खेत से ग्लोबल बाजार तक… यूपीआईटीएस में दिखी नए उत्तर प्रदेश की कारोबारी ताकत
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS) 2026 में प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और सांस्कृतिक क्षमता का व्यापक प्रदर्शन हुआ। खाद्य प्रसंस्करण, कृषि, महिला उद्यमिता, एमएसएमई, स्टार्टअप, रक्षा विनिर्माण और कौशल विकास से जुड़े क्षेत्रों में नए अवसर सामने आए। 28 सितंबर तक 3,765 व्यापारिक समझौतों के जरिए करीब ₹5,500 करोड़ के एमओयू हुए, जबकि ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ दर्ज की गई। ट्रेड शो में 5.48 लाख से अधिक लोगों की भागीदारी रही। किसानों को ब्रांडिंग और डिजिटल बिक्री, महिलाओं को बड़े बाजार, स्टार्टअप्स को निवेश और रक्षा क्षेत्र में एमएसएमई को सप्लाई चेन से जुड़ने के अवसर मिले।
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उत्तर प्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में मजबूत स्थिति में है और यहां बड़ी मात्रा में सब्जियां, फल तथा अन्य कृषि उत्पाद उपलब्ध होते हैं। इन कृषि उत्पादों का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग करके किसानों की आय बढ़ाने के साथ रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर सृजित किए जा सकते हैं।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के अंतर्गत आयोजित ‘खाद्य प्रसंस्करण नीति-2023’ विषयक विशेष सत्र को संबोधित करते हुए मौर्य ने कहा कि सरकार का प्रयास खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को गांव और जिले के स्तर तक मजबूत बनाने का है।
उन्होंने कहा कि मंडियों में बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद पहुंचते हैं, लेकिन उचित प्रसंस्करण और भंडारण की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई बार इनका बड़ा हिस्सा खराब हो जाता है। यदि कृषि उत्पादों का समय पर प्रसंस्करण किया जाए तो खाद्य पदार्थों की बर्बादी कम होगी और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण का दायरा केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसमें पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन, परिवहन और निर्यात जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार और कारोबार की बड़ी संभावनाएं हैं। उन्होंने युवा, महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों से इस क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।
अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर जोर
मौर्य ने कहा कि वैश्विक बाजार में उत्तर प्रदेश के खाद्य उत्पादों की पहुंच बढ़ाने के लिए गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना होगा। यूरोप, अमेरिका सहित दुनिया के प्रमुख बाजारों में खाद्य उत्पादों के लिए निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी है। उत्पाद की गुणवत्ता के साथ आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान देना होगा, तभी प्रदेश के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा कर पाएंगे।
उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न नीतियों और योजनाओं के माध्यम से उद्यमियों को आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। जिला स्तर पर संबंधित विभागों के अधिकारी संभावित उद्यमियों को योजनाओं से जोड़ने, उद्योग स्थापित करने तथा बैंकिंग एवं वित्तीय सहायता से संबंधित मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहे हैं।
कार्यक्रम में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों और लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री ने नीति के अंतर्गत चुनिंदा लाभार्थियों को चेक वितरित करने के साथ उन्हें सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेन्द्र कुमार कश्यप, राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा सहित अन्य गणमान्यजन मौजूद रहे।
खाद्य प्रसंस्करण में निवेश और नवाचार को बढ़ावा देने पर जोर : बीएल मीणा
ग्रेटर नोएडा। अपर मुख्य सचिव बी.एल. मीणा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को कृषि उत्पादन से जोड़ते हुए आधुनिक तकनीक, प्रसंस्करण क्षमता, कोल्ड-चेन और निर्यात के लिए व्यापक अवसर तैयार किए जा रहे हैं।
यूपीआईटीएस-2026 में खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों की स्थानीय कृषि उपज और उत्पादों को केंद्र में रखकर नए खाद्य प्रसंस्करण हब विकसित किए जा रहे हैं। इससे किसानों की उपज को मूल्यवर्धित स्वरूप देने के साथ रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़ेंगे।
उन्होंने उद्यमियों से उपलब्ध सरकारी योजनाओं और प्रोत्साहनों का लाभ उठाकर आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने तथा स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने का आह्वान किया।
मीणा ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में निवेश बढ़ने से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। इसका लाभ केवल किसान या उद्यमी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कृषि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, परिवहन, विपणन और निर्यात तक पूरी मूल्य श्रृंखला को मिलेगा।
योगी के मुख्यमंत्री बनते ही लागू हुआ ‘रूल ऑफ लॉ’, यूपी का पूरा परिदृश्य 360 डिग्री बदला : सुरेश खन्ना
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही प्रदेश में ‘रूल ऑफ लॉ’ लागू हुआ और कानून-व्यवस्था बेहतर होने से प्रदेश का पूरा परिदृश्य 360 डिग्री बदल गया।
