
खेलेंगे भी, सीखेंगे भी और निखरेंगे भी, यूपी के नौनिहालों के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान
उत्तर प्रदेश में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को आधुनिक और गतिविधि आधारित बनाने के लिए योगी सरकार ने तीन महत्वपूर्ण पहल की हैं। 966 पीएम श्री विद्यालयों के को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में रीडिंग, ब्लॉक, परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर विकसित किए जाएंगे, जिसके लिए ₹193 लाख स्वीकृत किए गए हैं। 1,235 पीएम श्री विद्यालयों में ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध कराने के लिए ₹61.75 लाख की मंजूरी दी गई है। वहीं 40 जनपदों के 17,519 आंगनवाड़ी केंद्रों में आधुनिक आउटडोर प्ले मैटेरियल के लिए ₹87.60 करोड़ स्वीकृत हुए हैं। स्लाइड, सी-सॉ, झूले और रॉकिंग बोट के साथ बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलेगा।
लखनऊ : उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को अधिक रोचक, गतिविधि आधारित और बाल-केंद्रित बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक साथ कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार की योजनाओं के तहत बच्चों को पढ़ने-लिखने की पारंपरिक प्रक्रिया के साथ खेल, कहानी, कविता, गीत, कला, अभिनय और शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।
इसी क्रम में प्रदेश के 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में चार प्रकार के लर्निंग कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इसके लिए ₹193 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है और प्रत्येक चयनित विद्यालय के लिए ₹20,000 की दर से धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी। दूसरी पहल के तहत 1,235 पीएम श्री विद्यालयों के को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं के लिए ₹61.75 लाख की धनराशि से ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं तीसरी बड़ी पहल के तहत 40 जनपदों के 17,519 को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में आधुनिक आउटडोर प्ले मैटेरियल स्थापित करने के लिए ₹87.60 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं।
966 पीएम श्री विद्यालयों में विकसित होंगे चार लर्निंग कॉर्नर
पीएम श्री योजना के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में 966 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में रीडिंग कॉर्नर, ब्लॉक कॉर्नर, परफॉर्मेंस कॉर्नर और आर्ट कॉर्नर विकसित किए जाएंगे। इन कॉर्नरों का उद्देश्य बच्चों को उनकी उम्र और सीखने की जरूरतों के अनुसार ऐसा वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां किताब, खिलौना, कला, अभिनय और विभिन्न गतिविधियां सीखने का माध्यम बनें।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप प्रारंभिक बाल्यावस्था में गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इन चारों लर्निंग कॉर्नरों के माध्यम से बच्चों के सामाजिक एवं संवेदनात्मक, संज्ञानात्मक, शारीरिक तथा सूक्ष्म मांसपेशीय विकास को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
कहानी की किताबों से पजल और ब्लॉक्स तक
रीडिंग कॉर्नर में हिंदी वर्णमाला मैट, चित्रात्मक कहानी की पुस्तकें, ओपन बुक शेल्फ, चित्र एवं संख्या चार्ट तथा लेखन और चित्रकारी के लिए क्लिप बोर्ड जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बच्चों की शब्दावली, सुनने की क्षमता और शुरुआती साक्षरता से जुड़ी क्षमताओं को विकसित करने में मदद मिलेगी।
ब्लॉक कॉर्नर में बड़े फोम ब्लॉक्स, लकड़ी के ब्लॉक्स, शेप सॉर्टर, पिक्चर पजल, अल्फाबेट एवं नंबर ब्लॉक्स, स्टैकिंग टॉयज और लेसिंग बोर्ड जैसी सामग्री रखी जाएगी। इनके जरिए बच्चों में आकार पहचानने, समस्या समाधान, स्थानिक समझ, शुरुआती साक्षरता और संख्याज्ञान जैसी क्षमताओं को बढ़ावा देने का प्रयास होगा।
परफॉर्मेंस और आर्ट कॉर्नर से रचनात्मकता को मिलेगा अवसर
परफॉर्मेंस कॉर्नर में बच्चों को भूमिका आधारित गतिविधियों से जोड़ने के लिए ड्रेस-अप कॉस्ट्यूम, फिंगर स्टिक पपेट, किचन प्ले सेट, सॉफ्ट डॉल, इमोशन मास्क, स्मॉल ड्रम, हैट्स एवं स्कार्फ और टॉय टेलीफोन जैसी सामग्री उपलब्ध होगी। इन गतिविधियों के माध्यम से कल्पनाशील भूमिका-अभिनय, कहानी कहने, संवाद, सामाजिक सहभागिता और भावनात्मक विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा।
वहीं आर्ट कॉर्नर में नॉन-टॉक्सिक फिंगर पेंट, क्रेयॉन, चाइल्ड-सेफ ग्लू स्टिक, आर्ट शीट और कलर पेपर जैसी सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बच्चों को रचनात्मक अभिव्यक्ति के साथ सूक्ष्म मोटर कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।
