शहर को रेबीज मुक्त बनाने के लिए नगर निगम व वेदांता समूह के बीच हुआ एमओयू
वाराणसी में नगर निगम और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के बीच पशु कल्याण को लेकर ऐतिहासिक एमओयू हुआ है। इसके तहत ऐढ़े स्थित पशु जन्म नियंत्रण केंद्र को अत्याधुनिक बनाया जाएगा। वेदांता की पशु कल्याण पहल टाको के माध्यम से 15 वर्षों तक इसका संचालन होगा। 50 करोड़ रुपये के सीएसआर निवेश से वैज्ञानिक नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और आवारा पशुओं के मानवीय प्रबंधन से काशी को एनीमल-सेंसिटिव मॉडल शहर बनाया जाएगा।
- 50 करोड़ के सीएसआर निवेश से अत्याधुनिक बनेगा एबीसी सेंटर, 15 वर्षों तक टाको करेगी संचालन
वाराणसी। काशी अब पशु कल्याण और आवारा पशुओं के वैज्ञानिक प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक नया मॉडल प्रस्तुत करने जा रही है। इसी दिशा में सोमवार को नगर निगम वाराणसी और वेदांता समूह के अनिल अग्रवाल फाउंडेशन के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस एमओयू के तहत ऐढ़े स्थित नगर निगम के पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) केंद्र को अत्याधुनिक रूप से विकसित किया जाएगा और अगले 15 वर्षों तक इसका संचालन व प्रबंधन वेदांता की पशु कल्याण पहल टाको के माध्यम से किया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की ओर से प्रारंभिक चरण में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत 50 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। इस निवेश से एबीसी केंद्र को एनीमल बर्थ कंट्रोल रूल्स-2023 और भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। केंद्र में स्ट्रीट डॉग्स की नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण और पशु देखभाल का कार्य पूरी तरह वैज्ञानिक और मानवीय पद्धति से किया जाएगा।
एमओयू पर नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल और अनिल अग्रवाल फाउंडेशन की प्रेसिडेंट रितु झिंगन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर वेदांता लिमिटेड की गैर-कार्यकारी निदेशक और टाको की एंकर प्रिया अग्रवाल हेब्बर भी मौजूद रहीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रिया अग्रवाल हेब्बर ने कहा कि वेदांता का उद्देश्य वाराणसी में पशु कल्याण का ऐसा मानवीय और स्थायी मॉडल विकसित करना है, जिससे पशुओं और समाज के बीच बेहतर संतुलन और सह-अस्तित्व स्थापित हो सके। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल पशुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव सार्वजनिक स्वास्थ्य, स्वच्छता और नागरिक सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने कहा कि यह समझौता पशु कल्याण तंत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने बताया कि इस साझेदारी से शहर में आवारा पशुओं की आबादी पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा, जिससे सड़क दुर्घटनाओं, रेबीज और अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिमों में कमी आएगी। नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि इस एबीसी केंद्र के माध्यम से वाराणसी को पूरी तरह रेबीज मुक्त और एनीमल-सेंसिटिव शहर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
एमओयू के तहत अनिल अग्रवाल फाउंडेशन द्वारा आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, अनुभवी वेटरनरी डॉक्टर्स और पैरावेट स्टाफ की तैनाती, आधुनिक उपकरणों की व्यवस्था तथा केंद्र के दैनिक संचालन की पूरी जिम्मेदारी निभाई जाएगी। नगर निगम और वेदांता समूह की इस साझेदारी से काशी को शहरी पशु कल्याण के क्षेत्र में भारत के अग्रणी शहरों की सूची में शामिल करने की दिशा में ठोस कदम माना जा रहा है।
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, यह मॉडल भविष्य में अन्य नगर निकायों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण बनेगा, जहां वैज्ञानिक प्रबंधन और मानवीय दृष्टिकोण के साथ आवारा पशुओं की समस्या का समाधान किया जा सकेगा।
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