
आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिश: रेल किराया और बिजली दरों की क्रॉस सब्सिडी होगी युक्तिसंगत
संसद में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में रेल यात्री किराये और बिजली दरों में क्रॉस सब्सिडी को “अनसुलझा मुद्दा” बताते हुए इन्हें चरणबद्ध तरीके से युक्तिसंगत बनाने की सिफारिश की गई है। सर्वेक्षण के अनुसार यात्री किराये में घाटे की भरपाई माल ढुलाई से की जाती है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है। बिजली क्षेत्र में भी उद्योगों पर अधिक दर का बोझ डालकर घरेलू उपभोक्ताओं को सब्सिडी दी जा रही है। इससे प्रतिस्पर्धा और निवेश प्रभावित हो रहा है।
नयी दिल्ली : संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में रेल यात्री किराये और बिजली दरों में क्रॉस सब्सिडी को “अनसुलझा मुद्दा” बताते हुए चरणबद्ध तरीके से इन्हें “युक्तिसंगत बनाने” की सिफारिश की गयी है।आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि रेलवे यात्री किराया कम रखकर उसमें हुए घाटे की भरपाई माल ढुलाई से प्राप्त राजस्व से करता है। इससे रेलवे की माल ढुलाई महंगी होती है और अन्य माध्यमों की तुलना में उसकी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता कम होती है। इसी प्रकार, घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली कम दर पर उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों को ज्यादा दर में बिजली की आपूर्ति की जाती है। इससे उद्योगों की लगात बढ़ जाती है।
सरकार को सलाह दी गयी है कि भविष्य में एक संतुलित उपाय के तहत “सब्सिडी प्राप्त श्रेणियों के लिए चरणबद्ध दर और कोटा का प्रावधान करके दरों को युक्तिसंगत” बनाया जा सकता है। साथ ही स्वैच्छिक आधार पर और कुछ वर्ग विशेष को सब्सिडी से बाहर रखा जा सकता है।इसमें बताया गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 में रेलवे को किराये से प्राप्त कुल राजस्व में 68 प्रतिशत योगदान माल ढुलाई का रहा। माल ढुलाई से प्राप्त लाभ का इस्तेमाल यात्री किराये और अन्य सेवाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया गया। इसके बावजूद, यात्री परिवहन के 5,257 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी।
कैग ने भी यात्री परिवहन की लागत के विश्लेषण और नुकसान कम करने के उपाय करने का सुझाव दिया है।सर्वेक्षण में बताया गया है कि 01 जनवरी 2020, 01 जुलाई 2020 और 26 दिसंबर 2025 को यात्री किराये में संशोधन से पांच साल में रेलवे के कुल किराये में माल ढुलाई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022-23 के 68 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 65 प्रतिशत रह गया। इसके वित्त वर्ष 2025-26 में 62 प्रतिशत रहने का अनुमान है।इसमें कहा गया है कि क्रॉस सब्सिडी के कारण सड़क परिवहन के साथ प्रतिस्पर्धा में रेलवे पीछे रह जाता है, कमोडिटी के सामान और उपभोक्ता उत्पादों की कीमत तथा लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है। माल ढुलाई की दरों में सुधार से राजस्व बढ़ सकता है और लोग अपना माल भेजने के लिए सड़क मार्ग से रेल मार्ग की तरफ आकर्षित हो सकते हैं। इससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, परिवहन क्षेत्र पर्यावरण के ज्यादा अनुकूल बनेगा और सड़क पर यातायात का बोझ कम होगा।
बिजली क्षेत्र के बारे में कहा गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को कम दर पर बिजली देने के लिए उद्योगों को महंगी बिजली दी जाती है। टैरिफ नीति के विपरीत कुछ राज्यों में बजली की दर के मुकाबले औसत आपूर्ति लागत का अंतर 20 प्रतिशत से भी ज्यादा है। बिजली (संशोधन) विधेयक, 2025 में लागत के अनुरूप बिजली की दर को बढ़ावा देने और औद्योगिक उपभोक्ताओं के साथ सीधे खरीद अनुबंध का प्रावधान किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि विनिर्माण इकाइयों, रेलवे और मेट्रो रेलवे द्वारा क्रॉस सब्सिडी का भुगतान पांच साल में पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिये।इसमें बताया गया है कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) ढांचे में सुधार से पिछले एक दशक में 3.48 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान रोकने का अनुमान है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार सड़कों तथा पेयजल सहित ग्रामीण आधारभूत ढांचे में जबर्दस्त प्रगति