‘फ्रॉम फाइनेंशियल डिसिप्लिन टू ट्रांसपेरेंट सर्विस डिलीवरी’ कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘रिफॉर्म, परफॉर्म एंड ट्रांसफॉर्म’ के मंत्र पर काम करते हुए कृषि, उद्योग, सर्विस सेक्टर और वित्तीय प्रबंधन में सुधार किए हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश को कभी विकास के पैमाने पर पिछड़े राज्यों में गिना जाता था, लेकिन अब प्रदेश देश की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। उनके अनुसार राज्य की जीएसडीपी में बढ़ोतरी के साथ कृषि, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में भी प्रगति हुई है।
बुंदेलखंड में सिंचाई से बदली तस्वीर
खन्ना ने कहा कि सरकार ने 50-50 वर्षों से ठंडी पड़ी योजनाओं पर काम किया। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का बड़ा असर बुंदेलखंड में दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार जिस क्षेत्र में कभी पीने के पानी का संकट था, वहां अब खेती की स्थिति बदली है और किसान तीन-तीन फसलें तक ले रहे हैं। उन्होंने इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दिया।
उन्होंने कहा कि किसानों की उपज की खरीद से पैसा सीधे उनके खातों तक पहुंचा, जिससे उनकी क्रय शक्ति बढ़ी और अर्थव्यवस्था को भी गति मिली। किसान क्रेडिट कार्ड का बड़े पैमाने पर वितरण किए जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की सहायता से पात्र लोगों को छह लाख रुपये तक का कर्ज छह प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
निवेश और रोजगार पर जोर
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रदेश में निवेश बढ़ा है और ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के माध्यम से बड़े निवेश को धरातल पर उतारा गया है। मैन्युफैक्चरिंग के साथ सर्विस और पर्यटन क्षेत्र का भी विस्तार हुआ है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने गैर-जरूरी खर्च रोककर वित्तीय प्रबंधन बेहतर करने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री ने विभागों को बजट का समयबद्ध इस्तेमाल करने और वित्तीय स्वीकृतियों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
रोजगार के संबंध में खन्ना ने कहा कि प्रदेश में अब तक 9.5 लाख लोगों को सरकारी नौकरी दी गई है और नियुक्तियों में योग्यता व क्षमता को आधार बनाया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री ने एक लाख और सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि हुनरमंद युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर नए उद्यमियों तक को वित्तीय सहायता देकर आर्थिक गतिविधियों का दायरा बढ़ाया जा रहा है।
डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड से बचाव की जानकारी जरूरी : सुरेश खन्ना
वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर धोखाधड़ी से बचाव के प्रति जागरूकता को जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो उसे तत्काल उठाए जाने वाले कदमों और रकम वापस पाने की प्रक्रिया की जानकारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन, बेहतर कानून-व्यवस्था, निवेश और रोजगार के जरिए उत्तर प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है।
साइबर फ्रॉड में पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण
एसपी साइबर क्राइम राजेश यादव ने साइबर अपराध की चुनौतियों और बचाव के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी, फर्जी अप्रूवल सहित कई तरीकों से साइबर अपराधी लोगों को निशाना बनाते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय उसकी प्रामाणिकता जांचना जरूरी है। साइबर फ्रॉड के मामले में समय सबसे महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार पहले एक घंटे के भीतर शिकायत करने से रकम को होल्ड या फ्रीज कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
राजेश यादव ने बताया कि प्रदेश में साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रत्येक थाने में साइबर हेल्प डेस्क की व्यवस्था है। लखनऊ में 1930 कॉल सेंटर के साथ साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर संचालित किया जा रहा है। शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक के माध्यम से रकम रोकने की कार्रवाई की जाती है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध सीमाओं से परे होने वाला अपराध है। इसलिए पुलिस और बैंक के साथ स्कूल-कॉलेज, ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह, यूथ एवं स्पोर्ट्स क्लब तथा स्थानीय संगठनों की भागीदारी भी जरूरी है।
कार्यक्रम में सचिव वित्त संदीप कौर, विशेष सचिव वित्त मनोज कुमार तिवारी, साइबर क्राइम के एसपी राजेश यादव, एसबीआई नई दिल्ली के उप महाप्रबंधक राजीव कुमार मिश्रा, नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक संजीव डी. रोहिल्ला और केनरा बैंक के उप महाप्रबंधक संदीप सक्सेना सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
श्रम संहिताएं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में निभाएंगी महत्वपूर्ण भूमिका : अनिल राजभर
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू की जा रही चार श्रम संहिताएं देश और प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के चौथे दिन आयोजित ‘विशेष श्रम संहिताएं’ सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता श्रमिकों के हितों की रक्षा के साथ उद्योग जगत के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। श्रमिक और उद्योग एक-दूसरे के पूरक हैं, इसलिए दोनों के हित और भविष्य ध्यान में रखकर नीतियां एवं निर्णय लिए जा रहे हैं।