3-5 और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग सामग्री
लर्निंग कॉर्नर की सामग्री बच्चों की उम्र और विकासात्मक जरूरतों को ध्यान में रखकर निर्धारित की गई है। 3-5 वर्ष और 5-6 वर्ष के बच्चों के लिए अलग-अलग सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। 5-6 वर्ष के बच्चों के रीडिंग कॉर्नर में शुरुआती पठन कौशल को ध्यान में रखते हुए अर्ली रीडर्स और द्विभाषी पुस्तकों जैसी सामग्री का भी प्रावधान किया गया है।
सामग्री की खरीद स्कूल स्तर पर की जाएगी, जबकि उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता का अनुश्रवण जिला एवं खंड स्तर से किया जाएगा।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि लर्निंग कॉर्नर से बच्चों की जिज्ञासा को सीखने का नया मंच मिलेगा। उनके अनुसार बालवाटिका में सीखना जितना सहज और आनंददायक होगा, बच्चों की बुनियाद उतनी ही मजबूत होगी। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर विकसित होने से बच्चों को पढ़ने, खेलने, कला, अभिनय और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलेगा।
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि लर्निंग कॉर्नर में आयु वर्ग के अनुरूप निर्धारित सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि बच्चों को उनकी विकासात्मक जरूरतों के अनुसार सीखने के अवसर मिल सकें। उन्होंने सामग्री की उपलब्धता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी तथा चारों कॉर्नरों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
1,235 पीएम श्री विद्यालयों में बच्चों की सीखने की दुनिया को मिलेगा ऑडियो सपोर्ट
प्रारंभिक शिक्षा को और अधिक संवादात्मक एवं आनंददायक बनाने के लिए प्रदेश के 1,235 पीएम श्री विद्यालयों में स्थित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं को ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए ₹61.75 लाख की धनराशि स्वीकृत की गई है।
प्रत्येक विद्यालय को अधिकतम ₹5,000 की सीमा में एक ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध कराया जाएगा। इसका इस्तेमाल विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों के साथ कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों में किया जाएगा। उद्देश्य बच्चों की सुनने, बोलने और मौखिक अभिव्यक्ति की क्षमता को गतिविधियों के माध्यम से विकसित करना है।
हर शनिवार होगा कहानी, कविता, गीत और पहेली का आयोजन
शासन के निर्देश के अनुसार ब्लूटूथ स्पीकर का उपयोग प्रत्येक शनिवार को को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्र अथवा बालवाटिका में 3-6 वर्ष के बच्चों के साथ किया जाएगा। मॉडल शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकत्री अथवा ईसीसीई एजुकेटर बच्चों को कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों से जोड़ेंगे।
इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चों में सुनने, बोलने, संवाद करने और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रवृत्ति को विकसित करना है।
30 वाट या अधिक क्षमता वाला होगा स्पीकर
ब्लूटूथ स्पीकर की खरीद के लिए तकनीकी मानक भी निर्धारित किए गए हैं। स्पीकर में 30 वाट या उससे अधिक पावर, ब्लूटूथ 5.3 या उच्चतर, कम से कम 10 मीटर कनेक्टिविटी रेंज, डुअल 5.2 या उच्चतर ड्राइवर और रिचार्जेबल बैटरी का प्रावधान होगा।
बैटरी बैकअप कम से कम तीन घंटे और बैटरी क्षमता 2,000 mAh या अधिक निर्धारित की गई है। इसके अलावा टाइप-C चार्जिंग पोर्ट, चार घंटे या उससे कम में चार्जिंग सपोर्ट, वायरलेस अथवा वायर्ड माइक्रोफोन इनपुट, वॉल्यूम कंट्रोल और प्लेबैक कंट्रोल जैसी सुविधाएं भी निर्धारित विनिर्देशों में शामिल हैं।
खरीद से उपयोग तक निगरानी
स्पीकर की गुणवत्ता और उपयोगिता की नियमित निगरानी की व्यवस्था की गई है। प्रधानाध्यापक, नोडल शिक्षक, बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारी इसके अनुश्रवण में भूमिका निभाएंगे। जिला और ब्लॉक स्तर पर सामग्री की उपलब्धता, गुणवत्ता तथा प्रभावी उपयोग की निगरानी की जाएगी।
संदीप सिंह ने कहा कि बच्चों की शुरुआती सीखने की प्रक्रिया जितनी सहज, रोचक और गतिविधि आधारित होगी, उनकी सीखने की नींव उतनी ही मजबूत होगी। उनके अनुसार ब्लूटूथ स्पीकर की सुविधा से कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी गतिविधियों को और प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।
मोनिका रानी ने कहा कि ब्लूटूथ स्पीकर के माध्यम से निर्धारित गतिविधियों का नियमित संचालन बच्चों के लिए सीखने को अधिक संवादात्मक और आनंददायक बनाएगा। उन्होंने सामग्री की गुणवत्ता, उपलब्धता और प्रभावी उपयोग की निगरानी के लिए जिला एवं ब्लॉक स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था होने की बात कही।