वर्ष 2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि देश में सड़कें, आवास, स्वच्छ पेयजल कनेक्शन और डिजिटल संपर्क सहित कई अन्य क्षेत्रों में ग्रामीण आधारभूत ढांचे में जबर्दस्त प्रगति हुई है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा गुरुवार को संसद में पेश इस सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) प्रथम में 99.6 प्रतिशत से अधिक पात्र घरों को संपर्क सुविधा प्रदान कर योजना के द्वितीय चरण में 6,664 सड़कों पर 49,791 किलोमीटर का निर्माण और 759 पुलों का कार्य पूरा हुआ है और अब तीसरे चरण की योजना अपने पूर्ण होने के अग्रिम चरण पर है। सभी के लिए आवास योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण क्रियान्वित की जा रही है और गत 11 वर्षों में 3.70 करोड़ आवासों के निर्माण का काम पूरा हुआ है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ की महत्वकांक्षी योजना में जल जीवन मिशन के तहत 15.74 करोड़ यानी 81.31 प्रतिशत घरों को इसके दायरे में लाया गया है। स्वामित्व योजना के तहत लक्षित लगभग 3.44 लाख गांवों के मुकाबले 3.28 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है।सर्वेक्षण में कहा गया है कि 25 दिसम्बर 2000 को पीएमजीएसवाई-प्रथम की शुरुआत हुई थी जिसका प्राथमिक उद्देश्य 2001 की जनगणना के अनुसार मैदानी क्षेत्रों के ग्रामीण इलाकों में 500 व्यक्ति या उससे अधिक और पूर्वोत्तर तथा पवर्तीय क्षेत्रों में 250 व्यक्ति या उससे अधिक की बिना संपर्क पात्र आबादी को सभी मौसम के अनुकूल सड़क सुविधा से जोड़ना है और योजना के तहत इस साल 15 जनवरी तक 99.6 प्रतिशत पात्र आवासों तक यह संपर्क सुविधा प्रदान करा दी गई है।
इसके अलावा 1,64,581 सड़कों और 7,453 पुलों की मंजूरी दी गई है तथा 1,63,665 सड़कों (6,25,117 किमी) और 7,210 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। योजना का दूसरा चरण 2013 में शुरू हुआ जिसमें 6,664 सड़कों (49,791 किमी) और 759 पुलों को मंजूरी दी गई और गत 15 जनवरी तक 6,612 सड़कों (49,087 किमी) और 749 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।वित्त मंत्री द्वारा पेश सर्वेक्षण के अनुसार बड़े ग्रामीण क्षेत्रों के पर्यावासों, ग्रामीण कृषि बाजारों, उच्चतर माध्यमिक स्कूलों तक संपर्क सुविधा प्रदान करने के लिए 1,25,000 किलोमीटर लंबे मार्गों के निर्माण के लिए जुलाई 2019 में पीएमजीएसवाई के तीसरे चरण को मंजूरी दी थी और इस योजना के तहत 15,965 सड़कों (1,22,363 किलोमीटर) और 3,211 पुलों को मंजूरी दी गई थी और 15 जनवरी 2026 तक 12,699 सड़कों (1,02,926 किलोमीटर) तथा 1,734 पुलों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ जल आपूर्ति को लेकर कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में ‘हर घर जल’ के महत्वकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सरकार राज्यों के सहयोग से अगस्त 2019 से जल जीवन मिशन योजना लागू कर रही है। योजना की शुरुआत में केवल 3.23 करोड़ (17 प्रतिशत) ग्रामीण आवासों के पास स्वच्छ पेयजल की सुविधा थी और 20 नवम्बर 2025 तक इसके दायरे में 12.50 करोड़ से अधिक आवासों को लाया गया। योजना के दायरे में शामिल आवासों की संख्या बढ़कर 15.74 करोड़ (81.30 प्रतिशत) हो गई, जो ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर रहा है।
सर्वेक्षण के अनुसार ग्रामीण तकनीक समावेशी विकास के लिए अत्याधुनिक मोबाईल फोन, सैटेलाइट इंटरनेट और कृषि के क्षेत्र में डिजिटल उपकरणों जैसे नवाचार ‘डिजिटल क्षेत्र’ के अंतराल को कम कर कर रहे हैं और दूरस्थ क्षेत्रों में आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है।दिसंबर 2025 तक, स्वामित्व योजना के तहत ड्रोन समीक्षा लगभग 3.44 लाख अधिसूचित गांवों के लक्ष्य के मुकाबले 3.28 लाख गांवों में पूर्ण किया जा चुका है। लगभग 1.82 लाख गांवों के लिए 2.76 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। वर्ष 2023–24 के दौरान, अग्रणी उर्वरक कंपनियों ने अपने स्वयं के संसाधनों से स्वयं सहायता समूहों की ड्रोन दीदियों को 1,094 ड्रोन वितरित किए, जिनमें से नमो ड्रोन दीदी योजना के अंतर्गत 500 ड्रोन प्रदान किए गए।
इसके साथ ही डिजिटल भारत भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसके तहत वित्त वर्ष 2008 से ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि के रिकॉर्ड के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटलीकरण को क्रियान्वित कर रही है। राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण क्षेत्रों में कुल उपलब्ध भूमि रिकॉर्डों का 99.8 प्रतिशत मालिकाना रिकॉर्ड डिजिटलीकरण का कार्य पूरा किया जा चुका है।(वार्ता)
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