
रानी लक्ष्मीबाई की जयंती के अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद काशी महानगर के रामनगर इकाई के राष्ट्रीय कला मंच के कार्यकर्ताओं ने रानी लक्ष्मीबाई के चित्र को रेत में उकेरा जिसमें महारानी लक्ष्मीबाई घोड़े पर सवार होकर के युद्ध करती नजर आ रही हैं। प्रांत प्रमुख राष्ट्रीय कला मंच के अश्वनी सिंह ने कहा भारत के अंदर नारी को पूजनीय माना गया है। रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान को कभी भुलाया नही जा सकता है। नारी होते हुए भी उन्होने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई तथा देश के लिए उन्होने लड़ाई लड़ते हुए अपनी जान दे दी।

वहीं सुनिधि द्विवेदी ने कहीं कि आज महारानी लक्ष्मी बाई की जयंती है। उनके राष्ट्र प्रेम, साहस और बलिदान की अमर कहानी बुन्देलखण्ड के इतिहास को गौरान्वित कर हम महिलाओं के लिए आज भी प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। वीरागंनाओं के पारस्परिक सहयोग, त्याग और आत्मविश्वास दलित सवर्ण का अमिट प्रेम भी राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना हुआ है। देश की आजादी के लिए लड़ाई में जहां राजाओं, नवाबों, देशभक्त साधन सम्पन्न साहसिक नागरिकों ने संघर्ष किया वहीं रानी लक्ष्मीबाई का राष्ट्र प्रेम संघर्ष आज भी यादगार बना हुआ है।
“जब तक मेरे रक्त का एक बूँद भी मेरे शरीर में बाक़ी है, मैं यह किला अंग्रेजी फौज़ के हाथों में नहीं जाने दूँगी” शब्द और कर्म का एक्य ही नायकत्व की वास्तविक परिभाषा है। रानी लक्ष्मीबाई ने स्वतंत्रता को अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय न सिर्फ़ शब्दों द्वारा बताया बल्कि अपने अभूतपूर्व रणकौशल के साथ किए गए संघर्ष द्वारा इस कथन को सत्य साबित भी किया। आज उनका जन्मदिन है। स्वाधीनता की दीवानी, शौर्य व साहस की सबसे बड़ी प्रतिमूर्ति हैं।इस दौरान अभाविप के प्रांत संगठन मंत्री अभिलाष, विभाग संगठन मंत्री बाबा हरदेव, प्रांत प्रमुख राष्ट्रीय कला मंच अश्वनी सिंह, रामनगर विस्तारक जाह्नवी कसेरा, नगर मंत्री मोहित राज, सुनिधि द्विवेदी, सहित भारी संख्या में विद्यार्थी परिषद की कार्यकर्ता उपस्थित रहे।