40 जनपदों के 17,519 आंगनवाड़ी केंद्रों में आधुनिक खेल सुविधाएं
प्रारंभिक शिक्षा को केवल कक्षा या बालवाटिका तक सीमित न रखते हुए बच्चों के शारीरिक विकास पर भी जोर दिया गया है। इसी क्रम में 40 जनपदों के 17,519 को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं में आधुनिक आउटडोर प्ले मैटेरियल स्थापित किया जाएगा। इसके लिए ₹87.60 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।
इन खेल उपकरणों की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से पारदर्शी तरीके से की जाएगी। खरीद प्रक्रिया से लेकर स्थापना और उपयोग तक निगरानी के लिए जिला स्तर की क्रय समिति से लेकर ब्लॉक स्तरीय टास्क फोर्स तक व्यवस्था की गई है।
पांच प्रकार के आधुनिक उपकरणों से खेलेंगे बच्चे
इस पहल के तहत प्रत्येक चयनित केंद्र में बच्चों के लिए आधुनिक आउटडोर खेल वातावरण तैयार किया जाएगा। इसके लिए स्लाइड, सी-सॉ, स्विग, राउंड अबाउट (स्टैंडिंग एमजीआर) और रॉकिंग बोट (टू सीटर) जैसे पांच प्रकार के आधुनिक खेल उपकरण शामिल किए गए हैं।
इन उपकरणों के जरिए बच्चों को खेल के साथ विभिन्न शारीरिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास होगा। इससे बालवाटिकाओं का वातावरण अधिक जीवंत और बच्चों के लिए सीखने के अनुकूल बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।
खेल के साथ विकसित होंगी शारीरिक और सामाजिक क्षमताएं
सरकार की इस पहल के पीछे प्रारंभिक वर्षों में बच्चों के समग्र विकास पर जोर देने की सोच है। आउटडोर प्ले मैटेरियल मिलने से बच्चों को खुले वातावरण में नियमित शारीरिक गतिविधियों के अवसर मिलेंगे। खेल के दौरान बच्चे सक्रिय रहने के साथ गतिविधियों के माध्यम से अपनी क्षमताओं को निखार सकेंगे।
बालवाटिकाओं और आंगनवाड़ी केंद्रों में ऐसा वातावरण तैयार करने का प्रयास है, जहां सीखना बच्चों के लिए बोझ नहीं, बल्कि खेल और अनुभव से जुड़ा सहज अवसर बने।
बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर, न्यूनतम तीन वर्ष की वारंटी
सरकार ने खेल उपकरण उपलब्ध कराने के साथ उनकी गुणवत्ता और बच्चों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी है। प्ले मैटेरियल के निर्माण, पेंटिंग, प्ले एरिया और स्थापना के लिए निर्धारित गुणवत्ता एवं सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
प्रत्येक उपकरण पर कम से कम तीन वर्ष की वारंटी सुनिश्चित की जाएगी। किसी उपकरण में टूट-फूट या तकनीकी समस्या आने की स्थिति में आपूर्तिकर्ता को ऑन-साइट वारंटी, प्रतिस्थापन अथवा आवश्यक रख-रखाव की जिम्मेदारी निभानी होगी। इस तरह सुविधा उपलब्ध कराने के साथ उसकी गुणवत्ता और निरंतर उपयोगिता पर भी निगरानी रखी जाएगी।
संदीप सिंह ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं को आधुनिक सुविधाओं से जोड़कर ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है, जहां खेल, गतिविधि और सीखना एक-दूसरे के पूरक बनें। उनके अनुसार 17,519 केंद्रों में आधुनिक आउटडोर प्ले मैटेरियल उपलब्ध होने से बच्चों को सुरक्षित, आनंददायक और गतिविधि आधारित वातावरण मिलेगा।
मोनिका रानी ने कहा कि 17,519 आंगनवाड़ी केंद्रों में आधुनिक आउटडोर प्ले मैटेरियल की स्थापना से बच्चों को खेल और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का बेहतर अवसर मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपकरणों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए खरीद से लेकर स्थापना और अनुश्रवण तक स्पष्ट व्यवस्था निर्धारित की गई है।
पढ़ाई, कहानी और खेल-तीनों का एक साथ समन्वय
प्रदेश में प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को लेकर इन तीन पहलों में सीखने के अलग-अलग माध्यमों को एक साथ जोड़ा गया है। 966 पीएम श्री विद्यालयों में लर्निंग कॉर्नर बच्चों को किताब, कला, अभिनय और गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर देंगे। 1,235 विद्यालयों में ब्लूटूथ स्पीकर कहानी, कविता, गीत और पहेली जैसी मौखिक एवं संवादात्मक गतिविधियों को प्रभावी बनाने में सहायक होंगे। वहीं 17,519 आंगनवाड़ी केंद्रों में आधुनिक आउटडोर खेल उपकरण बच्चों की शारीरिक सक्रियता और खेल आधारित सीखने के वातावरण को मजबूत करेंगे।
इस प्रकार प्रारंभिक शिक्षा के स्तर पर बच्चों के लिए पढ़ने, सुनने, बोलने, रचनात्मक अभिव्यक्ति, भूमिका-अभिनय और शारीरिक गतिविधि को एक व्यापक सीखने की प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की गई है। इन योजनाओं में उम्र के अनुरूप सामग्री, तकनीकी मानक, गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा प्रावधान और जिला-खंड स्तर की निगरानी को भी शामिल किया गया है।
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