सिंगापुर-जापान दौरे पर सीएम योगी, वैश्विक निवेश से ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनेगा उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 से 26 फरवरी 2026 तक सिंगापुर और जापान के आधिकारिक दौरे पर हैं। इस दौरान वे 33 वैश्विक कंपनियों और शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से मिलकर डेटा सेंटर, एविएशन, हरित ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में निवेश के अवसरों पर चर्चा करेंगे। ‘इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो’ के माध्यम से प्रदेश को वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। यह दौरा यूपी को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था और भारत के मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 से 24 फरवरी 2026 तक सिंगापुर की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य उत्तर प्रदेश और सिंगापुर के बीच आर्थिक सहयोग, संस्थागत साझेदारी तथा विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्र विशेष सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना है। यह दौरा भारत और सिंगापुर के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी रोडमैप के अनुरूप है, जिसमें आर्थिक सहयोग, डिजिटलाइजेशन, कौशल विकास, सतत विकास, कनेक्टिविटी और उन्नत विनिर्माण को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया है।
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य होने के साथ-साथ तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में भी अग्रणी है। वर्ष 2024-25 में राज्य की सकल राज्य घरेलू उत्पाद 30.25 लाख करोड़ रुपये रही है, जो 2025-26 में लगभग 36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। राज्य में डिजिटल सिंगल विंडो प्रणाली और क्षेत्र विशेष नीतियों सहित निवेशकों के लिए एक व्यापक और पारदर्शी सुविधा ढांचा उपलब्ध है, जो निवेश प्रस्तावों के त्वरित और सुगम क्रियान्वयन को सुनिश्चित करता है।
सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का सबसे बड़ा स्रोत है। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान सिंगापुर से भारत को 14.94 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है। इस पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री की यह यात्रा उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश के लिए एक प्रतिस्पर्धी, भरोसेमंद और दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री अपनी यात्रा के दौरान सिंगापुर के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के साथ उच्चस्तरीय बैठकें करेंगे। इनमें सिंगापुर के राष्ट्रपति थर्मन शनमुगारत्नम, प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग, विदेश मंत्री विवियन बालाकृष्णन, मानव संसाधन मंत्री तथा ऊर्जा एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी के प्रभारी मंत्री टैन सी लेंग शामिल हैं। इन बैठकों में भारत और सिंगापुर के बीच राष्ट्रीय स्तर पर तय सहयोग ढांचे को उत्तर प्रदेश में व्यावहारिक निवेश और परियोजना आधारित साझेदारी में बदलने पर विचार-विमर्श होगा।
इस यात्रा के दौरान प्रमुख संप्रभु और संस्थागत निवेशकों के साथ संवाद भी प्रस्तावित है। इनमें तामसेक और जीआईसी जैसे प्रतिष्ठित निवेशक शामिल हैं। इसके अतिरिक्त डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स, एविएशन सेवाएं, वित्तीय सेवाएं और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़े उद्योग प्रतिनिधियों के साथ भी विस्तृत बैठकें होंगी।
इन क्षेत्रों पर रहेगा खास फोकस
मुख्यमंत्री के विदेश दौरे के दौरान इन क्षेत्रों पर खास ध्यान दिया जाएगा। –
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर
सिंगापुर आधारित कंपनियां भारत में विशेष रूप से एआई सक्षम डिजिटल कैंपस के क्षेत्र में बहुवर्षीय विस्तार के दौर से गुजर रही हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे जेवर के समीप उपलब्ध भूमि पार्सलों को हाइपरस्केल और एआई आधारित डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए संभावित निवेश स्थलों के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
एविएशन, एमआरओ और एयर कार्गो लॉजिस्टिक्स
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास के साथ उत्तर प्रदेश सिंगापुर के एविएशन इकोसिस्टम के साथ साझेदारी की संभावनाएं तलाश रहा है। इस क्रम में सिंगापुर में एविएशन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं का स्थल निरीक्षण भी यात्रा कार्यक्रम का हिस्सा है।
कौशल विकास और टीवीईटी सहयोग