राजभर ने कहा कि उत्तर प्रदेश लगातार दो वर्षों से देश में नए कारखानों के पंजीयन के मामले में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2017 के बाद प्रदेश में बड़ी संख्या में नए कारखाने पंजीकृत हुए हैं। उनके अनुसार यह उद्योगों के लिए बेहतर वातावरण तैयार करने की दिशा में किए गए प्रयासों का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई, कनेक्टिविटी में सुधार हुआ, पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराई गई और उद्योगों के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार हुआ। इसका परिणाम बढ़ते निवेश और रोजगार के अवसरों के रूप में सामने आ रहा है।
उद्योग और श्रमिक दोनों के हितों में संतुलन
राजभर ने कहा कि सरकार के सामने हमेशा यह चुनौती रही है कि श्रमिकों के हित प्रभावित किए बिना उद्योग जगत का मनोबल बनाए रखा जाए। इसी उद्देश्य से श्रमिकों और उद्यमियों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा, बिना उद्योग के श्रमिकों और बिना श्रमिकों के उद्योग की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए दोनों के हित, भावनाएं और भविष्य समझकर निर्णय लेना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि चार श्रम संहिताओं के लागू होने से श्रम कानूनों में सुधार और सरलीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने विभिन्न हितधारकों तथा उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद किया है और उत्तर प्रदेश सरकार भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ रही है।
राजभर ने उद्योग जगत को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार के दरवाजे खुले हैं। किसी उद्योग को समस्या होने पर विभागीय अधिकारी और सरकार समाधान के लिए उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले और आज उत्तर प्रदेश की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है और इस परिवर्तन में उद्योग जगत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आने वाले समय में वैश्विक प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां बढ़ेंगी, इसलिए सरकार और उद्योग जगत के बीच निरंतर संवाद और सहयोग आवश्यक होगा।
कार्यक्रम में श्रम विभाग के अपर मुख्य सचिव आशीष कुमार गोयल, श्रम आयुक्त सौम्य अग्रवाल, जुनैद, बसंत गंगवार, राकेश द्विवेदी, बृजेश सहित गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा एवं एनसीआर क्षेत्र के श्रम विभाग के अधिकारी, उद्योग प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
श्रम संहिताओं से उद्योगों के लिए आसान होगा अनुपालन, सिंगल विंडो व्यवस्था को भी मिलेगा विस्तार : गोयल
अपर मुख्य सचिव श्रम एवं सेवायोजन आशीष कुमार गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’, ‘ईज ऑफ लिविंग’ और ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन के अनुरूप चार श्रम संहिताओं के माध्यम से पुराने अनेक श्रम कानूनों को समाहित कर व्यवस्था सरल बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि उद्योग जगत लंबे समय से श्रम कानूनों की जटिलता और अधिक संख्या के कारण होने वाली अनुपालन संबंधी कठिनाइयों को दूर करने की मांग करता रहा है। चारों संहिताओं के माध्यम से श्रम कानूनों को व्यवस्थित किया गया है।
गोयल ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इनसे संबंधित अधिकांश नियमावलियां जारी हो चुकी हैं। उद्योगों की सुविधा के लिए सिंगल विंडो व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न विभागों और स्थानीय निकायों के लिए एक ही पोर्टल से आवेदन की सुविधा उपलब्ध होगी।
उन्होंने कहा कि इससे उद्योगों का समय बचेगा, अनुपालन आसान होगा और प्रदेश में निवेश का वातावरण मजबूत होगा।
उन्होंने श्रमिकों और उद्योग को एक-दूसरे का पूरक बताते हुए कहा कि श्रमिकों की सुरक्षा के साथ उद्योगों के लिए सुविधाजनक व्यवस्था बनाना सरकार की प्राथमिकता है। प्रदेशभर में श्रम संहिताओं के प्रति जागरूकता के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी और विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में इनके प्रावधानों का प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन उद्योग और श्रमिक दोनों के हित में : सौम्या अग्रवाल
श्रमायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि सत्र का मुख्य उद्देश्य उद्योग और श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए श्रमिक सम्मान, सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है।
उन्होंने बताया कि पुराने श्रम कानूनों को समाहित करते हुए चार श्रम संहिताएं—वेतन संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता तथा व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता—लागू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि इनके माध्यम से मल्टीपल रजिस्ट्रेशन से मुक्ति और सिंगल विंडो व्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाना, श्रमिकों का डिजिटल डेटाबेस तैयार करना तथा विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने सुरक्षित कार्यस्थल, अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप व्यावसायिक सुरक्षा और स्वास्थ्य तथा महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण के साथ समान अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
निवेशकों के बीच भरोसे से बना उत्तर प्रदेश का क्रेडिट : नंदी
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने कहा कि उत्तर प्रदेश ने निवेशकों के बीच अपना क्रेडिट और भरोसा संवाद, सुविधा और निरंतर सहयोग के माध्यम से बनाया है।
ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो के चौथे दिन उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के ‘फ्रॉम योर फैक्ट्री टू द फ्रंट लाइन’ नॉलेज सेशन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार निवेशकों को केवल निवेश के लिए आमंत्रित करने तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि उद्योग स्थापित होने तक आवश्यक सहयोग और हैंडहोल्डिंग उपलब्ध कराने पर जोर है।
नंदी ने बताया कि दुनिया के विभिन्न देशों और प्रमुख शहरों में किए गए रोड शो तथा निवेशकों के साथ लगातार संवाद का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तर प्रदेश के प्रति भरोसा बढ़ा है। यूपीआईटीएस में विभिन्न देशों की भागीदारी को भी उन्होंने इसी बढ़ते संवाद और विश्वास से जोड़ा।
डिफेंस कॉरिडोर में करीब 40 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड—लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अलीगढ़ और आगरा—में अब तक लगभग 40,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं। करीब 1,142 हेक्टेयर भूमि विभिन्न उद्योगों को आवंटित की जा चुकी है।
नंदी ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है जिसमें निवेशक को फाइल लेकर एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें। निवेशक के प्रदेश में आने के बाद उसकी जरूरत समझकर संबंधित विभागों और अधिकारियों के साथ समन्वय से समाधान उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
‘निवेशक आए तो उद्योग लगने तक साथ खड़ी रहे सरकार’
उन्होंने कहा कि केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है। निवेशक को नीति, कनेक्टिविटी, आधारभूत ढांचे, टेस्टिंग, तकनीकी सुविधाओं और आवश्यक अनुमतियों के संबंध में भी सहयोग मिलना चाहिए।
रक्षा सप्लाई चेन में एमएसएमई और स्टार्टअप के अवसर
नंदी ने कहा कि रक्षा क्षेत्र का मतलब केवल टैंक, मिसाइल या विमान बनाना नहीं है। प्रिसीजन कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक सर्किट, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, तकनीकी टेक्सटाइल, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स सहित पूरी सप्लाई चेन में अवसर हैं।
उन्होंने कहा कि डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के छह नोड में ऐसा रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है, जिसका लाभ बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई, स्टार्टअप, कंपोनेंट निर्माता और टेक्नोलॉजी कंपनियों को भी मिल सकता है।
उन्होंने निवेश के लिए कनेक्टिविटी, कानून-व्यवस्था और भरोसे को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार एक्सप्रेसवे, परिवहन नेटवर्क, एयर कनेक्टिविटी और औद्योगिक आधारभूत ढांचे से कारोबार के अवसर बढ़े हैं।
उन्होंने निवेशकों से उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और यूपीडा से जुड़ने का आह्वान किया।
रक्षा क्षेत्र की मांग सुनिश्चित, सप्लाई चेन में हर उद्योग के लिए अवसर : कर्नल संजय सिंह
यूपी डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सीजीएम रिटायर्ड कर्नल संजय सिंह ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में अवसर केवल टैंक, मिसाइल और विमान बनाने वाली बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं हैं।
उन्होंने प्रिसीजन इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेंसर, बैटरी, विशेष केबल, सॉफ्टवेयर, एडवांस मटेरियल, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स को रक्षा सप्लाई चेन के महत्वपूर्ण हिस्से बताया।
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की मांग सामान्य बाजार की तरह अनुमान आधारित नहीं होती, बल्कि सशस्त्र बलों की निर्धारित आवश्यकताओं पर आधारित होती है। इसलिए स्वदेशी निर्माण के लिए बाजार की स्पष्ट संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने उद्योगों से अपनी मौजूदा विनिर्माण क्षमता का आकलन कर यह पहचानने का आह्वान किया कि वे रक्षा क्षेत्र की किस आवश्यकता को पूरा कर सकते हैं।
संजय सिंह के अनुसार डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में भूमि, टेस्टिंग सुविधाओं, आरएंडडी और निवेशक सुविधा सहित ऐसा इकोसिस्टम विकसित किया जा रहा है जिसमें बड़े उद्योगों के साथ एमएसएमई और स्टार्टअप भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन सकें।
30 एमओयू से बाजार तक पहुंचेंगी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की ओर से आयोजित बायर-सेलर बैठक में महिला समूहों और नामी कंपनियों के बीच करीब 30 एमओयू हुए।
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की मौजूदगी में हुए इन समझौतों का उद्देश्य महिला समूहों को बड़े खरीदारों और बाजार से जोड़ना था। मौर्य ने अधिकारियों से कहा कि ट्रेड शो में हुए समझौतों की लगातार निगरानी की जाए और सभी एमओयू धरातल पर उतरने चाहिए।
डेढ़ करोड़ बच्चों की ड्रेस से मिलेगा बड़ा बाजार
मौर्य ने कहा कि अगले सत्र से प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब डेढ़ करोड़ बच्चों की ड्रेस तैयार कराने की व्यवस्था में स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को जोड़ा जाएगा।
उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में बच्चों की ड्रेस तैयार करने का काम मिलने से महिला समूहों के लिए रोजगार और कारोबार का नया अवसर तैयार होगा। सरकार का लक्ष्य महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ से आगे ‘करोड़पति दीदी’ बनाने का है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। महिला समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए ऐसे मंच महत्वपूर्ण हैं जहां महिलाएं सीधे कंपनियों से कारोबारी संबंध स्थापित कर सकें।
खरीदारों से सीधे जुड़ीं महिलाएं
