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जब गांव की गलियां बनीं स्कूल

बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ कोरोना के प्रति जागरूक कर रहे हैं कर्तव्यनिष्ठ अध्यापक

दुद्धी, सोनभद्र – कोरोना महामारी के काल में जहां शहरों के बच्चे ऑनलाइन अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं, वहीं ग्रामीण भारत के गरीब परिवारों के बच्चे ऑनलाइन शिक्षा हासिल कर पाने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के कई हिस्सोे में एक अनोखी पहल देखने को मिली है। यहा गांव में अलग-अलग टोलो मे किसी पेड़ के नीचे या चबूतरे पर 4 से 10 बच्चों को निश्चित दूरी बना कर बैठा कर मोहल्ला क्लास चलाया जा रहा हैं ताकि सोशल डिस्टेंसिग का पालन हो सके। अध्यापकों की पहल से कोरोना संकटकाल में हजारों बच्चो को शिक्षा मिल रही हैं।

देश के अति पिछड़े 112 जिले में शामिल सोनभद्र उत्तर प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा जिला है जिसके 45% भूभाग पहाड़ों और जंगलों से घिरा हुआ है जिले मे प्राथमिक और मिडिल मिलाकर 2458 विद्यालय हैं । जिसमें 7564 शिक्षक 255000 बच्चों को पढ़ाते हैं । लेकिन कोरोना महामारी के कारण इस समय विद्यालय सभी बंद पड़े है । कोरोना संकटकाल में शहरी इलाकों में व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से 15% बच्चों को ऐप के माध्यम से 15% टोल फ्री और कॉल करके 10% रेडियो और दूरदर्शन के माध्यम से 20% बच्चों को शिक्षा दी जा रही है । लेकिन ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था बिल्कुल नहीं के बराबर है ।

गांवों में चौपाल लगाकर, बच्चों को तालीम देते कर्तव्यनिष्ठ

सोनभद्र में आज भी मोबाइल टावरों के अभाव के कारण नेटवोर्किंग की समस्या के साथ साथ गरीबी के कारण एंड्रायड फोन खरीदना भी बड़ी समस्या है । ऐसे में कोरोना के इस विषम परिस्थिति मे ऑनलाइन शिक्षा इन क्षेत्रों के बच्चो के लिए एक बड़ी समस्या बनी हुई थी ।सोनभद्र के बीड़र गांव के 11 वर्षीय विकास प्राथमिक विद्यालय कलकली बहरा मे कक्षा पांच का छात्र है, लेकिन कोरोना संकट के कारण मार्च से ही विद्यालय बंद पड़े हैं और ऑनलाइन पढ़ाई इसलिए नहीं कर पा रहा है, क्योंकि उनके घर में एंड्रॉयड फोन नहीं है। इसलिए मार्च से ही विकास का पढ़ाई नहीं हो पा रहा था।

विकास जैसे छात्रों को की पढ़ाई कराने के लिए सोनभद्र प्राथमिक विद्यालय कलकालीबहरा के अध्यापक वर्षा जायसवाल प्रतिदिन बीड़र गांव में स्कूल बंद होने के कारण इन बच्चों के घरों के आसपास जाकर, छोटे छोटे चौपाल लगाकर उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया है । इन अलग अलग चौपालों में 4 से 10 बच्चो को लेकर पूरे एहतियात के साथ उन्हें नियमित पढ़ाने में जुटी हुई हैं । मोहल्ला क्लास में न सिर्फ बच्चों को पढ़ाया जा रहा है बल्कि कोरोना महामारी से बचने के लिए तमाम तरीके भी बताए जा रहे हैं।आज सोनभद्र के विभिन्न इलाकों में सैकड़ों की संख्या में मोहल्ला क्लास चल रहे हैं।जहां पर हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, जिससे न सिर्फ बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा हो रहा है बल्कि अभिभावक भी अध्यापकों की इस पहल की तारीफ करते थक नही रहे।

प्राथमिक विद्यालय अमवार कालोनी के प्रधानाध्यापक नीरज चतुर्वेदी कहते हैं कि विद्यालय बच्चों के लिए बंद है, केवल टीचर के लिए खुले हुए हैं। मेरी सोच थी कि बच्चे स्कूल नहीं आ सकते हैं लेकिन स्कूल तो बच्चों के पास जा सकता। इसलिए हमने गांवों में जाकर बच्चों को पढ़ाने का काम काफी दिन पूर्व से प्रारंभ कर दिया है।

शासन के निर्देश पर ऑनलाइन शिक्षा  की व्यवस्था चल रही है, लेकिन जिले के दुर्गम क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क ना होने के कारण बहुत से बच्चे इससे वंचित हो रहे हैं। ऐसे मैं कुछ शिक्षक बच्चों को दूर दूर बैठा पर एक चौपाल शिक्षण की अवधारणा के साथ पढ़ाने का काम कर रहे हैं। जिसके काफी सकारात्मक परिणाम आ रहे हैं।
डा. गोरखनाथ पटेल जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

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