मुख्यमंत्री की यात्रा में सिंगापुर के तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा इकोसिस्टम के साथ संवाद शामिल है, जिसमें आईटीई सिंगापुर भी सम्मिलित है। कौशल विकास भारत और सिंगापुर सहयोग का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना हुआ है।
हरित ऊर्जा और औद्योगिक विकास
सतत विकास और हरित सप्लाई चेन के क्षेत्र में सिंगापुर की विशेषज्ञता उत्तर प्रदेश की नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं और एकीकृत औद्योगिक कॉरिडोर के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
सिंगापुर की धरती पर ‘इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो’
सिंगापुर यात्रा का समापन ‘इन्वेस्ट यूपी मेगा रोडशो’ के साथ होगा, जिसमें डेटा सेंटर संचालक, लॉजिस्टिक्स और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपर, नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियां, प्राइवेट इक्विटी फंड और संप्रभु संपत्ति कोष एक मंच पर एकत्र होंगे। इस आयोजन के माध्यम से डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, एविएशन आधारित औद्योगिक विकास, नवीकरणीय ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्रों में निवेश के अवसर प्रस्तुत किए जाएंगे। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को भारत के भीतर एक प्रतिस्पर्धी, विस्तार योग्य और निवेश अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।
यह यात्रा उप राष्ट्रीय स्तर पर भारत और सिंगापुर के आर्थिक सहयोग के विस्तार में उत्तर प्रदेश की सक्रिय और अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। उच्चस्तरीय संवाद को ठोस परियोजनाओं में परिवर्तित करने के लिए विधिवत फॉलो अप व्यवस्था, अकाउंट प्रबंधन और क्षेत्रीय टास्क फोर्स के गठन पर भी चर्चा होने की संभावना है।
सिंगापुर की 25 और जापान की 8 कंपनियों के शीर्ष प्रतिनिधियों से करेंगे मुलाकात
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों के उत्तर प्रदेश को ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ बनाने के लक्ष्य के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिंगापुर और जापान के चार दिवसीय दौरे पर आज रवाना होंगे। 2017 की म्यांमार यात्रा के बाद यह मुख्यमंत्री का पहला विदेशी दौरा होगा, जिसे प्रदेश की निवेश कूटनीति और औद्योगिक विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 23-24 फरवरी को सिंगापुर और 25-26 फरवरी को जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 33 वैश्विक कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर प्रदेश में निवेश, तकनीकी सहयोग और औद्योगिक विस्तार के नए अवसरों पर चर्चा करेंगे।
इस यात्रा की खास बात यह होगी कि मुख्यमंत्री जी-टू-बी (गवर्नमेंट टू बिजनेस) बैठकों और राउंड टेबल मीटिंग के जरिए निवेशकों से सीधे संवाद करेंगे। यूपी के सीईओ की तरह वे निवेशकों से प्रदेश के औद्योगिक रोडमैप, नीति स्थिरता और कारोबारी संभावनाओं पर स्पष्ट और परिणाम केंद्रित बातचीत करेंगे। प्रवासी भारतीयों और उत्तर प्रदेश वासियों को संबोधित करने के साथ वे स्कूली बच्चों से भी संवाद करेंगे और प्रदेश की विकास यात्रा साझा करेंगे।सरकार का मानना है कि 25 करोड़ नागरिकों की शक्ति उत्तर प्रदेश को उत्पादन और उपभोग दोनों का केंद्र बनाती है। विशाल श्रमबल, बड़ा बाजार और तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर ‘मैन्युफैक्चरिंग हब ऑफ इंडिया’ के विजन की मजबूत आधारशिला हैं।
सिंगापुर की 25 कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे सीएम योगी
सिंगापुर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री 25 कंपनियों के प्रतिनिधियों से मिलेंगे। गूगल और एसटीटी ग्लोबल जैसे निवेशकों के साथ डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, जापफा ग्रुप और ओलम इंटरनेशनल के साथ एग्रीबिजनेस, मैपलट्री और एआई सैट्स के साथ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क तथा एवीपीएन, जीएससी ग्रीन्स और ईडीपीआर सनसीप के साथ क्लीन व सौर ऊर्जा निवेश पर चर्चा होगी।
ग्रीनफील्ड वेंचर्स और ड्रीमट्रस्ट के साथ हॉस्पिटैलिटी व थीम पार्क, यूनिवर्सल सक्सेस ग्रुप के साथ पैकेजिंग, सेम्बकॉर्प के साथ इंडस्ट्रियल पार्क और सिंगापुर एयरलाइंस इंजीनियरिंग कंपनी के साथ एविएशन क्षेत्र में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। टेमासेक, जीआईसी और ब्लैकस्टोन जैसे वैश्विक निवेश फंड्स के साथ पूंजी निवेश, जबकि फुलर्टन फाइनेंशियल, डीबीएस बैंक और वर्टेक्स वेंचर्स के साथ फिनटेक व स्टार्टअप सहयोग पर भी बातचीत होगी।
जापान में आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे मुख्यमंत्री