बायर-सेलर सत्र में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने उत्पाद कंपनियों के प्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में महिलाओं की सफलता की कहानियों पर लघु फिल्म भी दिखाई गई। प्रेरणा कैंटीन और सरस हाट के माध्यम से आगे बढ़ीं महिलाओं के अनुभव भी सामने आए।
उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक अरुण कुमार ने कहा कि लाखों महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में आगे बढ़ रही हैं और ट्रेड शो उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तथा संभावित खरीदारों से जोड़ रहा है।
पांच लाख के ऋण से शुरू कारोबार
सिद्धार्थनगर के आजाद स्वयं सहायता समूह की सरोज देवी ने बताया कि उन्होंने पांच लाख रुपये का ऋण लेकर कारोबार शुरू किया। सरकारी सहयोग से ऋण चुकाने के बाद उनका सालाना कारोबार छह लाख रुपये तक पहुंच गया।
अमरोहा की प्रियांशी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी कौशल्या ने तीन लाख रुपये के ऋण से मसाला कारोबार शुरू किया और उनका वार्षिक कारोबार छह लाख रुपये से अधिक हो गया।
नवी प्रेरणा स्वयं सहायता समूह की शफीका ने बताया कि उनका कारोबार 10 लाख रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है।
ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव सौरभ बाबू ने कहा कि महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री के लिए खरीदार कंपनियों के साथ एमओयू की सुविधा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण पहल है। इससे महिलाओं को उत्पादन के साथ बाजार भी मिलेगा।
कार्यक्रम में नरेंद्र कश्यप, हंसराज विश्वकर्मा, सौरभ बाबू, अरुण कुमार, प्रवीणानंद और चंद्रशेखर सहित अधिकारी मौजूद रहे।
यूपीआईटीएस में छाया यूपीएसडीएम के हुनर का जादू
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन का पवेलियन हुनर, उत्साह और उमंग का केंद्र बना रहा।
प्रदर्शनी के चौथे दिन पीएसी की 32वीं वाहिनी के जवानों ने बैंड की प्रस्तुति देकर प्रदर्शनी परिसर में देशभक्ति का माहौल बनाया। इसके बाद युवाओं ने ‘कौशल मंच’ पर विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल के अधिकारी भी मंच पर पहुंचे और अपने हुनर का प्रदर्शन किया।
पवेलियन में 16 प्रत्यक्ष कौशल प्रदर्शन केंद्रों पर सीखने-सिखाने का क्रम चलता रहा। बच्चों से लेकर बड़ों तक लोगों ने विभिन्न कौशलों को करीब से देखा और उनमें भागीदारी की।
शाम को दिल्ली घराने के उस्ताद अलीम खान एवं समूह की प्रस्तुति ने माहौल को संगीत से भर दिया। उस्ताद अलीम खान और उनके बेटे अरीम खान ने वायलिन पर प्रस्तुति दी, जबकि तबले पर समीर खान ने संगत की।
घर की रसोई से ट्रेड शो तक पहुंचा गाजियाबाद की महिलाओं के अचार का स्वाद
ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में आयोजित यूपीआईटीएस में गाजियाबाद की महिलाओं के हाथों तैयार अचार, मुरब्बा और जवे खरीदारों का ध्यान खींच रहे हैं।
स्टॉल पर पहुंचने वाले लोग उत्पादों का स्वाद लेने के साथ ऑर्डर भी दे रहे हैं। कई ग्राहकों ने ऑनलाइन भुगतान कर उत्पादों की बुकिंग की। बड़े ऑर्डर मिलने की उम्मीद से महिला उद्यमियों में उत्साह है।
खेत की सरसों के तेल से तैयार अचार
खंजरपुर गांव की रीना धतरवाल पहली बार अपने उत्पादों के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक्सपो में पहुंचीं। उन्होंने दीपराज ऑर्गेनिक पिकल्स नाम से फर्म शुरू की है। वह घर में तैयार मसालों और अपने खेत की सरसों से निकाले गए तेल का इस्तेमाल कर अचार तैयार करती हैं।
रीना के अनुसार ट्रेड शो में आने के बाद उनके उत्पादों को व्यापक पहचान मिली और पहले दिन ही लोगों ने ऑनलाइन भुगतान कर अचार, मुरब्बा और जवे के ऑर्डर दिए।
नए कारोबार को मिला बड़ा मंच
मोदीनगर की ई नारी शक्ति वूमेन एंपावर संस्था ने नींबू, आम और मिर्च के अचार सहित घरेलू उत्पादों का स्टॉल लगाया है। संस्था से जुड़ी महिलाओं ने बताया कि उन्होंने हाल ही में कारोबार शुरू किया है और बड़े मंच पर ग्राहकों तथा खरीदारों के सामने उत्पाद रखने का अवसर उनके लिए नया अनुभव है।
दूसरी महिलाओं को भी दिया रोजगार
गाजियाबाद की पूनम ने ‘पूनम पिकल्स’ नाम से अपना ब्रांड बनाया है। वह घर में तैयार मसालों से अचार बनाती हैं और इस काम में दूसरी महिलाओं को भी रोजगार से जोड़ रही हैं।
पूनम ने बताया कि शुरुआत में इतने बड़े एक्सपो में आने को लेकर झिझक थी, लेकिन ग्राहकों की प्रतिक्रिया से उनका आत्मविश्वास बढ़ा। उनके अनुसार ट्रेड शो से मिले संपर्क और ऑर्डर कारोबार के विस्तार में मदद करेंगे।
खेत से बाजार तक बदलेगा किसानों का सफर, ट्रेड शो में ब्रांडिंग और डिजिटल बिक्री का मंत्र
यूपीआईटीएस में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को खेती के साथ ब्रांडिंग, पैकेजिंग और डिजिटल बिक्री पर ध्यान देने की जानकारी दी गई।
पश्चिम मैदानी कृषि जलवायु क्षेत्र के किसान मेले में मेरठ मंडल समेत पश्चिमी यूपी के सात जिलों के प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। विशेषज्ञों ने एफपीओ को किसानों की सामूहिक शक्ति के रूप में विकसित करने, उत्पादन लागत घटाने, उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने और बड़े बाजार तक सीधी पहुंच बनाने के उपाय बताए।
मेले का आयोजन कृषि सूचना तंत्र के सुदृढ़ीकरण एवं कृषक जागरूकता कार्यक्रम के तहत हुआ। संयुक्त कृषि निदेशक संतोष राय और संयुक्त कृषि निदेशक मेरठ मंडल स्मिता वर्मा ने इसका शुभारंभ किया।
मेरठ, बुलंदशहर, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत, शामली और मुजफ्फरनगर के प्रगतिशील किसान इसमें शामिल हुए।
परियोजना निदेशक नीरज सुव्रत ने कहा कि एफपीओ के माध्यम से किसान अपनी उपज एकत्र कर उसकी पैकेजिंग और ब्रांडिंग कर सकते हैं। इससे बड़े खरीदारों तक पहुंच आसान हो सकती है।
किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि यंत्रों की सामूहिक खरीद के फायदे भी बताए गए। थोक खरीद से लागत कम करने और सामूहिक बिक्री से सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
ऑनलाइन बाजार से जुड़ने की जानकारी
ओएनडीसी के उपाध्यक्ष प्रवीन चौधरी ने बताया कि एफपीओ ई-कॉमर्स के माध्यम से अपने उत्पाद ऑनलाइन स्टोरफ्रंट पर सीधे ग्राहकों तक पहुंचा सकते हैं। डिजिटल भुगतान, प्रचार और आपूर्ति व्यवस्था के माध्यम से बाजार पहुंच बढ़ाई जा सकती है।
सिद्धार्थ गौतम ने उत्पादन लागत घटाने और उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने के उपाय बताए। उप कृषि निदेशक गौतमबुद्धनगर विवेक दुबे ने जिले में कृषि विभाग की योजनाओं और कृषक हित में किए गए कार्यों की जानकारी दी।
किसान मेले ने पश्चिमी यूपी के किसानों को खेती से आगे उपज के कारोबार की पूरी श्रृंखला समझने का अवसर दिया। एफपीओ को उत्पादन, बाजार, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने रखा गया।
यूपीआईटीएस के सांस्कृतिक मंच पर दिखी प्रदेश की समृद्ध विरासत
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 के चौथे दिन कारोबार और उद्योग के साथ उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत भी आकर्षण का केंद्र बनी।
देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए कलाकारों ने लोक और शास्त्रीय परंपराओं की विविधता को मंच पर प्रस्तुत किया।
वाराणसी के पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र ने सितार की प्रस्तुति दी। लखनऊ की सबीना सैफी ने सुगम संगीत प्रस्तुत किया, जबकि नोएडा की निशा केसरी ने कथक के माध्यम से शास्त्रीय नृत्य की भाव-भंगिमाओं और लयकारी का प्रदर्शन किया।
पीलीभीत के राजनेश राणा ने पारंपरिक थारू जनजातीय नृत्य प्रस्तुत किया। इसके साथ सूफी बैंड की प्रस्तुति ने कार्यक्रम में संगीत की अलग रंगत जोड़ी।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने यूपीआईटीएस को केवल व्यापार और निवेश तक सीमित आयोजन के बजाय कला, संस्कृति, परंपरा और रचनात्मक प्रतिभाओं के मंच के रूप में भी प्रस्तुत किया। देश-विदेश से आए आगंतुकों को उत्तर प्रदेश की विविध सांस्कृतिक विरासत को करीब से देखने का अवसर मिला।
5.48 लाख से अधिक फुटफॉल के साथ यूपीआईटीएस ने रचा नया रिकॉर्ड
ग्रेटर नोएडा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘लोकल से ग्लोबल’ विजन के अनुरूप आयोजित चौथे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो ने जनभागीदारी के मामले में भी नया आंकड़ा दर्ज किया है।
28 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित पांच दिवसीय ट्रेड शो में कुल 5,48,881 फुटफॉल दर्ज की गई। इसमें 1,56,523 घरेलू कारोबारी खरीदार और 3,92,358 सामान्य आगंतुक शामिल रहे। ट्रेड शो का अंतिम दिन मंगलवार को था, इसलिए फुटफॉल बढ़ने की संभावना जताई गई।
ट्रेड शो अब केवल कारोबारी और उद्योग जगत तक सीमित नहीं रहा। आम लोगों ने भी प्रदेश के उत्पादों, हस्तशिल्प, हथकरघा, ओडीओपी, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उत्पादों और आधुनिक विनिर्माण की झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में भागीदारी की।
कारोबार और जनभागीदारी का संगम
घरेलू कारोबारी खरीदारों ने उत्पादों की गुणवत्ता, कीमत, उत्पादन क्षमता और निर्यात संभावनाओं को समझने के लिए स्टॉल का दौरा किया। वहीं सामान्य आगंतुकों ने विभिन्न जिलों के स्थानीय उत्पादों और शिल्प को करीब से देखा।
1,56,523 घरेलू कारोबारी खरीदारों की मौजूदगी ने प्रदेश के उद्यमियों को देशभर के व्यापारियों और संभावित कारोबारी साझेदारों से सीधे जुड़ने का अवसर दिया।
‘लोकल से ग्लोबल’ विजन को मजबूती
ट्रेड शो में ओडीओपी, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि आधारित उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, चमड़ा, कालीन, पीतल, कांच, लकड़ी और अन्य पारंपरिक एवं आधुनिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए।
3,92,358 सामान्य आगंतुकों की मौजूदगी ने इसे व्यापक जनभागीदारी वाला आयोजन बनाया। प्रदर्शनी हॉल में घरेलू और विदेशी खरीदारों की भागीदारी से छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए नए बाजार और संभावित व्यापारिक साझेदारों से जुड़ने के अवसर बने।
यूपीआईटीएस-2026 में चार दिन में ₹5,500 करोड़ के व्यापारिक समझौते
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 ने चार दिनों में व्यापारिक समझौतों के स्तर पर भी महत्वपूर्ण आंकड़े दर्ज किए।
25 से 29 सितंबर तक आयोजित पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में 28 सितंबर तक ₹5,500 करोड़, यानी करीब 574 मिलियन अमेरिकी डॉलर, के 3,765 व्यापारिक समझौतों (एमओयू) पर हस्ताक्षर हो चुके थे।
इसके अतिरिक्त देश-विदेश के खरीदारों और कंपनियों की ओर से ₹12,500 करोड़ की कारोबारी पूछताछ दर्ज की गई।
एफआईईओ के अपर महानिदेशक सुविध शाह के अनुसार 28 सितंबर तक कुल 35,387 बी2बी बैठकें हुईं। इनमें अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए आयोजित रिवर्स बायर्स सेलर्स मीट में 11,887 बैठकें, जबकि मुख्य प्रदर्शनी क्षेत्र में घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच 23,500 बी2बी बैठकें हुईं।
इन बैठकों ने प्रदेश के उद्यमियों, निर्माताओं और निर्यातकों को वैश्विक खरीदारों से सीधे संवाद का अवसर दिया।
स्थानीय उत्पादों से वैश्विक बाजार तक
यूपीआईटीएस को औद्योगिक नीतियों, निवेश अनुकूल वातावरण और उद्यमिता को वैश्विक बाजार से जोड़ने वाले मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया। एमएसएमई, ओडीओपी, हथकरघा, हस्तशिल्प, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण और आधुनिक विनिर्माण क्षेत्र के उद्यमियों को यहां घरेलू और विदेशी खरीदारों के साथ संवाद और समझौते करने का अवसर मिला।
