
काशी में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 59 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे, गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल
वाराणसी के सिगरा स्थित शहीद उद्यान में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 59 जोड़े विवाह बंधन में बंधे। इस दौरान 24 हिंदू जोड़ों ने वैदिक रीति से सात फेरे लिए, जबकि 34 मुस्लिम जोड़ों का निकाह संपन्न हुआ। समारोह में मुख्य अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया। सरकार ने प्रत्येक जोड़े पर एक लाख रुपये खर्च किए, जिसमें 60 हजार रुपये कन्या के खाते में भेजे गए। आयोजन ने सामाजिक समरसता और गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत किया।
- शहीद उद्यान में हिंदू जोड़ों ने लिए सात फेरे, मुस्लिम जोड़ों ने पढ़ा निकाह; सरकार ने प्रति जोड़ा एक लाख रुपये की सहायता देकर गरीब परिवारों की चिंता की दूर
वाराणसी। काशी में शुक्रवार को सामाजिक समरसता और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी झलक देखने को मिली, जब सिगरा स्थित शहीद उद्यान में आयोजित मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतिम दिन 59 जोड़े एक ही परिसर में वैवाहिक बंधन में बंध गए। इस आयोजन में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के जोड़ों ने अपनी-अपनी धार्मिक परंपराओं के अनुसार विवाह और निकाह संपन्न कर सामाजिक एकता का संदेश दिया।
समारोह में एक ओर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच 24 हिंदू जोड़ों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए, वहीं दूसरी ओर 34 मुस्लिम जोड़ों ने काजी की मौजूदगी में इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार निकाह कबूल किया। पूरे परिसर में मंत्रों की गूंज और निकाह की आयतों ने ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को साकार कर दिया। यह आयोजन सामाजिक सौहार्द, भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का जीवंत उदाहरण बन गया।
समारोह के दौरान मुख्य अतिथियों और जनप्रतिनिधियों ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्प वर्षा कर उनके सुखद, समृद्ध और उज्ज्वल वैवाहिक जीवन की कामना की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में परिजन, नागरिक और अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने इस भावनात्मक और गरिमामयी पल के साक्षी बने।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि सामूहिक विवाह समारोह भारत की समावेशी संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए बेटियों की शादी एक बड़ी जिम्मेदारी और चिंता का विषय होती है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से संचालित इस योजना ने गरीब परिवारों की इस चिंता को काफी हद तक दूर कर दिया है। उन्होंने प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन की सराहना करते हुए नवदंपतियों को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने की शुभकामनाएं दीं।
पूर्व एमएलसी अशोक धवन ने कहा कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना निर्धन परिवारों के सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि आज ये जोड़े अपने जीवन की नई शुरुआत कर रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि ये सभी नवविवाहित जोड़े अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसके जीवन को बेहतर बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से सरकार ने यह साबित किया है कि समाज की हर बेटी की गरिमापूर्ण विदाई शासन की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत प्रति जोड़े पर कुल एक लाख रुपये खर्च किए गए, जिसमें कन्या के बैंक खाते में सीधे 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता भेजी गई, 25 हजार रुपये की वैवाहिक उपहार सामग्री प्रदान की गई और 15 हजार रुपये विवाह की व्यवस्थाओं पर खर्च किए गए।
इस अवसर पर पार्षद मदन मोहन तिवारी, श्याम भूषण शर्मा, विनीत सिंह, अपर नगर आयुक्त सविता यादव सहित नगर निगम और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भी भाग लेकर नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित इस समारोह ने न केवल जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक सहयोग प्रदान किया, बल्कि सामाजिक समरसता, समानता और एकता का मजबूत संदेश भी दिया। यह आयोजन काशी की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनकर सामने आया।
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