंत प्रदर्शन किया।उन्होंने कहा कि एक कमाल का काम हिमाचल प्रदेश में ऊना के मिनीयेचर रायटर राम कुमार जोशी जी ने भी किया है, उन्होनें, पोस्टेज स्टाम्प पर ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के अनोखे स्केच बनाए हैं। हिन्दी में लिखे ‘राम’ शब्द पर उन्होंने स्केच तैयार किए, जिसमें संक्षेप में दोनों महापुरुषों की जीवनी को भी उकेरा गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश के कटनी से भी कुछ साथियों ने एक यादगार दास्तानगोई कार्यक्रम की जानकारी दी है। इसमें रानी दुर्गावती के अदम्य साहस और बलिदान की यादें ताजा की गई हैं। ऐसा ही एक कार्यक्रम काशी में हुआ। गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीर, संत रैदास, भारतेन्दु हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद और जयशंकर प्रसाद जैसी महान विभूतियों के सम्मान में तीन दिनों के महोत्सव का आयोजन किया गया। अलग-अलग कालखंड में, इन सभी की, देश की जन-जागृति में, बहुत बड़ी भूमिका रही है। आपको ध्यान होगा, ‘मन की बात’ के पिछले एपीसोड के दौरान मैंने तीन प्रतियोगिताओं का उल्लेख किया था – एक देशभक्ति के गीत लिखना, देश भक्ति से जुड़ी, आजादी के आंदोलन से जुड़ी घटनाओं की रंगोली बनाना और हमारे बच्चों के मन में भव्य भारत के सपने जगाने वाली लोरी लिखी जाए। मुझे आशा है कि इन प्रतियोगिताओं के लिए भी आप जरुर प्रवेश भी भेज चुके होंगे, योजना भी बना चुके होंगे और अपने साथियों से चर्चा भी कर चुके होंगे। मुझे आशा है बढ़-चढ़कर कर हिन्दुस्तान के हर कोने में इस कार्यक्रम को आप जरुर आगे बढ़ायेंगे।

बुंदेलखंड से है ऑस्ट्रेलिया का संबंध : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया का संबंध बुंदेलखंड से जुड़ा हुआ है और जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के खिलाफ अंग्रेजों ने मुकदमा दर्ज किया था तो उनके मुकदमे की पैरवी ऑस्ट्रेलिया के रहने वाले जॉन लैंड ने की थी।श्री मोदी ने रविवार को रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में कहा कि बुंदेलखंड की धरती ने लक्ष्मीबाई, झलकारी बाई जैसी वीरांगनाओं की साथ ही ध्यान चंद जैसे महान खिलाड़ी दिए और इस धरती के प्रति विदेशियों का आकर्षण रहा है।

ऑस्ट्रेलिया में जगत तारिणी ने बसा दिया अद्भुत वृंदावन : मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वृंदावन के अध्यात्म का अदभुत रस पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है और यही वजह है कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में कृष्णभक्त जगत तारिणी दासी ने एक अद्भुत वृंदावन बसा दिया है।श्री मोदी ने रविवार को रेडियो पर प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम मन की बात में कहा कि वृन्दावन के बारे में कहा जाता है कि ये भगवान के प्रेम का प्रत्यक्ष स्वरूप है। हमारे संतों ने भी इसके रस पर भावनाएं व्यक्त की है। उनका कहना था कि वृंदावन की महिमा, हम सब अपने-अपने सामर्थ्य के हिसाब से कहते जरूर हैं लेकिन वृंदावन का जो सुख है, यहाँ का जो रस है, उसका अंत, कोई नहीं पा सकता क्योंकि वह असीम है।उन्होनें कहा कि यही वह असीम रस है जिसके कारण वृंदावन दुनिया भर के लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करता रहा है और यही वजह है कि इसकी छाप दुनिया के कोने-कोने में देखने को मिलती है।

उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के शहर पर्थ का ज़िक्र करते हुए कहा कि वह अक्सर क्रिकेट मैच होते रहते हैं इसलिए लोग पर्थ को ज्यादा जानते है लेकिन वहां एक आर्ट गैलरी है जो ऑस्ट्रेलिया निवासी जगत तारिणी दासी के प्रयासों का नतीजा है। जगत तारिणी वैसे तो ऑस्ट्रेलिया में जन्मी ,वहीं पढ़ी लिखी और बड़ी हुई लेकिन 13 साल से भी अधिक समय, वृन्दावन में आकर उन्होंने बिताया। उनका कहना है कि वे ऑस्ट्रेलिया लौट तो गई लेकिन वृन्दावन को भूल नहीं पाती है इसलिए उन्होंने वृंदावन और उसके आध्यात्मिक भाव से जुडने के लिए ऑस्ट्रेलिया में ही वृन्दावन खड़ा कर दिया। अपनी कला को माध्यम बना कर वहां एक अद्भुत वृन्दावन उन्होंने बना लिया है जहां कई तरह की कलाकृतियां देखने को मिलती है। वृंदावन, नवाद्वीप और जगन्नाथपुरी की परंपरा और संस्कृति की झलक के साथ ही वहां भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी कई कलाकृतियाँ भी प्रदर्शित की गई हैं।श्री मोदी ने कहा “इनमें एक कलाकृति ऐसी भी है जिसमें भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा रखा है, जिसके नीचे वृंदावन के लोग आश्रय लिए हुए हैं। जगत तारिणी जी का यह अद्भुत प्रयास, वाकई, हमें कृष्ण भक्ति की शक्ति का दर्शन कराता है। मैं, उन्हें, इस प्रयास के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएँ देता हूँ।”

मोदी ने शहीदों को नमन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि हमें अमृत महोत्सव से प्रेरणा मिलती है।श्री मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में आज देश के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि हमें अमृत महोत्सव से प्रेरणा मिलती है। श्री मोदी ने कहा कि दिसंबर महीने में देश नौसेना दिवस और सशस्त्र सेना झंडा दिवस भी देश मनाता है। हम सबको मालूम है 16 दिसम्बर को 1971 के युद्ध का स्वर्णिम जयन्ती वर्ष भी देश मनाएगा।

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