ट्रेड शो के माध्यम से उत्तर प्रदेश के पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया गया।
इंटरनेशनल ट्रेड शो में 300 जेन जी-जेन अल्फा के बीच कला-संस्कृति का ‘मुकाबला’
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में रविवार को नई पीढ़ी के विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
28 से अधिक स्कूलों के 300 से अधिक विद्यार्थियों ने कला एवं संस्कृति प्रतियोगिता में तीन विधाओं में भाग लिया। जेपी पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा ने सह-नोडल विद्यालय ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल के साथ मिलकर प्रतियोगिता आयोजित की।
प्रतियोगिता में प्रस्तुति कला, दृश्य कला और ‘हाथों की विरासत’ कला एवं शिल्प शामिल रहे। कक्षा 6-8 और 9-12 के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
सुर-ताल में दिखे संस्कृति के रंग
प्रस्तुति कला के कक्षा 6-8 वर्ग में एस्टर पब्लिक स्कूल की तोशिता प्रथम, श्रीराम मिलेनियम स्कूल नोएडा की अर्शिया महाजन द्वितीय और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की ग्रुप सॉन्ग टीम तृतीय रही।
कक्षा 9-12 में बेथनी कॉन्वेंट स्कूल की युविका एवं चार्वी प्रथम, बेथनी कॉन्वेंट की संस्कृति पाठक एवं ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की अर्पिता द्वितीय तथा जेपी पब्लिक स्कूल की सांची तृतीय रहीं।
कैनवास पर उतरी विरासत
दृश्य कला में कक्षा 6-8 वर्ग में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की वर्णिका त्यागी प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल की अंशी मौर्य द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल की कृतिका सिंह तृतीय रहीं।
कक्षा 9-12 में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की अंशिका शर्मा प्रथम, ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की तान्या चौहान द्वितीय और रयान इंटरनेशनल स्कूल की चार्वी बघेल तृतीय रहीं।
हाथों ने दिया परंपरा को आकार
‘हाथों की विरासत’ में कक्षा 6-8 वर्ग में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की सानवी सिंह प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल के लोविश भाटी द्वितीय और जेपी पब्लिक स्कूल की श्रद्धा तृतीय रहीं।
कक्षा 9-12 में जेपी पब्लिक स्कूल के नवदीप तोमर एवं अनिका प्रथम, ग्रेटर नोएडा वर्ल्ड स्कूल के सार्थक द्वितीय और स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की सानवी सिंह तृतीय रहीं।
आयोजन जेपी पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या मीता भंडूला और ग्रैड्स इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या अदिति बसु के मार्गदर्शन में हुआ। समन्वय हेडमिस्ट्रेस रितु भटनागर और सुशीला ने किया।
निर्णायक मंडल में डॉ. बिनिता, डॉ. रजनी पिलानी, कला विशेषज्ञ आर.पी. पॉल और गीतांजलि शामिल रहीं। निर्णायकों ने विद्यार्थियों की मौलिकता, रचनात्मकता, प्रस्तुति और सांस्कृतिक विरासत की समझ की सराहना की।
100 टन कृषि कचरे से बनाया टेक्सटाइल फाइबर, अब अमेरिका-कोरिया पहुंचेगा यूपी का हेम्प
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में संभल की भारत हेम्प एग्रो ने कृषि अवशेष को उपयोगी टेक्सटाइल फाइबर में बदलने का मॉडल प्रस्तुत किया।
कंपनी ने करीब 100 टन भांग (हेम्प) के कृषि अवशेष को हाई-ग्रेड टेक्सटाइल फाइबर में बदलकर नया बाजार तैयार किया है। कंपनी ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया में हेम्प फाइबर के निर्यात के लिए एमओयू भी किया है।
कंपनी के फाउंडर आयुष सिंह के अनुसार वर्ष 2021 में इसकी शुरुआत हुई थी। पहले हेम्प का कृषि अवशेष जला दिया जाता था या फेंक दिया जाता था। कंपनी ने इसी अवशेष को टेक्सटाइल फाइबर में बदलने का काम शुरू किया।
उन्होंने बताया कि हेम्प फाइबर प्राकृतिक रूप से एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल होता है तथा कॉटन की तुलना में इसके उत्पादन में काफी कम पानी खर्च होता है।
एक हजार किसानों की आय दोगुनी
आयुष सिंह के अनुसार इस पहल से करीब एक हजार किसानों की आय दोगुनी हुई है, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से करीब तीन हजार ग्रामीण परिवारों को रोजगार और सहयोग मिला है।
कंपनी को उत्तर प्रदेश सरकार की प्रोटोटाइप डेवलपमेंट ग्रांट और केंद्र सरकार की नेशनल एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम से सहयोग मिलने की जानकारी दी गई।
उन्होंने बताया कि यूपीआईटीएस के पिछले तीन संस्करणों से कारोबार के लिए बड़े अवसर मिले हैं और अब अमेरिका तथा दक्षिण कोरिया में निर्यात संबंधी एमओयू से वैश्विक बाजार तक पहुंच का रास्ता खुला है।
उन्होंने केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की न्यू एज फाइबर पॉलिसी में हेम्प को एलाइड फाइबर के रूप में शामिल किए जाने को इस क्षेत्र के लिए नई संभावना बताया। उनके अनुसार भारत में हेम्प की संभावनाओं के बावजूद इससे जुड़े उत्पाद पहले चीन से आयात किए जाते थे, जिसके मद्देनजर देश में ही हेम्प फाइबर तैयार करने की क्षमता विकसित की जा रही है।
पहले सेल्फी, फिर सात फेरे… ट्रेड शो में योजनाओं को बताने का मनभावन अंदाज
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में समाज कल्याण विभाग के आउटलेट को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के लिए अलग अंदाज में तैयार किया गया।
आउटलेट में प्रवेश करते ही डिजिटल सेल्फी प्वाइंट दिखाई देता है। इसके बाद विवाह मंडप में दूल्हा-दुल्हन के फेरे लेते हुए मॉडल, सिलाई केंद्र और किराना स्टोर के मॉडल के माध्यम से योजनाओं की जानकारी दी जा रही है।
