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बुद्ध सिर्फ एक नाम नहीं है, बल्कि एक पवित्र विचार भी है-प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री ने वैशाख पूर्णिमा के उपलक्ष्य में आज वर्चुअल रूप से वैश्विक स्तर पर आयोजित समारोह को संबोधित किया , वर्चुअल प्रार्थना सभा में दुनिया भर के बौद्ध संघों के प्रमुखों ने भाग लिया

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर आज वैश्विक स्तर पर वर्चुअल रूप से आयोजित ‘वैशाख वैश्विक समारोह’ को संबोधित किया। संस्कृति और पर्यटन राज्य मंत्री(स्वतंत्र प्रभार),  प्रहलाद सिंह पटेल और युवा और खेल तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरेन रिजिजू ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन, शिक्षाओं और संदेश ने दुनिया भर में लोगों के जीवन को समृद्ध बनाया है। उनका संदेश किसी एक परिस्थिति या किसी एक विषय तक सीमित नहीं है। समय बदला,परिस्थितियां बदलीं,समाज की कार्यप्रणाली बदली,लेकिन भगवान बुद्ध का संदेश हमारे जीवन में निरंतर प्रवाहित होता रहा है। बुद्ध सिर्फ एक नाम नहीं है, बल्कि एक पवित्र विचार भी है, एक ऐसा विचार जो हर मानव के दिल में धड़कता है और मानवता का मार्गदर्शन करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा मित्रों, ‘भगवान बुद्ध के प्रत्येक शब्द और प्रवचल मानवता की सेवा करने की भारत की प्रतिबद्धता को सशक्त बनाते हैं। बुद्ध,भारत के ज्ञानोदय और आत्मबोध दोनों का प्रतीक हैं। इस आत्म-साक्षात्कार के साथ,भारत पूरी मानवता,पूरे विश्व के हित में काम करना जारी रखेगा। भारत की प्रगतिविश्व की प्रगति में हमेशा सहायक होगी।

इस अवसर पर  प्रहलाद सिंह पटेल ने सभी को बुद्ध पूर्णिमा की बधाई दी और 2015में बुद्ध पूर्णिमा को राष्ट्रीय उत्सव के रूप में मनाने की पहल करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। श्री पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध ने हमें प्रेम और अहिंसा की शक्ति से परिचित कराया है। भगवान बुद्ध ने पूरी दुनिया को यह शिक्षा दी है कि अहिंसा ज्ञान की भाषा है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने दुनिया को प्रेम की ताकत दिखाई है। श्री पटेल ने अपने संबोधन में भगवान बुद्ध के उपदेशों का उल्लेख भी किया।

किरेन रिजिजू ने कहा “मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि कोविड के समय बुद्ध पूर्णिमा को मनाने के लिए एक परिवार की तरह पूरे देश भर से लोग वर्चुअल तरीके से इकठ्ठा हुए हैं। मेरा मानना ​​है कि यह वसुधैव कुटुम्बकम का सबसे अच्छा उदाहरण है, जिसका अर्थ है कि दुनिया एक परिवार है।”

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (आईबीसी) के साथ मिलकर दुनिया भर के बौद्ध संघों के प्रमुखों की भागीदारी के साथ वर्चुअल प्रार्थना का आयोजन किया गया। कोविड-19 महामारी के कारण बुद्ध पूर्णिमा का समारोह पूरे विश्व में वर्चुअल तरीके से आयोजित किया जा रहा है। इसे कोविड-19 के पीड़ितों और अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के सम्मान में  वैश्विक प्रार्थना सप्ताह के रूप समर्पित किया जा रहा है।

इस अवसर पर प्रार्थना समारोह का भारत में स्थित बोधगया के महाबोधि मंदिर, सारनाथ के मूलगंध कुटी विहार और कुशीनगर के परिनिर्वाण स्तूप,  नेपाल के पवित्र उद्यान लुम्बिनी और बौधनाथ,स्वायंभु, नमो स्तूप,श्रीलंका के पवित्र और ऐतिहासिक अनुराधापुरा स्तूप परिसर में रुआंवाली महा-धारा से पिरिथ जप के अलावा अन्य लोकप्रिय बौद्ध स्थलों से भी सीधा प्रसारण किया गया। कार्यक्रम को एफबी लाइव,यूट्यूब से आईबीसी सोशल मीडिया हैंडल के साथ-साथ मंडला मोबाइल ऐप पर लाइव स्ट्रीम किया गया था।

इस कार्यक्रम को भारत,ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश,भूटान, कंबोडिया, चेक गणराज्य, फ्रांस, जर्मनी, इंडोनेशिया,जापान, दक्षिण कोरिया, म्यांमार, मंगोलिया, मलेशिया, नेपाल, रूस, श्रीलंका, सिंगापुर,ताइवान और वियतनाम में बड़ी संख्या में दर्शकों द्वारा देखा गया । वैशाख पूर्णिमा,भगवान बुद्ध के जीवन की तीन अहम घटनाओं- उनके जन्म,उनको को ज्ञान की प्राप्ति एवं उरके महापरिनिर्वाण के कारण विशेष महत्व रखती है।

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