जापान प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री आठ प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे। कुबोटा और सुजुकी के साथ ऑटोमोबाइल निवेश, टोक्यो इलेक्ट्रॉन के साथ सेमीकंडक्टर, तोशिबा के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग तथा टोयो डेंसो, जापान एविएशन इलेक्ट्रॉनिक्स और नागासे एंड कंपनी के साथ ऑटोमोबाइल सप्लाई चेन सहयोग प्रमुख एजेंडा रहेंगे। कनाडेविया के साथ ग्रीन हाइड्रोजन और मारुबेनी के साथ हॉस्पिटैलिटी व रियल एस्टेट निवेश पर भी चर्चा होगी।
जी-टू-बी और राउंड टेबल बैठकों के जरिए करेंगे संवाद
दौरे के दौरान आयोजित जी-टू-बी और राउंड टेबल बैठकों में मुख्यमंत्री प्रदेश की औद्योगिक नीति, भूमि बैंक, एक्सप्रेसवे नेटवर्क, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और कौशल विकास से जुड़े पहलुओं पर निवेशकों के साथ संवाद करेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इन बैठकों से निवेश प्रस्तावों को गति मिलेगी और संयुक्त परियोजनाओं का रास्ता साफ होगा। मुख्यमंत्री की यह यात्रा न केवल निवेश आकर्षित करने का प्रयास है, बल्कि वैश्विक मंच पर ‘ब्रांड यूपी’ को सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने में अहम कदम
चार दिन के इस दौरे में मुख्यमंत्री निवेशकों के सामने नए उत्तर प्रदेश की तस्वीर रखेंगे, जहां मजबूत कानून व्यवस्था, नीति स्थिरता और तेज कनेक्टिविटी निवेश के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने और ‘मेक इन यूपीवन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ को वैश्विक स्तर पर मजबूती देने में अहम साबित हो सकता है।
वन ट्रिलियन इकॉनमी के लक्ष्य के लिए योगी सरकार का बड़ा प्लान
सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश में व्यापक विदेशी निवेश लाने की मुहिम जारी है। इसी क्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य रविवार को जर्मनी पहुंचे हैं। यह यात्रा भारत व यूरोपीय संघ (EU) के बीच हाल में हुए मुफ्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement) के बाद की जा रही है, जिसे दोनों पक्षों के लिए ऐतिहासिक आर्थिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। इस समझौते को जनवरी 2026 में अंतिम रूप दिया गया था, जिससे भारत-ईयू के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसर खुल रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस समझौते में उत्तर प्रदेश के लिए निवेश तथा ओडीओपी उत्पादों के निर्यात की असीम संभावनाएं देख रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री सोमवार को जर्मनी में विभिन्न कंपनियों, व्यापार समूहों और उद्योगपतियों से मुलाकात करेंगे तथा उन्हें उत्तर प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करेंगे। इस दौरे के दौरान संभावित मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर भी हो सकते हैं, जो यूपी के निर्यात और औद्योगिक विस्तार को मजबूती देंगे। इस दौरे से संभावित निवेश के अलावा उत्तर प्रदेश के उत्पादों को यूरोपीय बाजारों में पहुंचने के मार्ग आसान होने की उम्मीद जताई जा रही है। ट्रेड डील के बाद यूपी के ब्रांडेड उत्पादों, टेक्सटाइल तथा फिनिश्ड गुड्स को यूरोपीय बाजारों में बेहतर प्रतिस्पर्धी स्थिति मिल सकती है। राज्य सरकार ने पहले भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार शो और निवेश सम्मेलनों के माध्यम से ग्लोबल बायर्स और व्यापारियों को यूपी के उत्पादों से रूबरू कराया है, जिसमें विभिन्न देशों से खरीदारों और निवेश प्रस्तावों का उत्साहजनक जुड़ाव रहा है।
यूपी की उपलब्धियों और निवेशोन्मुख माहौल पर होगी चर्चा
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जर्मनी में प्रदेश को भारत की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था, विशाल उपभोक्ता बाजार और बेहतर कनेक्टिविटी वाले निवेश गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करेंगे। वह बताएंगे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य में कानून-व्यवस्था मजबूत हुई है, एक्सप्रेस-वे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स हब जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने औद्योगिक माहौल को अनुकूल बनाया है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, ऑटो व ईवी, टेक्सटाइल, लेदर, फूड प्रोसेसिंग, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और ओडओपी में निवेश की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित करते हुए वह संदेश देंगे कि उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और यूरोपीय कंपनियों के लिए दीर्घकालिक साझेदारी का भरोसेमंद केंद्र बन सकता है।
अयोध्या में अब हर श्रद्धालु को ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना के अनुरूप मिलेगा सत्कार



