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कोरोना दंश,वित्तविहीन शिक्षकों/प्राइवेट टीचरों और कर्मचारी वर्ग की हालत खराब

वित्तविहीन स्कूल एवं स्ववित्त पोषित महाविद्यालय के अध्यापक एवं कर्मचारियों और प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले अध्यापकों को वेतन रेगुलर नहीं मिलता है उधर लाक डाउन के कारण इनको कोई सरकारी मदद नहीं मिलने से कर रहे हैं यह दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद

वाराणसी। कोरोना के खिलाफ देश में लगा लाक डाउन पूरी तरह सफल हैं। शहर एवं गाँव की सड़के विरान हैं। दुकाने बंद हैं। चारों ओर सन्नाटा पसरा हैं, पुलिस बल चौक चौराहों पर तैनात हैं। प्रशासन पूरी तरह चाक चौबंद व सख्त हैं। लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहें। लेकिन सरकार के तमाम प्रयासों व राहत के बावजूद इस बंदी से वित्तविहीन स्कूल व स्ववित्त पोषित महाविद्यालय और प्राइवेट स्कूलों, कोचिंग संस्थानों में पढ़ाने वाले टीचरों एवं कर्मचारी वर्ग को भारी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा हैं। घर से बाहर नहीं निकलने से शिक्षक, कर्मचारियों शिक्षा के जरिए आजीविका चलाने वाले उक्त शिक्षक और कर्मचारियों के परिवार के भरण पोषण की समस्या पैदा हो गयी हैं। स्कूल कॉलेज कोचिंग संस्थान आदि बंद होने से ऐसे परिवारो के समक्ष पैसों की किल्लत के कारण राशन पानी खाने पीने व रोजमर्रा की जरुरत समस्या बन गयी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने गरीबों को राहत पहुंचाने के लिये खाद्यान्न एवं भरण पोषण राशि देने की घोषणा की हैं। लेकिन ये शिक्षक परिवार 22 मार्च से घरों में कैद हैं। इन दिनों में वे कैसे परिवार चलायेगें ? इसकी कोई व्यवस्था सरकार व प्रशासन ने नहीं की हैं। मुफ्त राशन की यह योजना भी सिर्फ राशन कार्ड वालों के लिये हैं। इसका कोई भी लाभ इन शिक्षकों और बाहर से रोजी रोजगार कमाने आये लोगों को नहीं मिल रहा है। उक्त स्कूल और कोचिंग संस्थान महाविद्यालय खुले बिना। ऐसे में इन लोगों के समक्ष भुखमरी की नौबत पैदा होना तय है। अभी तक तो थोड़ी बहुत जमा पूंजी से उनका काम चल गया। लेकिन तीन हफ्ते का लंबा समय इनकी दुश्वारियां बढा़ने वाला हैं। जिसका समय रहते समाधान किया जाना जरुरी हैं। सर्व विद्या की राजधानी वाराणसी में बड़ी संख्या में लोग शिक्षण, अध्ययन, कोचिंग, ट्यूशन और अध्यापन का यहां कार्य करते रहें हैं। सरकार व प्रशासन को चाहिये की वह ऐसे लोगों को चिन्हित करे और उनकों भी राहत पैकेज का लाभ मिलना सुनिश्चित करें। वहीं आल इंडिया सेकुलर फोरम के संयोजक डॉ मोहम्मद आरिफ ने इसका सरल तरीका राशन मोबाइल वैन के जरियें बिना भीड़ लगायें सोशल डिस्टेंसिंग के साथ इन शिक्षकों, कर्मचारियों में सभी जरुरत मंदों को घर-घर आसानी से खाद्य सामग्री मुफ्त बांटी जा सकती हैं। शिक्षकों के खाते में भरण पोषण राशि दिया जा सकता है। इस बाबत सरकार के दिए गए आदेश जिसका कड़ाई से पालन कराते हुए 2 महीने का वेतन इन शिक्षकों कर्मचारियों को दिलवाए जाए ताकि इन लोगों को “भूख” से बचाने के लिये सावधानी के साथ यह सब भी करना होगा। तभी कोरोना के खिलाफ लड़ी जाने वाली जंग सफल व सार्थक हो सकेगी। सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता की पत्नी शिक्षिका पूजा गुप्ता जो वंचित समुदाय के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करती है और खुद प्राइवेट स्कूल में अध्यापन का कार्य करती है ने प्रदेश के मुखिया सीएम योगी और जिलाधिकारी वाराणसी कौशल राज शर्मा को मेल, ट्वीट करते हुए कहां की हम शिक्षक लोग अध्यापन के जरिये रोजी मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। हमारा वेतन दिहाड़ी और मनरेगा मजदूरों से भी कम है सरकार के द्वारा संचालित योजनाओं का भी लाभ हमें नहीं मिलता है यहां तक की राशन कार्ड भी हम शिक्षकों के पास नहीं है। मुफ्त खाद्यान्न वितरण भी हमें नहीं हो पा रहा है और ना ही सरकार और संस्थाओं के जरिए हमें खाद्य सामग्री उपलब्ध हो रही है ऐसे में हमारे सामने गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो रही है। साथ ही हम शिक्षकों के परिवार के सामने रोजी रोटी की गंभीर समस्या आने लगी है। शिक्षक वर्ग के लोग कोई रोजी मजदूरी का काम नहीं कर पा रहे हैं। विगत 22 मार्च से लोग अपने-अपने घरों में हैं। जिसके कारण दैनिक रोजी-रोटी करने वालों के सामने गंभीर आर्थिक स्थिति बन गई है। छोटे-छोटे बच्चे उनके काफी परेशान होने लगे हैं। पूजा गुप्ता ने मांग किया है कि ऐसे शिक्षक और कर्मचारी परिवारों को भी राहत पहुंचाने का

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