क्लिक होते ही मोबाइल तक पहुंच रही सेल्फी
डिजिटल सेल्फी प्वाइंट पर क्यूसेक मशीन के माध्यम से सेल्फी लेने की सुविधा है। फोटो लेने के बाद तस्वीर संबंधित व्यक्ति के मोबाइल फोन पर पहुंच जाती है।
इसके बाद कन्या विवाह योजना के मॉडल में दो सजे विवाह मंडप और दूल्हा-दुल्हन के कटआउट लगाए गए हैं। इलेक्ट्रॉनिक हवन कुंड के साथ पूरा दृश्य विवाह समारोह जैसा अनुभव देता है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह से संबंधित योजना को समझाने का माध्यम बनता है।
आगे अभ्युदय कोचिंग योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई है।
ज्योति टेलर से दीपक किराना स्टोर तक आत्मनिर्भरता
‘ज्योति टेलर’ काउंटर पर ग्रामीण महिला को घर से सिलाई का काम करते हुए दिखाया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं को सरकारी योजनाओं के माध्यम से अपने हुनर को आय के साधन में बदलने की प्रक्रिया समझाना है।
पास ही ‘दीपक किराना स्टोर’ का मॉडल छोटे कारोबार के माध्यम से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पाद भी प्रदर्शित किए गए हैं, जिन्हें आगंतुक खरीद भी रहे हैं।
आउटलेट में अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों की लोककलाओं और लोकनृत्यों की प्रस्तुतियां भी हो रही हैं। इस तरह सहायता, शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, रोजगार और संस्कृति से जुड़ी योजनाओं को एक ही परिसर में मॉडल और प्रत्यक्ष प्रदर्शन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में छाया योगी सरकार का यूपी स्टार्टअप मिशन
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-26 में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप मिशन के पवेलियन में प्रदेश के उभरते स्टार्टअप्स के नवाचार आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
स्टार्टअप मिशन के बैनर तले विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 60 स्टार्टअप्स ने अपने उत्पाद, तकनीक और नवाचार प्रदर्शित किए हैं। पिछले तीन दिनों में 5,000 से अधिक विजिटर्स पवेलियन का दौरा कर चुके हैं।
पवेलियन में आईटी-आईटीईएस, हेल्थटेक, एडटेक, कृषि, डीपटेक और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के स्टार्टअप्स शामिल रहे।
यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि भारत इनोवेट्स के लिए चयनित छह स्टार्टअप्स और यूपी स्टार्टअप फंड से वित्त पोषित छह स्टार्टअप्स ने भी यहां अपने उत्पाद एवं नवाचार प्रदर्शित किए।
एलएंडटी सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी के सीईओ संदीप कुमार ने स्टार्टअप संस्थापकों से संवाद कर उनके काम और नवाचारों की जानकारी ली तथा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
सौर ऊर्जा से उड़ान भर रहा ‘तेजस्वान’
रक्षा तकनीक और डीपटेक से जुड़े नवाचारों में आईआईटी कानपुर की डीपटेक स्टार्टअप मराल एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड का सौर ऊर्जा से संचालित अल्ट्रा लॉन्ग एंड्योरेंस यूएवी ‘तेजस्वान’ प्रमुख आकर्षण रहा।
दिए गए विवरण के अनुसार यह फिक्स्ड विंग विमान सौर ऊर्जा और बैटरी के संयोजन से संचालित होता है और लगातार 12 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम बताया गया है। इसमें जीपीएस स्पूफिंग-रोधी नेविगेशन और मल्टी-बैंड रेडियो आधारित इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर हार्डनिंग जैसी तकनीकें शामिल हैं।
इसकी रेंज करीब 150 किलोमीटर और जरूरत के अनुसार 250 किलोमीटर तक बढ़ाई जा सकती है। टेक-ऑफ वजन 60 किलोग्राम से कम तथा पेलोड क्षमता पांच किलोग्राम तक बताई गई है। अधिकतम गति 25 मीटर प्रति सेकंड और उड़ान के लिए करीब 200 मीटर रनवे की आवश्यकता बताई गई है।
इसका उपयोग निगरानी, संचार, लक्ष्य निर्धारण, समुद्री निगरानी तथा खोज एवं बचाव अभियानों में किया जा सकता है।
‘काल’ ड्रोन बना जिज्ञासा का केंद्र
रक्षा तकनीक में ‘काल’ ड्रोन भी आकर्षण का केंद्र रहा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह वन-वे अटैक ड्रोन प्रणाली है, जिसकी दूरी करीब 1,000 किलोमीटर और उड़ान अवधि 7 से 8 घंटे तक बताई गई है। इसका अधिकतम टेक-ऑफ वजन 200 किलोग्राम और 50 किलोग्राम तक हाई-एक्सप्लोसिव वारहेड ले जाने की क्षमता बताई गई है।
इसकी क्रूज गति 160 किलोमीटर प्रति घंटा और अधिकतम गति 200 किलोमीटर प्रति घंटा बताई गई है।
बेंगलुरु स्थित न्यूमेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज ने ‘निंबसस्कोप’ नामक टेथर्ड इलेक्ट्रिक यूएवी प्रदर्शित किया। यह जमीन से जुड़े तार के माध्यम से बिजली प्राप्त करता है और लगातार आठ घंटे तक हवा में स्थिर रहकर निगरानी कर सकता है। बिना टेदर के यह 45 मिनट तक 10 किलोमीटर की रेंज में उड़ान भर सकता है।
इसमें 256-बिट एईएस एन्क्रिप्शन, हाई-बैंडविड्थ वीडियो डाउनलिंक और सुरक्षित आरएफ लिंक जैसी सुविधाएं बताई गई हैं। इसे सर्विलांस, टोह लेने और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों के लिए उपयोगी बताया गया।
स्वदेशी नैनो और माइक्रो ड्रोन भी प्रदर्शित
आईडीआर के स्वदेशी नैनो और माइक्रो ड्रोन भी ट्रेड शो में प्रदर्शित किए गए। इनमें अभ्यास एमके-1 लंबी अवधि का माइक्रो एफपीवी ड्रोन है, जिसकी करीब 40 मिनट की उड़ान क्षमता बताई गई है और इसे ऑपरेटरों के प्रशिक्षण के लिए तैयार किया गया है।
वहीं आईडीआर का टैक्टिकल नैनो ड्रोन सैनिकों से आगे बढ़कर वास्तविक समय की खुफिया जानकारी उपलब्ध कराने में सक्षम बताया गया है।
राम मंदिर आंदोलन से शिक्षा क्रांति तक… क्यों आज भी याद किए जाते हैं महंत दिग्विजयनाथ



