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अब बदलेंगे भारत के शहर: मोदी सरकार ने मंजूर किया ₹1 लाख करोड़ का बड़ा फंड

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘Urban Challenge Fund’ को मंजूरी दी है, जिसके तहत शहरों के विकास के लिए ₹1 लाख करोड़ की केंद्रीय सहायता दी जाएगी। इस योजना से अगले पांच वर्षों में ₹4 लाख करोड़ का निवेश होगा। इसका उद्देश्य आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, जल एवं स्वच्छता सुविधाओं में सुधार और रोजगार सृजन है। योजना से छोटे और बड़े शहरों की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी और उन्हें आर्थिक विकास के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश के शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए ‘शहरी चुनौती कोष (Urban Challenge Fund – UCF)’ को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत केंद्र सरकार अगले पांच वर्षों में एक लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता (Central Assistance) प्रदान करेगी, जिससे कुल मिलाकर लगभग चार लाख करोड़ रुपये का निवेश शहरी बुनियादी ढांचे में किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य शहरों को आर्थिक विकास का मजबूत केंद्र बनाना और उन्हें आधुनिक, टिकाऊ तथा जलवायु-अनुकूल बनाना है।

शहरी विकास मॉडल में बड़ा बदलाव

शहरी चुनौती कोष भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव दर्शाता है। अब तक शहरी परियोजनाएं मुख्य रूप से सरकारी अनुदान पर आधारित थीं, लेकिन इस योजना में बाजार आधारित वित्तपोषण, निजी निवेश और सुधार-आधारित विकास मॉडल को प्राथमिकता दी जाएगी।

योजना के तहत किसी भी परियोजना की लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार देगी, जबकि कम से कम 50 प्रतिशत धन बाजार स्रोतों जैसे नगरपालिका बांड, बैंक ऋण और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) से जुटाना अनिवार्य होगा। शेष राशि राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश या शहरी स्थानीय निकाय (ULB) उपलब्ध कराएंगे।

योजना की अवधि और उद्देश्य

यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू रहेगा, जबकि परियोजनाओं का कार्यान्वयन 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य है:

  • उच्च गुणवत्ता वाला शहरी बुनियादी ढांचा तैयार करना
  • जल, स्वच्छता और परिवहन सुविधाओं को मजबूत करना
  • आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना
  • शहरों को जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से सुरक्षित बनाना
  • रोजगार के नए अवसर पैदा करना

सरकार का मानना है कि यह योजना शहरों को देश की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख इंजन बनाएगी।

छोटे शहरों को मिलेगा विशेष लाभ

योजना में छोटे और मध्यम शहरों को भी विशेष महत्व दिया गया है। इसके तहत 5,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना शुरू की जाएगी, जिससे छोटे शहर पहली बार बाजार से ऋण प्राप्त कर सकेंगे।

इस योजना के तहत:

  • पहली बार लिए गए ऋण पर 7 करोड़ रुपये या ऋण का 70% (जो कम हो) तक केंद्र सरकार गारंटी देगी
  • सफल पुनर्भुगतान के बाद 7 करोड़ रुपये या ऋण का 50% तक गारंटी दी जाएगी
  • इससे छोटे शहरों में 20 से 28 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं को समर्थन मिलेगा

इस कदम से टियर-2 और टियर-3 शहरों की वित्तीय क्षमता बढ़ेगी और उनका विकास तेज होगा।

किन क्षेत्रों में होगा निवेश

शहरी चुनौती कोष के तहत कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिनमें शामिल हैं:

1. आर्थिक विकास और शहरी विस्तार

  • आर्थिक केंद्रों का विकास
  • ट्रांजिट और आर्थिक कॉरिडोर
  • शहरी परिवहन और गतिशीलता सुधार
  • औद्योगिक और व्यावसायिक अवसंरचना

2. शहरों का पुनर्विकास

  • पुराने शहरों और व्यावसायिक क्षेत्रों का पुनर्निर्माण
  • विरासत स्थलों का संरक्षण
  • ब्राउनफील्ड क्षेत्रों का पुनर्विकास
  • भीड़भाड़ कम करने के लिए नए शहरी क्षेत्र विकसित करना

3. जल और स्वच्छता

  • जल आपूर्ति प्रणाली का आधुनिकीकरण
  • सीवरेज और वर्षा जल प्रबंधन
  • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन
  • स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण

किन शहरों को मिलेगा लाभ

इस योजना के तहत निम्नलिखित शहर पात्र होंगे:

  • 10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले शहर
  • सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियां
  • प्रमुख औद्योगिक शहर
  • पूर्वोत्तर और पर्वतीय क्षेत्रों के सभी शहरी निकाय
  • छोटे शहर और कस्बे (विशेष ऋण गारंटी योजना के तहत)

सरकार का लक्ष्य है कि देश के लगभग 4,423 शहरों को इस योजना का लाभ मिले।

सुधार आधारित और परिणाम उन्मुख योजना

शहरी चुनौती कोष केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं होगा, बल्कि इसमें सुधार आधारित ढांचा लागू किया जाएगा। इसके तहत:

  • डिजिटल और प्रशासनिक सुधार
  • वित्तीय पारदर्शिता
  • बेहतर शहरी नियोजन
  • सेवा वितरण में सुधार
  • तीसरे पक्ष द्वारा परियोजनाओं की निगरानी

परियोजनाओं का चयन प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिससे केवल प्रभावी और उच्च गुणवत्ता वाली परियोजनाएं चुनी जाएंगी।

भविष्य के ‘स्मार्ट और मजबूत’ शहरों की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि शहरी चुनौती कोष से बड़े पैमाने पर निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और शहरों की आर्थिक क्षमता मजबूत होगी। यह योजना भारत को आर्थिक रूप से मजबूत, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल शहरी राष्ट्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह योजना आने वाले वर्षों में भारत के शहरों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने और देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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